SNE-EXCLUSIVE…….संभावना..राणा ने मूसेवाला के शूटर को दी थी पनाह…..इसलिए बंबीहा गैंग में था गुस्सा…तो करवा दी हत्या..?

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वरिष्ठ पत्रकार.चंडीगढ़। 

पुलिस ने ऑफिशियली राणा की हत्या और 29 मई, 2022 को हुए सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बीच किसी भी तरह के लिंक से इनकार किया है। हालांकि, पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या राणा के हत्यारों को लगता था कि वह कुछ ऐसा जानता था जो मूसे वाला केस की जांच के दौरान सामने नहीं आया। मूसेवाला को छह शूटरों ने गोली मारी थी। उनमें से दो – मन्नू  और जगरूप रूपा – 20 जुलाई, 2022 को एक एनकाउंटर में मारे जाने से पहले पंजाब में अलग-अलग जगहों पर छिपे थे। बाकी चार गुजरात और दूसरी जगहों पर भाग गए।


एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “मन्नू और रूपा द्वारा इस्तेमाल किए गए अलग-अलग नंबरों के फोन ट्रेप से पता चला कि वे जगह बदलते रहे और खरड़ और बलाचौर में रात भर रुके थे। ऐसी संभावना है कि राणा बलाचौरिया को मारने वाले गैंगस्टरों को लगता था कि उसने मूसेवाला के शूटरों की मदद की थी।” मूसेवाला को छह शूटरों ने गोली मारी थी। उनमें से दो – मन्नू  और जगरूप रूपा – 20 जुलाई, 2022 को एक एनकाउंटर में मारे जाने से पहले पंजाब में अलग-अलग जगहों पर छिपे थे। बाकी चार गुजरात और दूसरी जगहों पर भाग गए।


एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “कुस्सा और रूपा द्वारा इस्तेमाल किए गए अलग-अलग नंबरों के फोन ट्रेल से पता चला कि वे जगह बदलते रहे और खरड़ और बलाचौर में रात भर रुके थे। ऐसी संभावना है कि राणा बलाचौरिया को मारने वाले गैंगस्टरों को लगा कि उसने मूसेवाला के शूटरों की मदद की थी।”हालांकि, अधिकारी ने आगे कहा कि यह भी संभावना है कि गैंगस्टरों का शक गलत था और राणा का इससे कोई लेना-देना नहीं था।


राणा की हत्या की ज़िम्मेदारी लेने वाले एक सोशल मीडिया पोस्ट के मुताबिक, उसे जग्गू भगवानपुरिया और लॉरेंस बिश्नोई के साथ उसके संबंध के कारण मारा गया। इसमें यह भी कहा गया है कि राणा ने मूसेवाला के शूटरों के लिए रहने की जगह का इंतज़ाम किया था और उन्होंने इसका बदला लिया था। पोस्ट कबड्डी टूर्नामेंट में उनके दबदबे को दिखाने वाले एक मैसेज के साथ खत्म होती है।


पोस्ट में लिखा था : “मैं, डोनी बल, शगनप्रीत, मोहब्बत रंधावा, अमर खब्बे, प्रभ दासूवाल और कौशल चौधरी के साथ, राणा बलाचौरिया की हत्या की ज़िम्मेदारी लेता हूँ। वह हमारे एंटी-ग्रुप में था, लॉरेंस (बिश्नोई) और जग्गू खोटी के लिए काम कर रहा था। उसने सिद्धू मूसेवाला के शूटरों के रहने का इंतज़ाम किया और उनकी मदद की। हमने आज मूसेवाला की हत्या का बदला ले लिया है। यह हत्या मक्खन अमृतसर और करण ने की थी। यह सभी खिलाड़ियों के लिए एक चेतावनी है कि वे जग्गू खोटी और हैरी टॉट टीमों को सपोर्ट न करें। हम कबड्डी में उनका दखल नहीं चाहते।”


पुलिस सोर्स और कबड्डी टूर्नामेंट से जुड़े लोगों ने एसएनई को बताया है कि गैंगस्टर कबड्डी टूर्नामेंट और लीग पर कब्जा करने में खास दिलचस्पी लेते हैं क्योंकि इससे उन्हें स्पॉन्सर से पैसे ‘उगाहने’ का कानूनी तरीका मिल जाता है। यह सिर्फ़ पंजाब तक ही सीमित नहीं है बल्कि कनाडा, UK और दूसरे देशों में गैंगस्टरों द्वारा चलाई जा रही लीग तक फैला हुआ है।
गैंगस्टरों के डर से कई स्पॉन्सर कबड्डी टूर्नामेंट को पैसे देते हैं, और कई लोग तो स्पॉन्सर की लिस्ट में अपना नाम पब्लिक में शामिल न करने पर ज़ोर देते हैं। साथ ही, गैंगस्टर ही तय करते हैं कि कौन सा खिलाड़ी किस टीम को रिप्रेजेंट करेगा और लीग में हिस्सा लेगा या नहीं।


एक टूर्नामेंट ऑर्गेनाइजर ने बताया, “खिलाड़ियों को विदेशी टूर्नामेंट में हिस्सा लेने, स्पॉन्सर्ड ट्रैवल और आसान VISA के साथ विदेश में बसने का लालच दिया जाता है। साथ ही, उन्हें गैंगस्टरों का डर भी रहता है। मैच फिक्सिंग और बेटिंग आम बात है। हम जिस पैसे की बात कर रहे हैं, वह सिर्फ़ लाखों में नहीं है। यह एक सीजन में करोड़ों कमाने की बात है। कबड्डी सीज़न आमतौर पर नवंबर और फरवरी के बीच होता है।” अभी, पंजाब और विदेश में लगभग 70 रेगुलर क्लब कबड्डी टूर्नामेंट ऑर्गनाइज करते हैं। ऑर्गनाइज़र ने बताया, “कई क्लब सिर्फ़ एक सीज़न के लिए आते हैं, लेकिन बड़े क्लबों का मुकाबला नहीं कर पाते।”

पुलिस अधिकारियों ने बताया, “डोनी बाल (असली नाम बलविंदर सिंह) के गैंग का लिंक मारे गए गैंगस्टर गोपी घनशामपुरिया के ग्रुप से है, जिसे कथित तौर पर 2017 में जग्गू भगवानपुरिया गैंग ने माझा इलाके पर कब्ज़ा करने के लिए गोली मार दी थी। पुर्तगाल में रहने वाला गोपी का भाई मनु घनशामपुरिया, अमर खब्बे के साथ मिलकर डोनी बाल के साथ इस गैंग को चलाता है, जिसके बारे में कहा जाता है कि वह भी उसी देश में है। चूंकि जग्गू असम की जेल में है, इसलिए यह गैंग माझा और कबड्डी टूर्नामेंट पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर रहा है।”

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