सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल की याचिका खारिज कर दी

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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को शिरोमणि अकाली दल (SAD) के नेता और पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल की याचिका खारिज कर दी। इस याचिका में उन्होंने अपने खिलाफ 2017 में दर्ज आपराधिक मानहानि की शिकायत को रद्द करने की मांग की थी। यह शिकायत उन पर ‘अखंड कीर्तनी जत्था’ (AKJ) को प्रतिबंधित आतंकी संगठन ‘बब्बर खालसा इंटरनेशनल’ (BKI) से जोड़ने के आरोप में दर्ज की गई थी।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने बादल की ओर से पेश सीनियर वकील कपिल सिब्बल से कहा, “हमने यह (हाई कोर्ट का) आदेश पढ़ा है। आप (बादल) पर क्या आरोप है? आप कहते हैं कि यह एक आतंकी संगठन है और शिकायतकर्ता उस दूसरे संगठन का प्रवक्ता है जो एक राजनीतिक मोर्चा है…”बादल ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें शिकायत को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था, साथ ही उन्होंने मामले में उन्हें समन भेजने वाले ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के मार्च 2020 के आदेश को भी चुनौती दी थी।

AKJ के प्रवक्ता राजिंदर पाल सिंह ने 2017 में बादल (जो उस समय डिप्टी सीएम थे) के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 499 (मानहानि) के तहत आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि बादल ने कुछ ऐसे मानहानिपूर्ण बयान दिए थे जिनमें शिकायतकर्ता और AKJ को आतंकी संगठन BKI का “राजनीतिक मोर्चा” बताया गया था। यह कथित बयान कई अखबारों में छपा था। शिकायतकर्ता सिंह ने दावा किया था कि वह AKJ के मुख्य प्रवक्ता हैं।

सिब्बल ने बेंच के सामने दलील दी कि बादल ने यह नहीं कहा था कि शिकायतकर्ता उस संगठन का प्रवक्ता है। सिब्बल ने तर्क दिया, “वह (शिकायतकर्ता) कहते हैं कि वह प्रवक्ता हैं। हमें नहीं पता कि उन्हें किसने अधिकृत किया है।”

बेंच ने यह देखते हुए याचिका खारिज कर दी कि शिकायत में जिस सामग्री का हवाला दिया गया था, उससे पता चलता है कि बादल ने सिंह को AKJ का प्रवक्ता बताया था।

बादल ने पहले हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और शिकायत व समन आदेश के साथ-साथ बाद की सभी कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि जनवरी 2017 में दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल उनके घर आए थे और इस बारे में मीडिया में खबर छपी थी।

उन्होंने दावा किया कि बादल ने राजनीतिक रैलियों और मीडिया में कथित मानहानिपूर्ण बयान दिए थे और अखबारों में उनकी खबरें छपी थीं। हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा, “यह कहने की ज़रूरत नहीं है कि इस फ़ैसले में की गई टिप्पणियां इस याचिका पर निर्णय लेने के लिए हैं और इनका मजिस्ट्रेट के सामने चल रही कार्यवाही पर कोई असर नहीं पड़ेगा; मजिस्ट्रेट शिकायत पर उसके गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेंगे।”###USA###UK###SUPREME###COURT###AUSTRALIA###NEWZEALAND###SINGAPORE###

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