चर्चा का विषय….इस बार पुलिस चाइना डोर की बिक्री पर क्यों है इतनी खामोश…..?

VINAY KOCHHAR SNE NEWS-EDITOR-IN-CHIEF.

एडिटर-इन-चीफ.विनय कोछड़.अमृतसर। 

GATTU-DOOR-INT.IMAGE

लोहड़ी का त्यौहार आने को अब कुछ समय ही बचा हैं। पंजाब में इस त्यौहार का अलग ही महत्व माना जाता हैं। परंपरा के मुताबिक, उस दिन पतंग उड़ाना एक प्रकार से पंजाब में शगुन माना जाता है। ऐसे में चिंता का विषय यह है कि पतंग उड़ाने के लिए चाइना डोर का इस्तेमाल काफी संख्या में की जाती हैं। ऐसा नहीं कि सरकार तथा पुलिस प्रशासन इसके प्रति सख्त नहीं हैं, लेकिन, इसकी पाबंधी तथा कड़ी कार्रवाई के बावजूद चाइना डोर की बिक्री काफी धड़ल्ले से हो रही हैं। इस बिक्री में पंजाब का अमृतसर शहर सबसे प्रथम स्थान पर चल रहा है। ऐसे में स्थानीय पुलिस के लिए इस बार बहुत बड़ा चैलेंज खड़ा हो गया है कि बिक्री तथा उत्पादन करने वाले नेटवर्क को कैसे तोड़ा जा सकें। 

चर्चा इस बात की चल रही है कि इस बार चाइना डोर बेचने वालों ने अपना नेटवर्क काफी मजबूत तथा गोपनीय तरीके से तैयार किया हैं। या फिर यूं कहें कि इस बार पुलिस को उन्हें पकड़ना भी इतना आसान नहीं होगा। अफवाहों का बाजार गर्म है कि पिछली बार से अधिक चाइना डोर अमृतसर क्षेत्र के कई व्यापारियों तक पहुंच गई हैं। आगे सप्लाई भी गुप्त तरीके से होने लग पड़ी है। सप्लाई करने वाले खरीदारों से मुंह मांगी कीमत वसूल भी कर रहे हैं। इधर, सवाल यह भी खड़ा होता है कि अपनी बहादुरी तथा अपराध को नियंत्रित करने का दावा करने वाली अमृतसर पुलिस अब तक इनके खिलाफ कार्रवाई करने में इतना पीछे क्यों हैं। या फिर इस बार चाइना डोर बेचने वाले मौके पर चौका मारने में कामयाब रहे हैं। खैर, इसका जवाब तो पुलिस आयुक्त को देना ही पड़ेगा, तब जाकर सारा मामला स्पष्ट हो पाएगा। 

किन-किन क्षेत्रों में बिक रही प्रतिबंधित डोर 

विश्वसनीय सूत्रों की पड़ताल उपरांत पता चला है कि अमृतसर के हाथी गेट, मान सिंह गेट, हाल बाजार, लाहौरी गेट, पुतली घर, छेहरटा, विजय नगर, पवन नगर, सुंदर नगर , कृष्णा नगर,  लारेंस रोड के भीतरी इलाके, रंजीत एवेन्यू, ग्रीन एवेन्यू,  बसंत नगर, मजीठा रोड , बटाला रोड , तुंग पाई , बिल्ले वाला चौक, शिवाला कॉलोनी, घन्नूपुर काले जैसे कई क्षेत्र है, यहां पर पुलिस के साथ आंख मिचौली खेल कर सरेआम प्रतिबंधित चाइना डोर का धंधा प्रफुल्लित हो रहा हैं। अब पुलिस आयुक्त को देखना होगा कि कैसे इंसानियत के दुश्मनों को पकड़ा जा सकें। 

कहां गए उड़न दस्ते या फिर ड्रोन

पिछली बार पुलिस ने शाबाशी हासिल करने के लिए दिसंबर माह में ही अपनी कमर कस ली थी। मैदान में उतर कर कई प्रतिबंधित डोर बेचने वालों को काबू कर उन्हें जेल की हवा खिलाई थी। बड़ी बात तो यह है कि तब बड़े अधिकारी भी मैदान में उतरे थे। इसके लिए ड्रोन तक की मदद ली गई। लेकिन, इस बार हैरान करने वाली बात यह है कि चाइना डोर के खिलाफ पुलिस की कोई खास कार्रवाई देखने को नहीं मिली है। ऐसे में चाइना डोर बेचने वालों को उनके ग्राहकों तक पहुंचाने में बहुत अच्छा रास्ता मिल चुका है। बताया जा रहा है कि चाइना डोर अमृतसर में इस समय इतनी संख्या में पहुंच चुकी है, शायद ही किसी ने इस बात का अंदाजा लगाया हों। 

फीका पड़ा है इस बार कानून

धड़ल्ले से चाइना डोर की बिक्री ने इस बात का साफ संकेत दे दिया है कि इस बार कानून काफी फीका पड़ा हैं। क्योंकि, पुलिस की तरफ से प्रतिबंधित डोर के खिलाफ कोई खास कार्रवाई नहीं की हैं। विश्वसनीय सूत्रों से इस बात की भी चर्चा चल रही है कि इस बार पुलिस विभाग में बैठे कुछ रिश्वतखोर अधिकारी तथा कर्मचारियों ने अपना एक अलग ही गुट बना लिया है जो कि प्रतिबंधित डोर बेचने वालों के गोरखधंधे को बढ़ावा देने में हर संभव मदद कर रहे हैं।     

समझिए, इस रिपोर्ट में अपराध और दंड


चाइना डोर का उपयोग और व्यापार कानूनी अपराध है क्योंकि इसकी रस्सी जैव अपघटनीय नहीं होती और इससे कई, अक्सर घातक, दुर्घटनाएं होती हैं। यह रस्सी बेहद मजबूत है और इसके कारण गंभीर चोटें और मौतें हुई हैं, खासकर दोपहिया वाहन चालकों के बीच जब यह उनके गले में फंस जाती है। यह पक्षियों और अन्य जानवरों के लिए भी घातक है, और पेड़ों और बिजली की लाइनों पर इसकी उपस्थिति पर्यावरणीय समस्याएं पैदा करती है।

..अब तक किस जिले में कठोर कानून लागू हुआ

बताया जाता है कि पिछले साल बठिंडा में प्रतिबंधित डोर के खिलाफ एक नया कानून ला कर इतिहास रचा गया था। उस कानून के मुताबिक, अगर कोई पतंग भी चाइना डोर के इस्तेमाल सहित पकड़ा जाता है तो उसके सहित पेरेंट्स के खिलाफ धारा 307 का केस दर्ज किया गया। ऐसा कानून लाने पर वहां पर चाइना डोर को लेकर लोगों ने पुलिस तथा सिविल प्रशासन का समर्थन करते हुए कई संख्या में चाइना डोर को पकड़वाया था। कहां जाता है कि उस दौरान प्रशासन को काफी अच्छी सफलता हासिल हुई थी। अब सवाल यह उठ रहा है कि  क्या स्थानीय पुलिस भी उनसे सबक लेकर इस प्रकार का कानून को पारित करेंगे या फिर इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। 

कठिन है इसका दंड

प्रतिबंध डोर समेत पकड़े जाने पर काफी कड़ा कानून पारित किया गया हैं। इसमें भारी जुर्माना ( 15 लाख रुपये तक) और संबंधित कानूनों के तहत कानूनी अभियोजन शामिल है।

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