लेखक विनय कोछड़.चंडीगढ़।
अंग्रेजों से स्वतंत्रता दिलाने वाले शहीद परिवार वर्तमान में भी सरकार से अपना हक लेने के लिए लड़ रहे हैं। शहीद भगत सिंह के परिवार से संबंध रखने वाला शहीद स्वर्ण सिंह का परिवार उनमें से एक हैं। बताया जाता है कि अंग्रेजों की नाक में दम करने वाले शहीद स्वर्ण सिंह ने अपने साथियों सहित लाहौर असेम्बली में बम फोड़ कर अंग्रेजी हुकूमत को हिला कर रख दिया। बताया जाता है, उस दौरान अंग्रेजों ने शहीद स्वर्ण सिंह को मृत घोषित कर दिया था, जबकि, उनके साथी वहां से किसी तरह से बचाकर, उन्हें अपने साथ ले गए थे।
शहीद भगत सिंह की परिवारिक सदस्य जसमीत कौर ने बताया कि पापा जी को उस दौरान उनके तीन साथी पाकिस्तान के गुजरांवाला के रहने वाले दर्शन सिंह, निहाल सिंह, हरबंस सिंह ने अपने खून का एक-एक कतरा देकर , उन्हें (पापा जी ) को नया जीवनदान दिया था। उसी दिन से शहीद स्वर्ण सिंह ने कसम खा ली थी कि वह अब आज से सिख सुनार जट्ट कहलाएंगे। शायद, इस बात का आज तक किसी लेखक ने अपनी-अपनी लिखी की गई किताब में विवरण नहीं किया। लेकिन, बेटी जसमीत कौर ने इस बात का दावा कर, अब लेखकों से लेकर प्रशासन-सरकार को दोबारा से इस कड़ी को शामिल करने के लिए मजबूर कर दिया।
पाकिस्तान के गुजरांवाला के रहने वाले शहीद स्वर्ण सिंह बचपन से देश की स्वतंत्रता के लिए हर मोर्चे में शामिल होने लग पड़े। क्योंकि, परिवार के प्रत्येक सदस्य में शहीद भगत सिंह की शिक्षा हासिल थी। भारत को पूर्ण स्वतंत्रता हासिल करवाने के लिए प्रत्येक सदस्य का योगदान रहा। लेकिन, वर्तमान सरकार की अनदेखी, इन परिवार के मन में कहीं न कहीं मलाल जरूर पैदा करती हैं। परिवार अब असली हक लेने के लिए सरकारी बाबुओं से लेकर सरकार तक अपने चक्कर काट रहे, जबकि, कोई भी इन्हें इनका अधिकार दिलाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा हैं।
बम को बोलते थे नींबू
शहीद स्वर्ण सिंह की बेटी जसमीत कौर ने बताया कि उनके पापा जी , उन्हें बताते थे कि तब बम को कोर्ड वर्ड में नींबू बोला जाता था। इस बात का किसी प्रकार से अंग्रेजी हुकूमत को शक नहीं होता था। बम बनाने में पापा जी काफी एक्सपर्ट थे। असेंबली में अपने साथियों सहित जो बम फोड़ा, यह उनके द्वारा निर्मित किया गया था।
तस्वीरें देख हो जाती है आंखे नम
बहन जसमीत कौर ने बताया कि पापा जी की तस्वीरें तथा उर्दू में लिखी किताबें पढ़ कर आज भी उनकी आंखें नम हो जाती हैं। पापा जी ने हमेशा , उन्हें एक ही शिक्षा दी कि देश के प्रति अपने आपको समर्पित कर देना। उन्हीं की शिक्षा का असर है कि वह वर्तमान में देश की सेवा कर रही है। देश के प्रति अपने आपको पूर्ण रूप से समर्पित कर दिया। विडंबना , इस बात की है कि प्रशासन तथा सरकार स्वतंत्रता सेनानियों की सोच पर बिल्कुल खरा नहीं उतर पा रही हैं। उक्त शहीदों ने स्वतंत्र भारत के लिए एक अच्छी सोच का स्वप्न देखा था लेकिन, लगता है, इस भारत में यह सपना पूरा नहीं हो पाएगा।
मलाल, आज तक नहीं संभाल पाई सरकार शहीदों का रिकॉर्ड
वर्तमान में भी शहीदों से जुड़ा रिकॉर्ड सरकार के पास नहीं है। सिर्फ तो सिर्फ अधूरा हैं। उसमें, जन्मतिथि से लेकर मृत्यु का समय तारीख पूरा नहीं हैं। जिससे, आम जनता को उनके जीवन से जुड़ी जानकारी पूरी नहीं मिल पाती। उन्हें, इस बात का मलाल है कि आज तक कोई भी सरकार शहीदों का रिकॉर्ड संभालने में कामयाब नहीं रही। इसके लिए शहीद परिवारों को रिकॉर्ड हासिल करने में काफी दिक्कतें पेश आ रही हैं।

