SHAME-ON-SOCIETY…महिला पत्रकार तथा अन्य साथी के खिलाफ ‘रिकवरी एजेंटों’ की ‘गुंडागर्दी’……..पुलिस ने दर्ज की ‘FIR’

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एडिटर-इन-चीफ विनय कोछड़.अमृतसर.चंडीगढ़।

एक महिला पत्रकार तथा उसके अन्य साथी पर रिकवरी एजेंट ने सरेआम गुंडागर्दी की हैं। आरोप लगा है कि महिला पत्रकार के साथ छेड़छाड़ तथा उसके सम्मान को भी ठेस पहुंचाई गई। मामला, रविवार के पौने ग्यारह के करीब इस्लामाबाद क्षेत्र का बताया जा रहा हैं। शिकायत जब  थाना इस्लामाबाद पहुंची तो पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए 2 कथित एजेंट्स के खिलाफ विभिन्न धारा के तहत मामला दर्ज कर लिया। इस बात की पुष्टि, पुलिस थाना के जांच अधिकारी महिला एएसआई गुरमीत कौर ने की। फिलहाल, कथित अपराधी अनमोल तथा संदीप की कोई गिरफ्तारी होने की पुष्टि नहीं हो पाई। पीड़ित महिला पत्रकार ने प्रदेश के मुख्यमंत्री, महिला आयोग तथा देश की महिला राष्ट्रपति से इंसाफ की मांग करते हुए कथित अपराधियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की गुहार लगाई हैं। 

रिपोर्ट में देखें..कब और कैसे घटित हुआ यह मामला

21 दिसंबर, 2025 दिन रविवार को महिला पत्रकार अपने अन्य साथी पत्रकार के साथ किसी खबर की कवरेज के लिए एक साथ मोटर बाइक पर निकलते है। जब वह क्षेत्र इस्लामाबाद के पास पहुंचते है तो एक निजी रिकवरी वाहन कंपनी के कारिंदे उनका रास्ता रोक लेते है। वह एकदम घबरा जाते है कि वे लोग है तो कौन है। जब महिला पत्रकार उनसे परिचय पूछती है तो उसके साथ छेड़छाड़ करना आरंभ कर देते है। इस पर महिला पत्रकार का अन्य साथी उन्हें ऐसा करने से रोकता है तो बोलते है कि तू जो मोटरसाइकिल चला रहा है , इसकी किस्त पेंडिंग है, हम इसे उठाने आए है। वह उनके समक्ष बोलता है कि हमने तो इसका सारा ऋण चुका दिया है, हमारे पास इसका प्रमाण भी है। लेकिन, वे उनकी एक भी बात को नहीं सुनते हैं। तभी मामला, पुलिस के पास पहुंच जाता है तो पुलिस ने महिला पत्रकार तथा अन्य साथी के बयान पर कथित अपराधियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। 

…ये एजेंट नहीं है, एक नंबर के गुंडे है..कानून विशेषज्ञ

कानून विशेषज्ञों का मानना है कि देश की उच्च न्यायालय की दिशा तथा निर्देश को निजी रिकवरी एजेंट बिल्कुल ही नहीं मानते है। इसका एक कारण यह भी हैं, इन्हें पुलिस तथा नेताओं का स्पोर्ट मिल जाता है। जिस कारण उनकी गलतियों की सजा नहीं मिलती है। अगर इनके खिलाफ कोई शिकायत लेकर पुलिस थाना चला भी जाता है। तो शिकायतकर्ता की पुलिस कोई सुनवाई नहीं करती है। हां, इस मामले में  महिला पत्रकार तथा उसके साथी को कानूनी लड़ाई लड़नी चाहिए। अगर उन्हें किसी प्रकार से कानूनी मदद की आवश्यकता पड़ती है तो उन्हें पूरा साथ दिया जाएगा। घबराने की किसी तरह से आवश्यकता नहीं है। यह एक प्रकार से अन्य भुक्तभोगियों को भी रास्ता मिल सकता है, जो एजेंट लोग की कई जिल्लतों का सामना कर चुके है। 

जानिए, किस धारा में दर्ज हुआ मामला…क्या है उसकी सजा

कथित अपराधियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 126(2) “गलत तरीके से रोकना” (Wrongful Restraint) से संबंधित है, जिसका अर्थ है किसी व्यक्ति को स्वेच्छा से रोकना ताकि वह उस दिशा में न जा पाए जहां जाने का उसे कानूनी अधिकार है, और इसके लिए एक महीने तक की साधारण कैद या ₹5,000 तक का जुर्माना, या दोनों की सज़ा हो सकती है, यह अपराध जमानती (bailable) और असंज्ञेय (non-cognizable) है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74, किसी महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से उस पर हमला करने या आपराधिक बल का प्रयोग करने से संबंधित है, जिसमें कम से कम 1 साल और अधिकतम 5 साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है, जिससे महिला के सम्मान और गरिमा को ठेस पहुँचाने पर यह कानून लागू होता है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(2) आपराधिक धमकी (Criminal Intimidation) से संबंधित है और यह कहती है कि यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को नुकसान पहुँचाने या उससे कोई काम करवाने/रुकवाने के इरादे से जान से मारने, गंभीर चोट पहुँचाने, संपत्ति को नुकसान पहुँचाने, या किसी महिला पर व्यभिचार का आरोप लगाने जैसी धमकी देता है, तो उसे 2 साल तक की जेल या जुर्माना, या दोनों की सज़ा हो सकती है। 

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”वर्तमान में भी महिलाओं के साथ प्रतिदिन छेड़छाड़ से जुड़े कई मामले सामने आ रहे है। यह एक प्रकार से शर्मनाक बात हैं। महिला पत्रकार हमारी यूनियन के साथ जुड़ी होने के अलावा पत्रकार के तौर पर समाज तथा देश से जुड़े कई गंभीर मामलों पर काम कर रही है। उनके साथ जिन रिकवरी एजेंट्स ने छेड़छाड़ की। यह सरासर गलत था। शहीद भगत सिंह जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने तत्काल मामले को काफी गंभीरता से लिया। सभी पत्रकार बंधुओं तथा यूनियन सदस्य एक काल पर इकट्ठा हो गए। पुलिस के समक्ष पूरी गंभीरता से मामले को रखा। पुलिस ने भी कथित अपराधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर पत्रकार जगत में अच्छा संदेश दिया। हम सब थाना इस्लामाबाद पुलिस का दिल धन्यवाद करना चाहते है। महिला के इंसाफ की लड़ाई के लिए हमेशा यूनियन उनके साथ खड़ी है। घबराने तथा डरने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं हैं।” 

शहीद भगत सिंह जर्नलिस्ट एसोसिएशन अध्यक्ष- वरिष्ठ पत्रकार रंजीत सिंह मसोन।” 

मेरे पास मामला जब पहुंचा तो एक महिला पुलिस अधिकारी होने के नाते केस को पूर्ण तौर से प्राथमिकता दी गई। महिला पत्रकार के उनके मुताबिक बयान लिए गए। तत्काल केस की जांच को गंभीरता से आरंभ कर दिया गया। घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरा को जब खंगाला गया तो उसमें छेड़छाड़ से जुड़ी कोई सामने नहीं आई। फिर भी कथित एजेंट्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर दी गई। जल्द ही उन्हें पकड़ लिया जाएगा।” 

”केस की जांच पड़ताल अधिकारी-एएसआई गुरमीत कौर।

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पेशे से चाहे मैं एक अधिवक्ता हूं, लेकिन मैं सबसे पहले एक महिला हूं। अगर किसी महिला के साथ कोई छेड़छाड़ या फिर धक्केशाही करेंगा तो मैं चुप नहीं रहने वाली हूं। महिला पत्रकार के साथ जो भी हुआ बिल्कुल गलत हुआ। जितनी निंदा की जाए, उतनी ही कम हैं। हां, यहां पर पुलिस ने एक काम तो सही ढंग से किया, महिला पत्रकार के बयान दर्ज कर कथित अपराधियों के खिलाफ जल्द से जल्द मामला दर्ज कर लिया। मैं अपनी बहन को सुझाव देना चाहेंगे कि वे डर और भयमुक्त होकर न्याय पर भरोसा रख कर अपनी लड़ाई लड़े, नाकि बीच में केस को छोड़ दे। मुझे गत दिन कईयों ने इस केस के लिए समझौता करने के लिए विवश किया, लेकिन, मैं अपने चट्टान जैसे इरादों से बिल्कुल पीछे नहीं हटी। 

महिला अधिवक्ता एवं प्रख्यात समाजसेवी सिमरजीत कौर। ” 

जानिए..इस रिपोर्ट में अब आगे क्या होगा

कानूनी विशेषज्ञ ने बताया कि इसमें महिला पत्रकार के बयान पर कथित अपराधियों के खिलाफ 3 धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। इसमें धारा 74 का मतलब छेड़छाड़ का है। उसकी जमानत अदालत से ही होगी। इसमें पुलिस अब इन्हें जितनी जल्दी हो सके गिरफ्तारी डालेंगी। क्योंकि, पुलिस को अब हर केस की अपडेट अपने उच्च अधिकारियों को समय-समय पर भेजनी पड़ती है। पेंडिंग केस पर उन्हें जवाब तलब भी किया जाता है। ऐसे में कथित अपराधियों का पुलिस से बच निकलना इतना आसान नहीं होगा। 

कानून विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि धारा 74 में अदालत इतनी जल्दी जमानत भी नहीं देती है। क्योंकि, मामला काफी गंभीर प्रवृत्ति से जड़ा हुआ माना जाता है। ऐसे में कथित अपराधियों को जेल भी जाना तय माना जा रहा है। 

पीड़ित महिला पत्रकार पर समझौते का पड़ रहा बार-बार दबाव

पीड़ित महिला पर कुछ रसूखदार तथा सत्ताधारी पार्टी से जुड़े उच्च कद के नेता समझौता करने के लिए बार-बार दबाव डाल रहे है। वह काफी डरी तथा सहमी हुई है। बताया जा रहा है कि महिला पत्रकार घर में इकलौती संतान है। मां-बाप स्वास्थ्य तौर पर काफी कमजोर है। महिला पत्रकार की कमाई से घर का भरण पोषण चलता है। वह इस पेशे से पिछले 5 साल से जुड़ी है। स्वाभाविक तौर पर अच्छी और होनहार महिला पत्रकार की श्रेणी में अच्छी गिनी जाती है। उन्होंने मन बना लिया है कि वे अब रोकने वाली नहीं है तथा गुनहगारों को जेल की सलाखों के पीछे डाल कर चैन लेंगी।   

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