SYSTEM पर तमाचा….नहीं रुक रहीं ‘AMUL’ की कालाबाजरी….नौबत यहां तक आई ‘BUTTER-MRP’ से ऊपर बिकने लगा

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EDITOR-IN-CHIEF.VINAY KOCHHAR/AMRITSAR/CHANDIGARH.

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महंगे दाम और कालाबाजारी में इन दिनों अमूल मक्खन बिल्कुल कोई कसर नहीं छोड़ रहा। देश में सबसे अधिक बिकने तथा स्वांद के नजरिय़ से इसे प्रथम स्थान दिया गया। किंतु इसके कुछ उत्पादों का जमाखोर कंपनी से अधिक मंगवा कर उसे भारी मात्रा में इकट्ठा कर रहे है। ऐसे नहीं है कि विभाग को कुछ पता नहीं है, सब कुछ जानकारी होने के बावजूद उनसे मोटा पैसा खाकर जमाखोरी करने के लिए उन्हें अपना संरक्षण दे रहे हैं। शिकायतों का ढेर लगता जा रहा है , लेकिन, कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं किया जा रहा है। इसी प्रकार पंजाब सहकारिता विभाग का हिस्सा वेरका का 8 ग्राम मक्खन भी मार्केट में खराब आ रहा है। बताया जा रहा है कि मक्खन में ओरली लगी है जो कि लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असल डाल रही हैं। फिलहाल, किसी अधिकारी का कोई भी अधिकारिक तौर पर बयान सामने नहीं आया। 

जानेंगे..किस-किस उत्पाद की है कमी

एक अनुमान के मुताबिक, अमूल का 8-10 तथा 100 ग्राम, 500 ग्राम मक्खन काफी कम मात्रा में मार्केट में मिल रहा है। जबकि, सूत्रों के हवाले से पता चला है कि इसे कुछ जमाखोरों ने पूर्व में ही बड़ी संख्या में इकट्ठा कर रखा है तथा आम ग्राहक को महंगे दाम पर बेचा जा रहा है। लिहाज़ा, असल कमाई का धंधा जमाखोर कर रहे है। हैरान करने वाला तथ्य ये है कि ये उत्पाद सरकार की न्यायप्रणाली से जुड़ा हुआ है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि उन्हें इस बात की अब तक कोई भनक तक नहीं लगी है या फिर यू कहें कि मामले को दबाया जा रहा हैं। 

रेट में क्या चल रहा है, उसके बारे जानेंगे, इस डिटेल में….?

बताया जा रहा है कि अमूल 100 ग्राम मक्खन एमआरपी के दाम पर बेचा जा रहा है। इसी प्रकार के अलग-अलग मक्खन के उत्पाद को भी एमआरपी दाम पर बेचा जा रहा है। मतलब कि दुकानदार तथा ग्राहक की कमाई को ये बोलकर खत्म कर दिया गया है कि मक्खन पीछे से नहीं आ रहा है। जबकि, कंपनी ने अपने साईड पर ऐसा कोई भी विवरण नहीं किया है। इससे ये प्रतीत होता है कि कुछ जमाखोर मोटा मुनाफा कमाने की नीयत से ये खेला कर रहे हैं। ऐसे में इन लोगों के खिलाफ विभाग की तरफ से उनका पता लगाकर कानून के मुताबिक कार्रवाई करना भी लाजिमी बन जाता हैं। 

अमूल कंपनी का दावा

अमूल कंपनी दावा करती है कि वह गुजराज सहकारिता विभाग के अधीन काम करती है। इससे साफ साबित हो जाता है कि कंपनी सरकार के बनाए नियमों के हिसाब से ही चलती है। इसमें किसी प्रकार का कोई गोलमाल या फिर कालाबाजारी का औचित्य ही नहीं बनता है। देश-विदेश में अमूल के प्रत्येक प्रोडेक्ट की खूब सारी मांग है। विकटकाल परिस्थितियों में कंपनी भले का काम प्रथम स्तर पर करती है। किसी भी प्रोडेक्ट में कोई कमी नहीं है। अगर कोई उनके प्रोडेक्ट की कालाबाजारी करता है उसके खिलाफ कंपनी कानूनी तौर पर कार्रवाई कर सकती है। फिर भी कंपनी अपनी तरफ से इसका निष्पक्ष तरीके से जांच करवा लेती है। 

वेरका का पक्ष

वेरका के उच्च स्तरीय अधिकारी ने अपना पक्ष रखते कहा कि उनका सारा प्रोडेक्ट उच्च मापदंड को ध्यान में रखकर तैयार किए जाते है। समय-समय पर सरकारी प्रयोगशाला में प्रत्येक उत्पाद का निरिक्षण किया जाता है। हमेशा ही परिणाम बिल्कुल सही पाया गया। 100 में से 80 फीसद नंबर हासिल हुए। अगर 8 ग्राम मक्खन में कोई खराबी आई है तो इसकी जांच करवा ली जाती है। अगर कहीं से कोई भी गलती सामने आती है। तो उसको पूर्ण तौर पर ठीक किया जाएगा। भविष्य में इस प्रकार की कोई गलती नहीं होगी।###USA###UK###CANADA###AMUL-VERKA-NEWS###PUNJAB###CHANDIGARH###INDIA###AUSTRALIA###GERMANY###IRELAND###SWEDEN###EUROPE###CHINA###HUNGRY###FRANCE###ITLAY###ROME###RUSSIA###UKRAINE###VIETNAM###SINGAPORE###@

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