वरिष्ठ पत्रकार.तरनतारन.चंडीगढ़।
मोहाली की एक विशेष सीबीआई अदालत ने 1993 में पंजाब के तरनतारन जिले में एक फल विक्रेता को उसके घर से अगवा करने के बाद फर्जी मुठभेड़ में उसकी हत्या करने के मामले में शुक्रवार को एक पूर्व पुलिस अधिकारी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अधिकारियों ने बताया कि पूर्व स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) गुरबचन सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाने के अलावा अदालत ने तरनतारन शहर के तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) दिलबाग सिंह को भी अपहरण से संबंधित भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 364 के तहत 7 साल की जेल की सजा सुनाई।
जानिए, क्या था पूरा प्रकरण
दिलबाग सिंह पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। अधिकारियों ने बताया कि गुलशन कुमार को 22 जून 1993 को उनके घर से अगवा किया गया था, एक महीने तक अवैध हिरासत में रखा गया और उसी साल 22 जुलाई को फर्जी मुठभेड़ में उनकी हत्या कर दी गई। अदालत ने दिलबाग सिंह और पुलिस उपाधीक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए गुरबचन सिंह को दोषी पाया। 3 अन्य आरोपित पुलिस अधिकारी – सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई) अर्जुन सिंह और देविंदर सिंह, तथा उप-निरीक्षक (एसआई) बलबीर सिंह – की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो गई।
सुप्रीम कोर्ट ने सौंपा था सीबीआई को मामला
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 1995 में मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था। संघीय एजेंसी ने 1999 में अपना आरोपपत्र दाखिल किया। 21 साल बाद, 7 फरवरी, 2020 को आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए। मुकदमे के दौरान, सीबीआई ने प्रत्यक्षदर्शियों सहित 32 गवाहों को पेश किया, जिन्होंने इस बात के पुख्ता सबूत दिए कि दिलबाग सिंह और गुरबचन सिंह ने कुमार को उनके घर से अगवा किया, उन्हें अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा और बाद में 22 जुलाई, 1993 को उनकी हत्या कर दी। पुलिस ने 22 जुलाई 1993 को कुमार के परिवार को सूचित किये बिना ही उनके शव का तरनतारन में अंतिम संस्कार कर दिया।

