एडिटर-इन-चीफ विनय कोछड़ की रिपोर्ट..अमृतसर.चंडीगढ़।
पनसप की (भारत गैस) एजेंसी पिछले 6 माह से निलंबित होने की वजह से इसके हजारों-लाखों उपभोक्ता कई माह से परेशान चल रहे हैं। इसके लिए उपभोक्ताओं द्वारा स्थानीय प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया जा रहे हैं। भारत तथा प्रदेश की भगवंत मान सरकार से जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उपभोक्ताओं ने निष्पक्ष जांच की मांग की। बताया जा रहा है कि इन सब की असल वजह, बाबू, क्लर्क तथा कारिंदों की कालाबाजारी हैं। फिलहाल अगर जांच हो जाए तो सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा, पता चल जाएगा कि इस कड़ी में कौन-कौन शामिल रहा होगा।
..आखिर, क्या और किस तरह से आ रही परेशानी
दरअसल, अब उपभोक्ताओं को एलपीजी सिलेंडर हासिल करने के लिए खुद जाना पड़ रहा है। ऊपर से वहां पर जाने के लिए लगभग 15 किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ता है। एजेंसी निलंबित होने की वजह से डोर-टू-डोर प्रणाली को पूर्ण तौर से फिलहाल बंद कर दिया गया। हालात, इतने भयावह हो चुके है कि पिछले डेढ़ माह से उपभोक्ताओं को सिलेंडर ही नहीं मिल रहा है। ऊपर से बाबुओं के संरक्षण की वजह से कारिंदों का खूब लूट मचाने वाले कारनामे भी एक-एक करके धीरे-धीरे सामने आ रहे है। बताया जा रहा है कि इन कारिंदों ने एक उपभोक्ता का सिलेंडर आगे 2-3 बार हजारों में बेच दिए। शिकायतें तो काफी संख्या में सामने आई, जबकि, नालायक प्रशासन ने किसी को अब तक न्याय नहीं दिया।
कैसे चला कालाबाजारी का दौर…आखिर कौन-कौन रहे इसमें शामिल..जानें, खास रिपोर्ट में….?
रिपोर्ट के अनुसार इस गोरखधंधे में उच्च अधिकारियों, क्लर्क तथा कारिंदे इस खेल का अहम हिस्सा माने जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि पिछले डेढ़ माह में इतनी कालाबाजारी हुई कि जिसका कोई अंत नहीं माना जा रहा हैं। चर्चा, चल रही है कि राज्य सरकार के पास कुछ शिकायत भी पहुंची है। उसके लिए कभी भी एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की जा सकती है। ऐसे में इन सबके चेहरे की हवाई भी उड़ी है, उन्हें भयं इस बात का लगा है कि अगर उनकी पोल खुल गई तो नौकरी के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। ऐसे में खबरें आ रही है कि उन्होंने इससे निपटने के लिए पूर्व में राजनीति से जुड़े लोगों से अपनी नजदीकियां बढ़ानी आरंभ कर दी है। लेकिन, उन्हें इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं कि यह मामला तो विपक्ष से जुड़े एक बड़े नेता के पास चला गया है जो आने वाले दिनों में सरकार की कार्यप्रणाली को भी हिला सकता है।
अफवाह…कुछ गैस एजेंसी को पहुंचाया जा रहा फायदा
अफवाह का बाजार इस बात को लेकर भी गर्म है कि इस पूरे खेल में कुछ एजेंसियों को बड़े स्तर पर फायदा पहुंचाने के लिए भी खेला जा रहा है। निलंबित एजेंसी के उपरांत कुछ एजेंसी संचालकों को हजारो कनेक्शन उनके पाले में डाल दिए गए। विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि उक्त एजेंसी संचालकों के हाथ केंद्र-राज्य सरकार तक पड़ते है। इतना ही नहीं वे लोग इन्हें राजनीति चंदा भी देते है। ऐसे में इन लोगों को खुश करना इन सरकारों का लाजिमी भी है, अगर ऐसे समय में उन्हें इंकार करते है तो आने वाले चुनाव में उक्त पार्टियों के लिए ये बड़ी मुसीबत भी खड़े कर सकते है।
954 का सिलेंडर कालाबाजारी मार्केट में बिक रहा 2500 से 3000 तक..
इस समय गैस सिलेंडर का दाम 954 के करीब निर्धारित हैं। ऐसे में जरूरतमंदों को 2500 से लेकर 3 हजार रुपये तक कालाबाजारी मार्केट में बेचा जा रहा हैं। दावा इस बात का किया जा रहा है कि इस खेल में सरकारी संरक्षण काला बाजारियों की पूरी मदद कर रहा हैं। वे लोग इस गोरखधंधे को पूरा बढ़ावा दे रहे है। इनके खिलाफ कोई कार्रवाई करने की बजाय उपभोक्ता को शिकायत करने का सुझाव दिया जा रहा है। मालूम हुआ है कि कई ऑनलाइन शिकायत दर्ज हो चुकी है। उसके बावजूद अभी तक किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में कालाबाजारी करने वालों को पूरा-पूरा हौसला मिल रहा है। जिसके लिए प्रशासन से लेकर सरकार को उपभोक्ता जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
सुनिए, प्रशासन का रटा रटाया जवाब
भारत गैस एजेंसी को देखने वाले सरकारी विभाग के उच्च अधिकारियों से लेकर निम्न स्तर से जुड़े सभी कर्मचारियों का एक ही रटा रटाया जवाब है वो है कि पिछले 6 माह से कंपनी निलंबित चल रही है। हम ऐसे में कुछ नहीं कर सकते है। सवाल ये खड़ा होता है कि अगर आपका विभाग कुछ नहीं कर सकता है तो ऐसे में उपभोक्ता अपनी शिकायत लेकर कहां पर जाए। ऐसे में इस प्रणाली में पूरी तरह से दाल काली होने की तरफ भी इशारा करती है। ईमानदार, निष्पक्ष, लोगों की हमदर्द सरकार होने का दावा करने वाली भगवंत मान सरकार को भी इस मुश्किल हालातों पर गौर करना चाहिए। प्राथमिकता तौर पर इस प्रणाली की त्वरित सुधार के लिए एक जांच का आदेश पारित करना चाहिए। ऐसे में उपभोक्ताओं को ये विश्वास हो जाएगा कि वाक्य ही आप सरकार जनता के प्रति कुछ करने की हिम्मत रखती है।

