SGPC NEWS….सहमत नहीं श्री अकाल तख्त साहिब सरकार के संशोधित बेअदबी कानून से…जानेंगे, अब आगे क्या होगा…?

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SNE NETWORK.AMRITSAR/CHANDIGARH.

श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने पंजाब सरकार की ओर से भेजे गए बेअदबी कानून के संशोधित मसौदे पर असंतोष जताया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पंथ की ओर से दिए गए अधिकतर सुझावों को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि जिन प्रमुख बिंदुओं पर पहले सहमति बनी थी, उनमें से करीब 90 प्रतिशत सुझावों को संशोधित मसौदे में शामिल नहीं किया गया। 

फास्ट ट्रैक अदालतों का प्रावधान करने पर सहमति बनी थी

जत्थेदार ने बताया कि पंजाब सरकार के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में कानून के कई प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा हुई थी। बैठक में विशेष रूप से “कस्टोडियन” शब्द को हटाने, “स्वरूप” की जगह “बीड़” शब्द शामिल करने तथा बेअदबी के मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों का प्रावधान करने पर सहमति बनी थी। इन संशोधनों का उद्देश्य बेअदबी के मामलों में शीघ्र सुनवाई और दोषियों को जल्द सजा सुनिश्चित करना था।

अपेक्षित संशोधन नहीं किए गए

बैठक के बाद पंजाब सरकार से इन बिंदुओं को शामिल करते हुए संशोधित मसौदा भेजने को कहा गया था। उन्होंने कहा कि सरकार को 28 जुलाई तक संशोधित मसौदा भेजने का समय दिया गया था, लेकिन निर्धारित अवधि तक कोई दस्तावेज प्राप्त नहीं हुआ। इसके बाद 29 जुलाई को सरकार ने संशोधित मसौदा भेजा। जब मसौदे का अध्ययन किया गया तो पाया गया कि जिन प्रमुख आपत्तियों को दूर करने का आश्वासन दिया गया था, उनमें अपेक्षित संशोधन नहीं किए गए। 

….लेकिन उसे मसौदे से हटाया नहीं गया

जत्थेदार ने कहा कि “स्वरूप” की जगह “बीड़” शब्द जोड़ने और “कस्टोडियन” शब्द हटाने की मांग पर सरकार ने यह कहते हुए बदलाव नहीं किया कि यह उसके अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है। सरकार ने “कस्टोडियन” शब्द की केवल विस्तृत व्याख्या जोड़ दी, लेकिन उसे मसौदे से हटाया नहीं गया। इसी तरह “स्वरूप” शब्द भी पहले की तरह बरकरार रखा गया। 

चर्चा या विधायी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए

उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से दी गई लंबी व्याख्या की आवश्यकता नहीं थी, बल्कि जिन बिंदुओं पर सहमति बनी थी, उन्हें कानून में शामिल किया जाना चाहिए था। ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि जब तक बेअदबी कानून में प्रस्तावित संशोधनों पर अंतिम सहमति नहीं बन जाती, तब तक 3 अगस्त से शुरू होने वाले पंजाब विधानसभा सत्र में इस कानून पर किसी प्रकार की चर्चा या विधायी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए। ###USA###UK###CANADA###SGPC-NEWS###PUNJAB###CHANDIGARH###INDIA###AUSTRALIA###GERMANY###IRELAND###SWEDEN###EUROPE###CHINA###HUNGRY###FRANCE###ITLAY###ROME###RUSSIA###UKRAINE###VIETNAM###SINGAPORE###@

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