वरिष्ठ पत्रकार.लाहौर /चंडीगढ़।
भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन के तत्वावधान में, शनिवार को पाकिस्तान की सांस्कृतिक राजधानी लाहौर में शहीद भगत सिंह की 118वीं जयंती मनाई गई। यह फाउंडेशन कुरैशी परिवार की पहल पर अस्तित्व में आया, जिनकी जड़ें अबोहर में थीं और जो अगस्त 1947 में विभाजन के कारण यहाँ आकर बस गए थे।
भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन के अध्यक्ष इम्तियाज रशीद कुरैशी ने आज के कार्यक्रम की अध्यक्षता की। मुख्य अतिथि राजा जुल्करनैन (अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय; पूर्व सचिव, सर्वोच्च न्यायालय बार), मियां गुलाम उल्लाह खान जोया (अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय), मुक्तदर अख्तर शब्बीर (अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय; पूर्व सचिव, सर्वोच्च न्यायालय बार), खालिद जमां खान काकर (अधिवक्ता), और नूर मुहम्मद कसूरी (अध्यक्ष, पाक-भारत व्यापार परिषद) थे। अन्य लोगों ने भी भगत सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की।
उन्होंने बताया कि भगत सिंह मस्जिदों, मंदिरों, गुरुद्वारों और गिरजाघरों में जाकर लोगों से यह आग्रह करते थे कि प्रगति के लिए शांति आवश्यक है और हर धर्म की नींव शांति पर ही टिकी है। भगत सिंह भारत और पाकिस्तान दोनों के साझे नायक हैं और सभी के सर्वोच्च सम्मान के पात्र हैं।
मांग-शहीद भगत सिंह को ‘भारत रत्न’ और ‘निशाने पाकिस्तान’ से सम्मानित किया जाए
इस अवसर पर एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें मांग की गई कि इस महान शहीद को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ और ‘निशाने पाकिस्तान’ से सम्मानित किया जाए। एक अन्य प्रस्ताव में मांग की गई कि भगत सिंह के जीवन वृत्त को शैक्षिक पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, उनके स्मारक डाक टिकट और सिक्के भी जारी किए जाएँ और एक प्रमुख सड़क का नाम उनके नाम पर रखा जाए। प्रतिभागियों ने सर्वसम्मति से मांग की कि लाहौर के शादमान चौक का नाम भगत सिंह के नाम पर रखा जाए। यह चौक उस जेल का एक हिस्सा था जहां भगत सिंह और उनके साथियों को फांसी दी गई थी।

