POLITICS…कैप्टन का कांग्रेस में सीएम कैंडिडेट का न्योता महज अफवाह या फिर सच….?

amarinder-singh-4-credit-image-sne-news

POLITIC’S DESK.CHANDIGARH.

कैप्टन अमरिंदर सिंह, चरणजीत चन्नी, नवजोत सिद्धू, प्रताप बाजवा, राजा वड़िंग की फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar

कैप्टन अमरिंदर सिंह, चरणजीत चन्नी, नवजोत सिद्धू, प्रताप बाजवा, राजा वड़िंग की फाइल फोटो।

पंजाब के पूर्व CM कैप्टन अमरिंदर सिंह को कांग्रेस में शामिल होने के ऑफर के बाद सियासी हलचल मची हुई है। चुनाव से ऐन वक्त पहले कैप्टन पार्टी न छोड़ दें, इसे लेकर BJP अलर्ट है। मगर इससे ज्यादा हलचल कांग्रेसी खेमे में है। कांग्रेस में CM कुर्सी के दावेदार सोच रहे हैं कि कैप्टन आ गए तो उनका क्या होगा? यही वजह है कि कुछ इसे सिरे से खारिज कर रहे हैं। बाकी हाईकमान के डर से चुप हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि कैप्टन को ये ऑफर किसी सामान्य नेता ने नहीं, बल्कि हाईकमान के भेजे पंजाब इंचार्ज व छत्तीसगढ़ के पूर्व CM भूपेश बघेल ने दिया है।

पंजाब कांग्रेस के प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा कि पार्टी सिर्फ विचार करेगी, वेलकम नहीं। बघेल ने न्योता देने की बात नहीं की है। कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने तो साफ कह दिया कि ये हवा-हवाई बातें हैं। कैप्टन को CM कुर्सी से उतरवाने वाले नवजोत सिंह सिद्धू इस सब पॉलिटिकल उठापटक से दूर टी-20 वर्ल्ड कप की कमेंट्री में बिजी हैं। दलितों के लिए पद मांगने के बाद राहुल गांधी से पड़ी फटकार के चलते पूर्व CM चरणजीत सिंह चन्नी भी खामोश हैं।

इसी बीच कांग्रेस ने 2027 की रणनीति के लिए सोमवार दोपहर 3 बजे चंडीगढ़ में विधायक व हारे उम्मीदवारों की मीटिंग बुला ली है। इसमें पंजाब प्रभारी बघेल, प्रधान वड़िंग और CLP नेता बाजवा भी शामिल होंगे। कांग्रेस में मची इस हलचल के बीच कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अभी तक खुद इस पर कोई बयान नहीं दिया है। उनकी बेटी व भाजपा महिला मोर्चा की पंजाब अध्यक्ष जयइंदर कौर जरूर BJP छोड़ने की चर्चाओं को खारिज कर चुकी हैं।

मीडिया से बात करते पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल। - फाइल फोटो

मीडिया से बात करते पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल। – फाइल फोटो

प्रताप सिंह बाजवा ने कहा- इस समय ऐसी खबरें हवा-हवाई बातें लगती हैं। चुनाव से पहले अक्सर ऐसी सियासी चर्चाएं और अटकलें फैलाई जाती हैं। कांग्रेस का फोकस जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़ने का है। वहीं, बाजवा कैप्टन की एंट्री की चर्चाओं के बाद रविवार को अमृतसर पहुंचकर सांसद गुरजीत औजला से भी मिले।

कैप्टन के अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान भाजपा के वर्किंग प्रधान अश्वनी शर्मा ने उनसे मुलाकात की थी। - फाइल फोटो

– फाइल फोटो

कैप्टन के फैसले से कांग्रेस-BJP में क्या फर्क पड़ेगा

  • पंजाब में कांग्रेस की कमान राजा वड़िंग और प्रताप सिंह बाजवा के हाथों में है। कैप्टन के आने से एक और धड़ा खड़ा हो जाएगा। सांसद सुखजिंदर रंधावा पहले ही कैप्टन की तारीफ कर चुके हैं। कैप्टन की वापसी से बाजवा और वड़िंग दोनों के प्रभाव में कमी आएगी। कैप्टन अपनी शर्तों पर राजनीति करने के लिए जाने जाते हैं तो उनके पास कोई बड़ा पद भी होगा। कैप्टन विरोधी गुट पर भी कांग्रेस हाईकमान को विचार करना होगा। कैप्टन वापस आते हैं तो 2027 में टिकट बांटने में भी उनकी चलेगी। कैप्टन एक मजबूत जट्ट-सिख चेहरा हैं। उनकी वापसी से पार्टी को हिंदू और सिख वोटर्स में पैठ का मौका जरूर मिलेगा।
  • कैप्टन की छवि सख्त और फौज की तरह फैसले लेने की रही है। उनके कांग्रेस में आने से शहरी हिंदू आबादी वाली लुधियाना, जालंधर और अमृतसर की सीटों पर हिंदू वोट बैंक में कांग्रेस की वापसी हो सकती है। अभी ये वोट भाजपा और AAP में बंटा है। कैप्टन मूल रूप से बठिंडा के महराज गांव के रहने वाले हैं। वह जट्‌ट सिख कम्युनिटी से आते हैं। कैप्टन के आने से मालवा में कांग्रेस को फायदा मिल सकता है। 2022 में AAP ने मालवा की 69 में से 66 सीटें जीत ली थीं। कैप्टन लौटे तो यहां कम से कम 10 से 15 सीटों पर असर पड़ सकता है।
  • अगर कैप्टन भाजपा छोड़ देते हैं तो इसका नेगेटिव असर जाएगा। एक बड़े सिख चेहरे की पार्टी में सुनवाई न होने से सिखों में नाराजगी हो सकती है। हालांकि, BJP ने डैमेज कंट्रोल के लिए ED अफसर को ट्रांसफर कर कैप्टन को शांत करने की कोशिश की है। कैप्टन अमरिंदर सिंह के BJP में आने के बाद कई बड़े सिख नेता भी शामिल हुए थे। जिनमें पूर्व सांसद, पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक भी शामिल हैं। अगर कैप्टन कांग्रेस में लौटते हैं तो उन्हें भी अपने साथ ले जाएंगे। ऐसे में भाजपा को 2027 में टिकट के लिए सिख चेहरे ढूंढने में मशक्कत करनी पड़ सकती है।
100% LikesVS
0% Dislikes