शामलात जमीन मामला…पंजाब की तरह हरियाणा का मामला भी पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, सुनवाई एक-साथ होगी

एसएनई नेटवर्क.चंडीगढ़।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार द्वारा शामलात जमीन का मालिकाना हक पंचायतों के नाम करने के मामले को चीफ जस्टिस की कोर्ट में भेज दिया है। क्योंकि पंजाब की शामलात जमीन का मामला पहले ही चीफ जस्टिस की कोर्ट में विचाराधीन है। दोनों मामलों की सुनवाई एक साथ हो सके, इस कारण जस्टिस लीजा गिल और जस्टिस रितू टैगोर की बेंच ने हरियाणा के मामला को चीफ जस्टिस की कोर्ट को भेजा है।


गौरतलब है कि बीते महीनों पंजाब की मान सरकार ने भी शामलाट जमीनों का मालिकाना हक पंचायतों के नाम किए जाने के आदेश जारी किए थे। CM मान ने दो टूक चेतावनी दी थी कि या तो लोग शामलाट जमीनों से कब्जे छोड़ दें या फिर पर्चे-खर्चे को तैयार रहें। पंजाब सरकार के इन आदेशों के खिलाफ सुमित्रा नेगी व अन्य ने हाईकोर्ट में चुनौती दी हुई है। पंजाब-हरियाणा से संबंधित शामलात जमीन का मालिकाना हक पंचायतों के नाम करने के दोनों मामलों की सुनवाई अब एक साथ होगी।


शामलात जमीन पर बने फार्म हाउस और मकान
पंजाब में शामलाट जमीनों पर बड़ी संख्या में फार्म हाउस और कोठियां बनाई गई हैं। यहां तक की पंजाब में चंडीगढ़ की सीमा से लगते क्षेत्र में भी कई नामचीन लोगों की प्रॉपर्टी भी शामलाट भूमि पर बनी है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट द्वारा इसी साल 7 अप्रैल को ‘हरियाणा सरकार बनाम जय सिंह आदि’ मामले में सुनाए गए फैसले के साथ शामलाट जमीन की मालकी को लेकर गांव पंचायतों को बड़ा झटका लगा।


वित्त कमिश्नर (राजस्व) द्वारा जारी पत्र में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के संदर्भ में कहा गया है कि शामलाट भूमि और जुमला संयुक्त मालिक भूमि को कभी बांटा नहीं किया जा सकता है और न ही इस भूमि को हिस्सेदार के नाम पर ट्रांसफर किया जा सकता है।


हलफनामा देकर खत्म करवाए जाएं  
पंजाब सरकार ने भी इंतकाल गांव पंचायत के नाम करने के बाद जमीनों पर कब्जा करने की बात कही है। आदेश यह भी है कि जिन जमीनों से संबंधित मामले कलेक्टर या अदालतों के पास विचाराधीन हैं, वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले के संदर्भ में हलफनामा देकर खत्म करवाए जाएं। जिन शामलाट जमीनों पर 26 जनवरी 1950 से पहले के लोग लगातार बैठे हैं, उनके लिए लोग कलेक्टर की अदालत में दावा कर सकते हैं।

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