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पंजाब में खाद्य पदार्थों में बड़े स्तर पर मिलावट का खेल चल रहा है। प्रदेश में खाद्य पदार्थों के 15 फीसदी सैंपल फेल हुए हैं। डेयरी उत्पादों में अधिक मिलावट हो रही है और यहां तक कि केमिकल तक का भी इस्तेमाल कर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट में यह सामने आया है जिसे मानसून सत्र के दौरान संसद में पेश किया गया है।
सख्ती के बावजूद भी इस पर रोक नहीं
रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ समय से मिलावटखोरी बढ़ती जा रही है और सख्ती के बावजूद भी इस पर रोक नहीं लग रही है। पिछले दो वर्षों के दौरान खाद्य पदार्थों के 11940 सैंपल लिए गए जिनमें से 1779 सैंपल फेल हो गए। सरकार अलग-अलग खाद्य पदार्थों में मिलावटखोरी का पता लगाने के लिए सैंपल ले रही है। साथ ही मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई भी कर रही है।
1,031 सैंपल खाने योग्य नहीं
वर्ष 2025-26 के दौरान ही खाद्य पदार्थों के 7,809 सैंपल लिए गए जिनमें से 1,031 सैंपल खाने योग्य नहीं पाए गए। इस दौरान 723 मामलों में सरकार की तरफ से जुर्माना लगाने की कार्रवाई की गई है। साथ ही 25 मामलों में अदालत ने सजा भी सुनाई है। इसी तरह वर्ष 2024-2025 के दौरान सूबे में 4131 सैंपलों में से 748 सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसके बाद ही 333 मामलों में सरकार ने जुर्माना लगाने की कार्रवाई की जबकि 8 मामलों में सजा भी हुई है। सरकार ने पहले से टेस्टिंग भी बढ़ा दी है ताकि बड़े स्तर पर मिलावटखोरी के मामलों का पता लगाया जा सके। इसी तरह वर्ष 2023-24 के दौरान 6041 सैंपलों में से 929 और वर्ष 2022-23 के दौरान 8179 सैंपलों में से 1724 सैंपल खाने योग्य नहीं पाए गए।
दूध, पनीर, घी, मिठाई, मसाले, तेल, बिस्कुट, नमकीन में अधिक मिलावट
दूध, पनीर, घी, मिठाई, मसाले, तेल, बिस्कुट, नमकीन समेत अन्य खाद्य पदार्थों में अधिक मिलावट हो रही है। पंजाब में दूसरे राज्यों से तैयार घटिया पनीर व अन्य पदार्थों की आपूर्ति हो रही है जिन्हें बनाने में केमिकल का इस्तेमाल होता जो सेहत के लिए खतरनाक है। यह कैंसर को न्योता दे रहा है। केंद्र सरकार का सभी राज्यों में सैंपलिंग बढ़ाने पर जोर है ताकि मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।
नियमित रूप से जांच की जा रही
विभाग की तरफ से फूड सेफ्टी ऑन व्हील पर नियमित रूप से जांच की जा रही है। इन टेस्टिंग वैन में दूध, पनीर, पानी और अन्य रोजाना के प्रयोग वाले खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच करने की सुविधा है। लोग खुद भी इनमें खाद्य पदार्थों की जांच करवा सकते हैं। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) के क्षेत्रीय कार्यालय और राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की टीमें मिलावट का पता लगाने के लिए भी नियमित रूप से निगरानी, निरीक्षण और खाद्य पदार्थों के नमूने लेती है।
हरियाणा में भी बड़े स्तर पर मिलावटखोरी का खेल चल रहा है। प्रदेश में वर्ष 2025-2026 के दौरान 2,335 सैंपल लिए गए थे जिनमें से 723 सैंपल खाने योग्य नहीं पाए गए। सरकार ने 1,424 मामलों में जुर्माना लगाने की कार्रवाई की जबकि 116 मामलों में अदालत ने सजा भी सुनाई है।###USA###UK###CANADA###FOOD-SUPPLY-SAMPLE-FAILED###PUNJAB###CHANDIGARH###INDIA###AUSTRALIA###GERMANY###IRELAND###SWEDEN###EUROPE###CHINA###HUNGRY###FRANCE###ITLAY###ROME###RUSSIA###UKRAINE###VIETNAM###SINGAPORE###@

