एडिटर-इन-चीफ.विनय कोछड़.चंडीगढ़।

कड़ाके की ठंड, घनी धुंध, दृश्यता जीरो, ऐसे में शिक्षण संस्थानों को खोलना, सरकार के इस फैसले का चौतरफा विरोध होना आरंभ हो चुका हैं। अभिभावकों तथा स्कूल प्रबंधन भी सरकार के फैसले से अधिक खुश नहीं दिखाई दे रहे है तथा पूर्ण तौर पर विरोध करते नजर आ रहे हैं। केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़, हरियाणा तथा राजस्थान में तो ठंड की वजह से अभी तक स्कूलों को बंद रखा गया हैं। वहां पर 20 जनवरी तक स्कूलों को बंद रखने का आदेश जारी किया गया हैं। इस बार ठंड पहाड़ों से अधिक मैदानी इलाकों खासकर पंजाब में ज्यादा पड़ रही हैं। हालात ये हो चुके हैं कि शाम 5 बजे तो अब व्यापारिक प्रतिष्ठान भी बंद हो जाते है। सड़के एकदम खाली हो जाती है। सिर्फ इक्का-दुक्का वाहन ही दिखाई देते हैं। ऐसे में अभिभावक तथा स्कूल प्रबंधनों ने सरकार से मांग की कि फिलहाल स्कूलों को थोड़े दिन तक बंद रखा जाए, ताकि, विद्यार्थियों को किसी प्रकार से परेशानी न झेलनी पड़े।
बताया जा रहा है कि ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी स्कूलों के हालात इतने बदतर है कि वहां पर तो विद्यार्थियों के बैठने के लिए सही प्रकार से बैठने की व्यवस्था भी नहीं हैं। ऊपर से ठंड का प्रकोप सीधा कक्षा में पड़ता है। इतने गर्म कपड़े पहने होने के बावजूद विद्यार्थी ठिठुर रहे हैं। ऐसे में सरकार को उन पर तरस करना चाहिए तथा छुट्टियों को बढ़ाने का नया आदेश जारी कर देना चाहिए। अगर, निजी शिक्षण संस्थानों की बात करें तो वहां की कक्षाओं में भी ठंड काफी रहती है। बच्चों को ठंड लगने का हमेशा ही उनके भीतर ही भीतर भयं सताता रहता हैं। ऐसे में अभिभावकों की मजबूरी यह है कि अगर अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा तो उनका नाम कट सकता है। इस प्रकार की गंभीर चिंता हर किसी को भीतर ही भीतर खा रही हैं। लेकिन, ऐसे में सरकारी फैसले का कोई विरोध भी नहीं कर सकता हैं। क्योंकि, प्रदेश की सत्ता में भगवंत मान सरकार राज कर रही हैं। पता नहीं, कब और किस समय किसके खिलाफ तुगलकी फरमान जारी कर दिया जाए।
बड़ा सवाल..ठंड के बचाव से सरकार ने क्या विकल्प ढूंढा
अगर मान लिया जाए कि सरकार ने फैसला वाक्य ही काफी सोच समझ कर लिया। लेकिन, बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या स्कूलों में बच्चों को ठंड के बचाव के लिए कोई खास प्रबंध किया गया। अगर वाक्य किया है तो क्या किया। ऐसे में कुछ अभिभावकों का कहना था कि अधिकतर स्कूलों की कक्षाओं की कमरे इतने ठंडे है कि वहां पर बैठने वाले विद्यार्थी अक्सर ठिठुर जाते हैं। ठंड से बचाव का कोई प्रावधान नहीं हैं। इतनी ठंड में बच्चों का बीमार होना तय माना जा रहा हैं। खैर सरकार को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना होगा।
फिलहाल क्या है माहौल..जानिए, खास रिपोर्ट में…?
पंजाब में सर्दी का प्रकोप सातवें आसमान पर हैं। खासकर सुबह और रात को तो इतनी ठंड हो जाती है कि हीटर जैसी सुख सुविधा भी उसके समक्ष पूरी तरह से फेल साबित हो रही हैं। ऐसे में दूर के गंतव्य तक स्कूली बच्चों का जाना ठीक नहीं माना जा रहा हैं। सुबह में तो धुंध इतनी घनी होती है कि उसकी दृश्यता जीरो आंकी जा रही हैं। उधर, मौसम विभाग के मुताबिक, आने वाले दिनों में ठंड और ज्यादा बढ़ सकती है। उन्होंने बच्चों तथा बूढ़ों के लिए सख्त एडवाइजरी जारी करते कहा कि उन्हें ठंड में बिल्कुल बाहर नहीं निकलना चाहिए। ऐसा करना उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता हैं।
ऑनलाइन कक्षा भी अच्छा विकल्प
शिक्षा से जुड़े, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ठंड के मौसम में स्कूलों को कुछ समय के बंद कर देना ही सरकार के लिए उचित रहेगा। स्कूलों को निर्देश जारी कर ऑनलाइन कक्षा लगाना बेहतर विकल्प होगा। ऐसे में विद्यार्थी तथा अध्यापकों के बीच अच्छा तालमेल रहेगा। किसी प्रकार से पढ़ाई पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। जब मौसम में कुछ राहत मिलती है तो दोबारा से स्कूल को लगाया जा सकता हैं। फिलहाल, स्कूलों को बंद रखना ही एक सही फैसला हैं।

