एडिटर इन चीफ.विनय कोछड़.अमृतसर .चंडीगढ़।

पिता का अपने बेटे के प्रति बचपन में ही पुलिस भर्ती का स्वप्न था, जिसे बेटे जितेंद्र सिंह ने भी बड़े होकर पूरा कर दिखाया। अब चर्चा यह चल रही है कि सिंह ने एक सच्चे तथा ईमानदार पुलिस कर्मचारी की ड्यूटी तल-दिली से निभा कर एक अनूठी मिसाल पैदा करने में कामयाबी हासिल की हैं। फिलहाल, सिंह बतौर सिपाही के पद पर ड्यूटी निभा ही रहे है और साथ ही साथ में वह केंद्रीय उपकरण पहचान रजिस्टर (CEIR) में अब तक 1600 गुम हो चुके मोबाइलों को ढूंढ कर उनके असल मालिकों को सुपुर्द कर एक नया कीर्तिमान स्थापित करने वाले पहले पुलिस कर्मचारी भी बन चुके हैं। कुल कीमत 3 करोड़ से ऊपर आंकी गई हैं।

परिवार में एक अन्य भाई भी पुलिस विभाग में काम करते है। वह शादीशुदा है। पत्नी तथा एक बेटा एक बेटी भी है। इस अत्याधुनिक तकनीक से लोगों का मोबाइल ढूंढने की वजह से उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भी किया गया। पंजाब पुलिस निदेशक डॉक्टर.आईपीएस गौरव यादव भी काफी खुश है। जल्द ही उन्हें पंजाब पुलिस की तरफ से भी सम्मानित किया जाने वाला है। इस बात की पुष्टि, आईपीएस अधिकारी सुहेल कासिम मीर ने भी की।

आरंभिक जीवन
स्कूल तथा कालेज में तालीम हासिल करने के उपरांत सिंह ने अपने पिता जी का स्वप्न पूरा करने के लिए वर्ष 2011 में पुलिस परीक्षा दी। परीक्षा में उन्होंने अच्छे अंक हासिल किए। उसके बाद उनका शारीरिक परीक्षा हुई, उसे भी उन्होंने पूरी कर ली। सिंह के मुताबिक, सबसे पहले वह पुलिस प्रमुख के रीडर रहें। फिर बाद में कई थाना में उन्हें मुंशी के तौर पर काम करने का अवसर मिला। वहां पर उनकी प्राथमिकता यह होती थी कि कैसे आम नागरिक की समस्या की शिकायत को समझना है तथा कैसे उसका निवारण करना है। सिंह के जितने भी अधिकारी या फिर उनके सहयोगी रहे है, सभी ने इनकी काफी प्रशंसा की है, उनके मुताबिक सिंह विभाग की शान है। कोई भी कठिन से कठिन काम हो , वह काफी आसान तरीके से पूरा कर लेता है। काम के प्रति इतनी सच्ची लगन तथा निष्ठा किसी भी पुलिस कर्मचारी में इतनी नहीं देखी हैं। सारा विभाग उनके कार्य की कदर करता है।

कोविड़ में किए जो काम……उसे आज भी लोग करते है याद
कोविड़-19 में सिंह की ड्यूटी थाना तरसिका में थी। तब पुलिस कर्मचारियों की बकायदा ड्यूटी लगी थी, उस टीम का हिस्सा सिंह भी थे। बताया जाता है तब सिंह ने अपनी जान की परवाह नहीं करते हुए लोगों की हर प्रकार से सेवा की। उनके पास हर जरूरत का सामान तथा खासकर दवाइयों को लोगों तक पहुंचाया। सिंह बताते है कि उस समय उन्होंने अपनी पगार के पैसों से लोगों तक खाना तथा दवाइयां भी पहुंचाई। उस वक्त उन्होंने अपना सारा कुछ आम जनता को समर्पित कर दिया। वर्तमान में भी उक्त गाँव के लोग उनके काम की वजह से याद करते है। वहां के एक स्थानीय नागरिक ने बताया कि जितेंद्र सिंह तो लगते ही नहीं की कि वह पुलिस कर्मचारी है। वह तो हमारे लिए उस कठिन समय में किसी मसीहा से कम नहीं थे। सारा गांव अंतिम समय तक उनका ऋणी रहेंगा।
…अब नजर डालते है..जितेंद्र सिंह का CEIR) में काम
जितेंद्र सिंह ने केंद्रीय उपकरण पहचान रजिस्टर (CEIR) में वर्ष 2023 में चार्ज संभाला। पूर्व में इस तकनीक को समझा कि कैसे इसका उपयोग किया जाता है। इसमें मास्टरी हासिल करने के उपरांत उन्हें टीम लीडर बनाया गया। बताया जाता है कि इस टीम में महिला तथा पुरुष कर्मचारी हिस्सा है। खास बात यह है कि सबसे उनकी बाउंडिग काफी कमाल की है। टीम का कहना है इसका श्रेय जितेंद्र सर को जाता है। वह हमेशा हमें काम के प्रति कैसे निष्ठा से करना, उसके बारे सही तरीके से ज्ञान देते है। एक टीम जुट करने होने की वजह से ऐसा लगता है कि कब दिन आरंभ होता है और कब समाप्त हो जाता हैं।
अब तक कहां-कहां मिली सफलता
सिंह तथा उनके विभाग के मुताबिक, सिंह की टीम के नेतृत्व में कुल 1600 मोबाइल ढूंढ पाने में सफलता हासिल हुई। पिछले समय जिला बटाला पुलिस ने लगभग 1 हजार मोबाइल, कुल कीमत 2 करोड़ थी, उसे ढूंढने में कामयाबी हासिल हुई। इसका पूरा श्रेय जितेंद्र सिंह तथा होनहार टीम को जाता है, जिन्होंने काम पर पूरी तवज्जो देते हुए इस मुश्किल को एकदम आसान कर दिखाया। इसके अलावा थाना खिलचियां, तरसिका, अमृतसर ग्रामीण के अधीन जितने थाना में मोबाइल गुम होने की शिकायत दर्ज हुई थी, उसका निवारण करते हुए एक-एक मोबाइल ढूंढ कर असल मालिकों को उनके सुपुर्द किया।
आम जनता से अपील
सिंह ने आम जनता से अपील करते हुए कहा कि पुलिस हमेशा जनता की सेवा में हर समय उपस्थित है। किसी को किसी भी तरह से घबराने की आवश्यकता नहीं हैं। अगर आपका मोबाइल कहीं खो जाता है तो तुरंत समीप के थाना में इसकी शिकायत दर्ज कराए। वैसे भी मोबाइल गुम होने पर जिला ग्रामीण पुलिस ने उसके लिए एक सहायता केंद्र बनाया है। तत्काल आपकी शिकायत को दर्ज कर लिया जाएगा। टीम उसी समय आपका मोबाइल ढूंढने के लिए युद्ध स्तर पर कार्रवाई आरंभ कर देगी।
परिवार का पूरा-पूरा सहयोग
सिंह ने कहा कि वह जो भी है, वो सिर्फ तो सिर्फ अपने परिवार की बदौलत हैं। बचपन से मां-बाप से खूब प्यार दिया। पिता का स्वप्न था कि मैं पंजाब पुलिस में भर्ती हूं। उसके लिए पुलिस भर्ती को अपना गोल बना लिया। पढ़ाई समाप्त होने के उपरांत सभी प्रकार के पुलिस टेस्ट क्लीयर कर पुलिस में भर्ती हो गया। परिवार में बड़े भाई, पत्नी तथा बच्चों से हर प्रकार का सहयोग मिलता हैं। वे हर काम में मेरी मदद करते हैं।
अब तक सम्मान में क्या कुछ मिल चुका है, जानेंगे, खास रिपोर्ट में……?
केंद्रीय उपकरण पहचान रजिस्टर (CEIR) में उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल चुका है। यह सम्मान शिमला में संचार विभाग के निदेशक ने दिया था। बताया जाता है कि यह सम्मान पंजाब पुलिस में बतौर हासिल करने वाले सिंह एकमात्र थे। इसके अलावा पंजाब पुलिस महानिदेशक से भी सम्मान मिल चुका हैं। जिसमें उन्हें एक प्रशंसा पत्र दिया गया था। इसके अलावा कोविड-19 के दौरान अपनी ड्यूटी जनता के प्रति अच्छी तरह से निभाने की वजह से उन्हें विभाग की तरफ से विशेष सम्मान दिया गया था।

