चूना..अपनी मर्जी का किराया……कोई टिकट नहीं, मांगने पर करवा दिया जाता है खामोश…ये हाल है बस कंपनी गोराया ट्रांसपोर्ट का…..?

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दिनेश कुमार.अमृतसर। 

एक निजी बस मालिक पर सवारियों को टिकट नहीं देने का आरोप लगा हैं। यह बस कंपनी बटाला से ध्यानपुर के लिए प्रतिदिन रवाना होती हैं। बस कंपनी का नाम गोराया ट्रांसपोर्ट हैं। वह पिछले काफी लंबे से चल रही है। बस सहचालक मंजीत सिंह ट्रांसपोर्ट कंपनी का मालिक होने का दावा करता है। बस का किराया लेकर टिकट नहीं देने वाला का एक वीडियो लगभग डेढ़ मिनट का सोशल मीडिया पर खूब तेजी से प्रसारित हो रहा है। पता चला है कि कंपनी की राजनीति पहुंच काफी ऊपर तक हैं, इसलिए, कभी उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हुई। 

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….जानिए, वायरल वीडियो का सच

रविवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो खूब तेजी से प्रसारित होने लगा। वीडियो था बस सहचालक तथा सवारी के बीच हुई बहसबाजी का। उस पर आरोप लगा कि बस में जितनी सवारी बैठी थी, उनसे किराया तो वसूल लिया गया, जबकि, टिकट किसी को नहीं दी गई। सवारी ने इस बात पर सहचालक के खिलाफ ऐतराज जताया तो वह कहने लग पड़ा कि बस उनकी खुद की हैं, इसलिए कभी किसी सवारी को टिकट काट कर नहीं दी। मामला बढ़ा तो कहने लगा कि चलो अब टिकट ले लो। पास में खड़ा अन्य व्यक्ति कहने लगा कि यह बस गोराया ट्रांसपोर्ट की है। पिछले लंबे समय से चल रही है। कुल 5 बसें हैं। दावा किया कि मंजीत सिंह इसके मालिक हैं। 

सरकारी कानून का अनदेखा

कानून के मुताबिक, बस चाहे सरकारी या फिर निजी क्षेत्र से जुड़ी हुई क्यों न हो, बस सहचालक की नैतिक ड्यूटी बनती है कि बस में बैठने वाली सवारी को टिकट काट कर देने की। पैसे लेकर टिकट नहीं देना, एक प्रकार से कानून को अनदेखा किया जा रहा है। ऐसा करने वाले के खिलाफ जांच होनी चाहिए। 

महिलाओं से भी चार्ज किए जा रहे पैसे

राज्य सरकार ने सरकारी निजी बस ट्रांसपोर्ट कंपनी को एक सर्कुलेशन जारी कर रखा है कि बस में सफर करने वाली महिलाओं से पैसे नहीं लिए जाए, सिर्फ उनका आधार कार्ड देख कर बस में सफर करने का अधिकार दिया जाए। लेकिन, ऐसी निजी बस ट्रांसपोर्ट वाले महिलाओं से भी बस सफर का किराया लेकर कानून तथा राज्य के सरकारी आदेश को सरेआम ठेंगा दिखा रहे हैं।  

ज्यादा किराया वसूलने का भी लगा आरोप

वीडियो में सामने आया है कि बस कंपनी वाले सवारियों से अतिरिक्त बस किराया भी चार्ज कर रहे है। कई सावारियों ने इस बात की शिकायत भी की। उदाहरण के तौर पर लगभग 40 किलोमीटर के सफर करने वालों से एक प्रकार से डबल किराया लिया जा रहा है। यानी करीब 80 रुपए। देखा जाए, ये निजी बस कंपनी की आम जनता के साथ सीधे तौर पर लूट मचाई जा रही है। जबकि, विभाग को पता होने के बावजूद उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। इसके पीछे एक वजह राजनीतिक पहुंच को भी माना जा रहा हैं। 

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