RELIGIOUS….हिंदू-सिख-मुस्लिम भाईचारा का प्रतीक है, ये रामबाग का ‘लंगर’…..दूर-दूर तक इसकी ‘गूंज’

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वरिष्ठ पत्रकार.अमृतसर।

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वैश्विक सृष्टि के रचयिता भगवान श्री भोलेनाथ के वैवाहिक उत्सव (महाशिवरात्रि) की धूम प्रतिवर्ष पूरे विश्व में रहती है। खास बात यह है कि इस उत्सव पर लंगर प्रथा एक तरह से किसी विवाह से कम नहीं मानी जाती हैं। इस अवसर पर तरह-तरह के लजीज लंगर श्रद्धालुओं के बीच वितरित किया जाता हैं। ऐसा ही एक लंगर पंजाब की गुरु नगरी अमृतसर में स्थित रामबाग में प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि पर लगाया जाता है। इस लंगर की व्यवस्था अरोड़ा बंधु (कृष्णा ट्रेडर्स) की तरफ से किया जाता हैं। दिलचस्प पहलू यह है कि इस लंगर की व्यवस्था को चलाने वाले हर जाति (समुदाय) से संबंध रखते है। या फिर यू कहा जाए, .ये लंगर हिंदू-सिख-मुस्लिम भाईचारा का प्रतीक भी माना जाता है। इतना ही नहीं, इसकी गूंज दूर-दूर तक मशहूर हैं। 

..कैसे, इस व्यवस्था को रखा बरकरार

कृष्णा ट्रेडर्स को चलाने वाले अरोड़ा बंधु के मुताबिक, उनका भगवान श्री भोलेनाथ पर अट्टू विश्वास हैं। बचपन से ही उन्हें आस्था से जुड़ने का सौभाग्य हासिल हुआ। जब व्यवसाय में कदम रखा तो पहले दिन से ही अपनी कमाई का कुछ हिस्सा धार्मिक कार्यों में निकालना आरंभ कर दिया। कुछ साल पहले मन में इस बात की श्रद्धा उठी कि प्रतिवर्ष भगवान श्री भोलेनाथ (महाशिवरात्रि) के लंगर लगाने का आयोजन किया जाए।

इसके लिए दुकान में काम करने वाले कर्मचारियों, जिनमें रियाज (मुस्लिम), मुकेश कुमार (हिंदू-ब्राह्मण समाज), आकाश सिंह (सिख समुदाय) ने भी इस शुभ कार्य में सहयोग देने का फैसला लिया। फिर क्या था, इस लंगर प्रथा को प्रतिवर्ष चलाने का कार्य आरंभ हुआ। 

लंगर में क्या, कुछ है खास, समझेंगे, इस रिपोर्ट में……?

अरोड़ा बंधु के मुताबिक, लंगर को तैयार करने के लिए खास बंदोबस्त किया जाता हैं। इस लंगर में भठूरे-चने तथा साथ कोलड्रिंक्स की खास व्यवस्था की जाती है। मीठे में कड़ाह तैयार किया जाता है। सुबह से लेकर देर सायं तक लंगर चलता रहता हैं। प्रभु के समक्ष विभिन्न तरह के फल एवं फ्रूट का भोग लगाया जाता है।  खास बात यह है कि इस अवसर पर पंडितों की एक मंडली भोलेनाथ पर गुणगान भी करती हैं। सारा दिन भजन-कीर्तन की गूंज हर श्रद्धालु को सुनाई देती रहती हैं। लंगर वितरित के समय खासतौर पर महिलाएं अपना योगदान देती हैं। 

अल्लाह ताला की रहमत से मुझे आज महाशिवरात्रि के अवसर पर लंगर सेवा में करने का अवसर मिला। बहुत अच्छा लगा हैं। बचपन से ही मेरे वालिद ने हर धर्म का सम्मान करने की सीख दी। हमारे गांव में हिंदू-मुस्लिम परिवार एक साथ मिलजुल कर रहते है। एक-दूसरे के उत्सव में शामिल होते है तथा आपस में हाथ भी बंटाते हैं। वहीं से मुझे हर धर्म का सम्मान करने की तालीम हासिल हुई। 

रियाज

पिछले कुछ वर्ष से अरोड़ा बंधु के यहां एक कर्मचारी के तौर पर काम कर रहा हूं। पीछे से उत्तर-प्रदेश का रहने वाला हूं। उन्होंने हमेशा, मुझे अपने परिवार का हिस्सा माना हैं। कभी अपने प्रदेश तथा परिवार की कमी नहीं होने दी। लंगर में सेवा करने का अवसर मिला, ऐसा में मैं अपने आपको काफी भाग्यशाली समझता हूं। आज मेरा जीवन एकदम सफल हो गया। भविष्य में भी अरोड़ा परिवार की आस्था के साथ तत्पर खड़ा रहूंगा।” 

मुकेश कुमार (ब्राह्मण समाज)”    

जिंदगी में मुझे कई जगह काम का अवसर हासिल हुआ। कभी ये नहीं समझ पाया कि मेरा जिंदगी का गोल क्या हैं। किसी मालिक ने प्यार से बात तक नहीं की। जब से अरोड़ा बंधु के पास काम कर रहा हूं। तब से जिंदगी जीने का अहसास कर रहा हूं। मुझे, प्यार के साथ-साथ भगवान की आस्था के साथ जुड़ने का अवसर हासिल हुआ। जैसा कि मैंने कभी सोचा भी नहीं था। वैसे तो मैं एक सिख हूं, लेकिन, यहां पर मुझे भगवान श्री भोलेनाथ के विचारों के साथ जुड़ने तथा महाशिवरात्रि जैसे बड़े उत्सव पर लंगर में सहयोग देने का एक अनूठा तजुर्बा हासिल हुआ।”

”आकाश सिंह (सिख) 

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