MOTHERS DAY SPECIAL—-गृहणी जीवन के साथ-साथ इन महिलाओं ने हर चुनौती को बनाया आसान…..साबित कर दिखाया हम किसी से कम नहीं, सलाम करता है इनकी बहादुरी-जज्बे पर एसएनई न्यूज

विनय कोछड़. चंडीगढ़। 

गृहणी जीवन के साथ-साथ महिला हर क्षेत्र में बाजी मार चुकी है। उसने साबित कर दिखाया है कि वह किसी पुरुष से कम नहीं है। मदर्स डे पर एसएनई न्यूज उन महिलाओं के जीवन पर प्रकाश डाल रहा है, जिन्होंने वाक्य ही गृहिणी जीवन के साथ-साथ समाज की उस मुश्किल का डटकर सामना किया है, जिसे पूरा करना हर किसी के बस की बात नहीं थी। बिना किसी पारिवारिक सहयोग से महिला को हर मुश्किल को सामना करना कितना कठिन होता है, शायद, उनका सामना करने वाली महिलाओं से बेहतर कोई अन्य नहीं जान सकता है। हमारी न्यूज़ वेब पोर्टल हमेशा ही उन महिलाओं को सलाम करता है तथा करता रहेगा जो अपने गृहस्थ जीवन के साथ-साथ समाज की उस कठिन मुश्किल को डट कर मुकाबला करते हुए उसे पूरा कर दिखाया तथा समाज की अन्य महिलाओं के लिए भी एक अच्छी उदाहरण बनकर दिखाया। कहते है महिला को के काम कभी इतना आसान तथा हलका में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि, जो महिला समाज में काम करती है, शायद , अन्य समाज के लोग उसे पूरा नहीं कर पा सकते। 

मां शब्द शायद हर किसी ने सुना है, लेकिन, इसके पीछे की कहानी को कोई-कोई ही जानता है। गृहस्थ जीवन से लेकर सामाजिक कामकाज में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेना, इस बात का संकेत है कि अब की महिलाएं गृहस्थ जीवन से उठ कर हर मैदान में फतेह कर रही है। कहने का भाव , महिलाएं किसी से कम नहीं है। उन्हें अब किसी का सहयोग या फिर मदद की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि, उन्होंने अपनी संकल्प शक्ति को इतना मजबूत कर दिया कि उन्हें हराने वाला खुद हार जाता है। बच्चों को जानना भले एक मां से कौन अच्छा जान सकता है। बच्चों की हर आवश्यकता को एक मां ही पूरा कर सकती है। सुबह से लेकर रात मां अपने बच्चों की सेवा में लगी रहती है। सोचें, गृहस्थी के साथ-साथ कामकाज करने वाली महिला (मां) के लिए इतना कुछ प्रबंध करना कितना मुश्किल होता है। लेकिन, वह फिर भी इन चुनौतियों का प्रतिदिन सामना करती है। दर्द शब्द जो है वह मां पर काफी सटीक बैठता है, क्योंकि, उसे बच्चों के भीतर से लेकर परिवार के अन्य सदस्यों को दर्द सहना पड़ता है। लेकिन, फिर भी वह इस दर्द में मर्म का काम कितने अच्छे तरीके से करती है कि वह उनके दर्द का भार खुद ले लेती है, लेकिन कभी अपने दर्द का भार किसी अन्य को नहीं देती है। शायद, कुछ लोग उनके दर्द को समझ पाते है। अगर हर कोई मां के दर्द को समझ ले तो एक मां की हालत समाज में काफी बेहतर हो जाए। इसके लिए यह बेहतर होगा कि मां की पीड़ा को दिल से समझना होगा, फिर जाकर कोई सुधार हो सकता है। 

पहली स्टोरी

समाज में शिक्षित होने के साथ 3 बच्चों सहित अपने पति का ख्याल रखने का ढंग प्रिया जैसी मां तथा पत्नी से कोई बेहतर नहीं जान सकता है। 19 साल पहले शादी हुई। 18 साल पहले सानिया नाम की बेटी को जन्म दिया। चिकित्सकों ने बताया कि बेटी डाउन सिंड्रोम (दिव्यांग) है। दिल को धक्का लगा। लेकिन, मां की ममता ने दिल को मजबूत किया तथा अच्छी तरीके से परवरिश की। हर चुनौती का सामना करते हुए उसे जीवन में इतना आसान कर दिया कि शायद अन्य महिला के लिए यह कर पाना इतना आसान नहीं हो पाता। निजी स्कूल में अध्यापक की नौकरी छोड़ दी। सारा समय उसकी परवरिश को दिया। अब वह (सानिया) स्पेशल स्कूल में पढ़ती है। हर बात को भली भांति समझती है। शिक्षा के साथ-साथ अन्य गतिविधियों में प्रथम है। खेल से लेकर नृत्य में कई मेडल जीत चुकी है। यह सब संभव हुआ मां की मेहनत तथा उनके दृढ़ इरादे से। 2 अन्य बच्चे भी है। जिनकी देखभाल मां प्रिया काफी अच्छे ढंग से कर रही है। 

मां प्रिया के मुताबिक, उन्हें इस बात की खुशी है कि भगवान ने तीनों औल्लाद काफी अच्छी दी है। पढ़ाई के साथ-साथ मां के हर कार्य में मदद करते है। मां के दर्द को बेहतर उसके बच्चों के अलावा कोई अन्य नहीं जान सकता है। वह सुबह जल्दी उठ जाती है। उसके बाद बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार करती है। टिफिन में पौष्टिक आहार पैक करती है, ताकि बच्चों का स्वास्थ्य अच्छा रहे। शाम को बच्चों को वह खुद अध्यापक की तरह पढ़ाती है। पूरी तरह से पढ़ाने के उपरांत उनका टेस्ट लेती है, ताकि स्कूल का काम अच्छी से याद हो जाए। 

उनके मुताबिक, स्कूल में पेरेंट्स मीटिंग में जो बच्चों की गलतियां अध्यापक बताते है, उन्हें पूरे ध्यान से सुनती है तथा प्रयास करती है कि कैसे उसमें सुधार लाया जा सकता है। फिर उस पर पूरी मेहनत से काम शुरु कर दिया जाता है। इससे यह होता है कि बच्चा अगली बार दोबारा यह गलती नहीं करता है। पति के स्वास्थ्य से लेकर उनके हर सुख दुख की वह भागीदार रहती है। पति का चेहरा पढ़ कर समझ लेती है कि वह किसी मुश्किल में है। उन्हें हौसला देकर हर मुश्किल को आसान बनाने में अपना योगदान देती है।

प्रिया के मुताबिक, आज के दौर में महिलाओं को किसी से कम नहीं समझना चाहिए। वह समाज में हर चुनौती को आसान बनाने में सक्षम है। मां का दर्जा सबसे ऊपर होता है। एक मां से बेहतर कोई अन्य नहीं जान सकता है। सिर्फ इस ड्यूटी को ईमानदारी से निभाने की आवश्यकता होती है, अगर इसे लक्ष्य बना ले तो कोई कठिन काम नहीं रहता है। 

दूसरी स्टोरी

शिक्षा में उत्तीर्ण होकर मां-बाप, पति तथा बच्ची का ठीक ढंग से ख्याल रखने में मीनू गिल से कोई बेहतर नहीं जान सकता है। बचपन से शिक्षा में काफी अच्छी रही। मां-बाप का बचपन से पूरा प्यार मिलना,गिल के जीवन में सफलता का एक पड़ाव यह भी सच है। पेशे से दांतों की चिकित्सक है। पति देश के अच्छे खिलाड़ी होने के साथ-साथ रेल विभाग में सरकारी नौकरी करते है। एक नन्ही प्यारी परीनाज बेटी है। सभी का ख्याल रखती है। किस-किस को क्या जरूरत है, उसे पूरा करती है। दिनचर्या, सुबह 5 बजे शुरू हो जाता है। घर का सारा काम निपटाने के उपरांत ,भगवान के समक्ष इस बात की दुआ करती है कि हर किसी का भला हों। उन्हें जीवन में एक मां के अलावा समाज में एक मां की ड्यूटी निभाने में बल बख्शे। पति तथा बच्ची का नाश्ता कराने के बाद उन दोनों का अलग-अलग टिफिन पैक करती है, ताकि, उन्हें ज्यादा से ज्यादा पौष्टिक आहार मिल सकें। 

दोपहर के समय मरीज अपने-अपने दांत दिखाने के लिए घर पर आ जाते है। वह उन्हें हमेशा ही सकारात्मक तरीके से ठीक करने का सोचती है। उनका कहना है कि चिकित्सक की ड्यूटी बहुत कठिन है। उसे सही ढंग से निभाना काफी मुश्किल है। लेकिन, जीवन में कभी चुनौती से डरी नहीं, ब्लकि डट कर उसका सामना ही किया। इस काम में पति हितेश आनंद काफी सहयोग देते है। उन्हें कभी नीचा नहीं होने देते है। वह उनकी हर बात को एक मां के लिहाज से समझते है। उन्हें पता है कि एक मां की पारी काफी कठिन है, इसलिए बिना जीवनसाथी के सहयोग से पूरी नहीं हो पाती है। बच्ची परिनाज का मां से बहुत प्यार है। मां भी बच्ची को अपने दिल के टुकड़े से कम नहीं समझती है। बच्ची के पालन-पोषण में कोई कसर नहीं छोड़ती है। उसे प्रतिदिन एक नया पाठ पढ़ा कर जीवनशैली के ज्ञान में बढ़ोतरी कर रही है। 

उनके मुताबिक, बच्चों की खासकर बच्चियों का पालन-पोषण करना काफी कठिन होता है। उन्हें जीवन हर सही-बुरे का ज्ञान देना अति जरूरी होता है। ताकि भविष्य में उन्हें किसी चुनौती का सामना करने में कोई मुश्किल पैदा न हो सके।   

हर चुनौती को आसान बनाया

बचपन से मां-बाप भाइयों का खूब प्यार मिला। पढ़ाई में काफी रुचि थी। एक स्वप्न था कि बड़े होकर डॉक्टर बनना है। परिवार के साथ-साथ समाज की दिल से सेवा करना है। पंजाब के टॉप शिक्षण संस्थान से मां-बाप ने डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए भेजा। प्रतिदिन हास्टल में 5-6 घंटा पढ़ाई करती थी। हर सेमेस्टर में काफी अच्छे नंबर आए। किसी कारणवश सरकारी डॉक्टर की नौकरी मिलने से रह गई। लेकिन, पति ने हमेशा मजबूत इरादे से उसे आगे बढ़ने के लिए हौसला ही दिया। अब निजी डॉक्टर की ओपीडी में काम किया। लेकिन, मन में मरीजों की सेवा करने का चल रहा था। परिवार के साथ विमर्श कर अब घर में ही मरीजों को देख लेती है। भविष्य में टॉप की डॉक्टर बनकर समाज के लिए एक अच्छी दांतो की डाक्टर बनना चाहती हूं। भगवान पर पूरा विश्वास है, जल्द इरादा पूरा होगा।  

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