रंजीत सिंह मसौन.जोगा सिंह.अमृतसर पंजाब चंडीगढ़ टीम।
अत्याचार, समाज में नई मिसाल, दुबले-कुचले लोगों को इंसाफ दिलाने के लिए हमेशा से ही दुनिया के चौथे स्तंभ पत्रकारिता जगत ने उनकी आवाज उठाकर समाधान निकाला है। लेकिन, अब परिस्थितियां बिल्कुल ही उल्टी है, अब जो पत्रकार सच्चाई के खिलाफ आवाज बुलंद करते है, उन्हें दबाने के लिए हर सरकारी तंत्र गलत शक्तियों का इस्तेमाल कर जेल में भेजने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
ताजा उदाहरण अमृतसर की गुरु नगरी में एक वेब चैनल में सच्ची पत्रकारिता करने वाले खुशहाल शर्मा से जुड़ा है। जिन्हें अवैध शराब बेचने वालों के खिलाफ आवाज बुलंद करना, उस समय महंगा पड़ गया, जब थाना सदर पुलिस ने उनके खिलाफ धारा 751 के तहत मामला दर्ज कर उन्हें झूठे केस में फंसा दिया गया।
कैसे मामले की शुरुआत हुई, हम समझेंगे इस खास रिपोर्ट में….?
दरअसल, पिछले साल पत्रकार खुशहाल ने एक झगड़े में पुलिस को दी गई शिकायत में इंसाफ नहीं मिलने की वजह से डीजीपी को एक पत्र भेजा था। उस पत्र में वर्तमान में उन्हें कोई इंसाफ नहीं मिला। मामला, चूंकि थाना सदर के साथ जुड़ा था तब से पुलिस उनके साथ रंजिश करने लगी। बताया जा रहा है कि गत दिनों पत्रकार को किसी क्षेत्र में अवैध शराब बेचने की सूचना हासिल हुई थी। तभी वह कवरेज करने के लिए घर से निकल पड़े।
पूर्व में उपस्थित पुलिस के समक्ष उन्होंने कवरेज करनी आरंभ की तो पुलिस ने उनके साथ बदसलूकी आरंभ कर दी। फिर हिरासत में लेकर थाना ले गई। थाना में पूरी रात उनके साथ थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया। ऊपर से उनके खिलाफ झूठा मामला दर्ज कर लिया गया। विरोध करने पर उन्हें धमकाया तक गया।
झूठा केस दर्ज किया
शहीद भगत प्रेस जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रधान रणजीत सिंह मसौन ने पुलिस के खिलाफ अपना विरोध जताते कहा कि थाना सदर पुलिस ने अपनी नाकामी छुपाने के लिए घमंड में अंधी होकर अपने राजनीति आका खुश करने के लिए पत्रकार के साथ पूर्व में बेरहमी से पिटाई की। फिर बाद में उसे पूरी रात थाना में थर्ड डिग्री दी। यह सरासर मानवता के खिलाफ हैं। उसके खिलाफ सेक्शन 7/51 के तहत झूठा केस दर्ज करना साफतौर पर पुलिस का कायरता वाला चेहरा दर्शाता है।
कुछ अनसुलझे सवाल…?
सवाल: अगर पत्रकार ने शराब पी रखी थी, तो क्या मौके पर मौजूद पुलिस वालों ने शराब नहीं पी थी? कानून सबके लिए बराबर है, तो एक्शन सिर्फ एकतरफा क्यों? बदमाशी करने वाले पुलिस वालों के खिलाफ भी बराबर एक्शन होना चाहिए।
एसोसिएशन की चेतावनी:-
पुलिस का यह रवैया साबित करता है कि कानून सिर्फ़ आम लोगों और पत्रकारों के लिए है। जब कोई पुलिसवाला कुछ गलत करते हुए पकड़ा जाता है, तो ‘बहू-बहू का रिश्ता’ का रोना रोया जाता है, लेकिन पत्रकार की बारी होती है ‘तुम कौन हो और मैं कौन हूँ’। पुलिस स्टेशन राजनीतिक ताकतवर लोगों की प्राइवेट प्रॉपर्टी बन गए हैं।”
पत्रकार समुदाय की मुख्य मांगें:
* पत्रकार खुशहाल शर्मा के खिलाफ दर्ज 7/51 का झूठा केस तुरंत रद्द किया जाए।
* उसे पीटने के आरोपी पुलिस वाले के खिलाफ केस दर्ज किया जाए और उसे नौकरी से निष्कासित किया जाए।###PUNJAB###AMRITSAR###CHANDIGARH###USA###UK###CANADA###AUSTRALIA###NEWZEALAND###SINGAPORE###

