बाल-दिवस पर हुई बड़ी घटना—–स्कूल से वापस लौट रहा आठवी कक्षा के छात्र का चाइना डोर से कटा गला….तड़प-तड़प कर तोड़ा दम

वरिष्ठ पत्रकार विजय शर्मा.रुपनगर। 

देश में बाल दिवस मनाया जा रहा था, तभी पंजाब के जिला रूपनगर के गांव कोटला निहंग में एक दुखदायक खबर सामने आई। 13 वर्षीय बच्चा साइकिल पर सवार होते समय चाइना डोर की चपेट में आ गया। बुरी तरह से गला कट जाने की वजह से इलाज दौरान दम तोड़ दिया। घटनाक्रम सोमवार की रात्रि की बताई जा रही हैं। परिवार में मातम का माहौल हैं। बिलखते आंसुओं में  परिवार ने चाइना डोर के साथ-साथ पतंग उड़ाने पर भी पूर्ण प्रतिबंध के लिए सरकार एवं प्रशासन से मांग की।

जानकारी के मुताबिक, सोमवार सायं आठवीं कक्षा का गुलशन स्कूल से वापस साइकिल पर सवार होकर घर लौट रहा था। रेल लाइन के पास एक पतंग की डोर की चपेट में आने से बुरी तरह से गला कट गया। खून से लथपथ बच्चा घर पहुंचा। घर में बेहोश हो गया। आनन-फानन में परिवार, उसे पास में स्थित सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचा। घाव गहरा होने की वजह से प्राथमिक उपचार के उपरांत, उसे पीजीआई (चंडीगढ़) रेफर कर दिया। रास्ते में बच्चे ने दम तोड़ दिया। 

परिवार का था लाडला

पता चला है कि गुलशन परिवार का लाडला था। हसमुख स्वभाव का गुलशन हमेशा ही परिवार का कहना मानता था। इतना ही नहीं, आस-पड़ोस के लोग का भी काफी चेहता था। हर किसी को प्यार तथा सम्मान के साथ बुलाता था। सभी को गुलशन की मृत्यु से गम लगा हैं। बताया जा रहा है कि गमगीन माहौल के कारण किसी के घर में चूल्हा नहीं चला। हर किसी की आंखों में आंसू बह रहे थे। उधर, परिवार की आर्थिक हालत को देखते हुए कुछ सामाजिक संगठनों ने सरकार से आर्थिक मदद की गुहार लगाई हैं। 

खूनी डोर पर सख्त बने कानून

वक्त की मांग है कि चायना डोर मनुष्यता के लिए खूनी डोर बन चुकी हैं। प्रतिवर्ष कई बच्चे तथा बड़े लोग , इसकी चपेट में आने की वजह से घायल या फिर दम तोड़ देते हैं। इतना कुछ होने के बावजूद प्रशासन की कार्यप्रणाली कुछ खास नहीं कर पाती हैं। खानापूर्ति के तौर पर सिर्फ मामला दर्ज तो जरुर कर दिया जाता है, लेकिन उसका कोई फायदा नहीं होता है, क्योंकि, इसकी जमानत थाना में ही मिल जाती हैं। समय के मुताबिक, सरकार को इसके कानून में संशोधन कर कड़ा कानून पारित करना होगा, तब जाकर चायना डोर पर शिकंजा कस पाएगा। 

100% LikesVS
0% Dislikes