EDITOR-IN-CHIEF.VINAY KOCHHAR.AMRITSAR.
देश-दुनिया में अपना डंका बजाने वाला अमूल मक्खन, खासकर, 8-10 ग्राम की खूब कालाबाजारी हो रही हैं। इतना ही नहीं, छोटेज का बहाना बनाकर डिस्ट्रीब्यूटर पूरी-पूरी लूट मचा रहे हैं। मामला, जिलाधीश के पास पहुंच चुका हैं। उन्होंने इस पूरे प्रकरण पर कड़ा संज्ञान लेते हुए एक टीम गठित कर दी हैं। उनके मुताबिक, अगर कोई ऐसा करते पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। लेकिन, हैरान करने वाला तथ्य यह है कि इस लूट तथा कालाबाजारी के बीच कंपनी को कोई खबर तक नहीं हैं। ऐसे में कयास, इस बात के लगाए जा रहे है कि कंपनी के कुछ बाबू तथा डिस्ट्रीब्यूटर, इस गोरखधंधे को चला रहे हैं।
एसएनई न्यूज़ के संवाददाताओं की अलग-अलग टीम पिछले कुछ दिनों से इस गोरखधंधे के बारे आ रही शिकायतों पर जमीनी स्तर पर काम कर रही हैं। टीम के अलग-अलग संवाददाता ने शिकायतों के आधार पर जब अलग-अलग डिस्ट्रीब्यूटर के पास आम ग्राहक की तरह पहुंचकर, उनसे 8-10 अमूल मक्खन की पैकिंग के बारे पता किया तो उन्होंने छोटेज का बहाना बनाया। लेकिन, बार-बार निवेदन करने के उपरांत , उन्हें, इस शर्त पर मक्खन देने को कहा कि ये मक्खन एमआरपी (630) से ऊपर 650 रुपए का दिया जाएगा। ये हाल लगभग सभी डिस्ट्रीब्यूटर का था।
इधर, अमूल मक्खन प्रोडक्ट बेचने वाले कई दुकानदारों ने अपनी व्यथा बयां करते कहा कि वे पिछले एक माह से डिस्ट्रीब्यूटर से मक्खन (8-10 ग्राम) की मांग कर रहे है, लेकिन, उन्हें हर बार छोटज का बहाना बनाकर टाल दिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि डिस्ट्रीब्यूटर जानबूझकर उक्त मक्खन को आम ग्राहक को महंगा कर बेच रहे है। ऊपर से खूब मोटी कमाई कर रहे हैं। ऐसे में आम ग्राहक को उनसे (SHOP-KEEPER) मक्खन न मिलने की वजह से निराश होकर लौट रहा है।
मक्खन पीछे से छोटेज हैं। कंपनी की तरफ से पहले 50-100 पेटी सप्ताह में आ जाती थी। अब सिर्फ 5 पेटी ही मिल रही है। कोई कालाबाजारी नहीं हो रही है। बिल्कुल गलत हैं। हम सिर्फ होटल, रेस्त्रां वालों को ही सप्लाई करते है। बाजार में कोई 650 की बेच रहा हैं, हमें नहीं कुछ मालूम—बंसल ट्रेडर्स (अमूल मक्खन) ।
मक्खन की कालाबाजारी खूब हो रही है। पीछे से प्लास्टिक नहीं आ रहा है। हम तो ग्राहक को एमआरपी पर बेच रहे हैं। भाई साहब आप हमसे सवाल पूछने वाले कौन होते है, क्या आप हम पर जज लगें हैं, जितने की मर्जी हम इसे बेचे…। अर्जुन ट्रेडर्स–अमूल डिस्ट्रीव्यूटर।
पीछे से मक्खन नहीं आ रहा है, ये मक्खन गुजरात से आता है। हमारा हेड ऑफिस गुजरात में है। ईरान-इजरायल-अमेरिका जंग की वजह प्लास्टिक नहीं आ रहा हैं। कालाबाजारी का बिल्कुल मतलब नहीं है। हर किसी को बिल दिया जाता है। अगर किसी को कोई शिकायत है तो वे हमारे पास बिल पेश करें, पिछले 20 दिन से मक्खन ही नहीं आ रहा हैं। वैसे भी अमृतसर में अमूल के डिस्ट्रीब्यूटर 5-6 कंपनी है। इसमें बेस्ट प्राइस , वालमाटस जैसी कंपनी भी शामिल हैं।…नेशनल ट्रेडर्स..अमूल मक्खन डिस्ट्रीब्यूटर।
कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ एफआईआर होनी चाहिए

पहली बात तो आजकल कोई चीज शुद्व नहीं रही। मक्खन में मिलावट की जाती है। कई बार शोध में इस बात की पुष्टि भी हो चुकी है। ऊपर से ऐसे प्रोडक्ट्स की कालबाजारी हो रही है जो सरकार तथा प्रशासन के लिए शर्म की बात है। पूछा जाए ये लोग कर क्या रहे हैं। क्यों नहीं कोई कार्रवाई कर रहे है। कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सीधे तौर पर एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। उन्हें बिल्कुल ही नहीं छोड़ा जाना चाहिए। स्वामी मेघनाथ, समाजसेवी एवं डेरा मुखी भगवान वाल्मीकि भगवान, अमृतसर।

कालाबाजारी करने वालों को शर्म करनी चाहिए, क्योंकि ऐसा पैसा कभी किसी को पचता नहीं हैं। ऊपर से देश-विदेश में पसंदीदा मक्खन अमूल को एमआरपी के ऊपर बेचना समझ लीजिए, देश एवं समाज के साथ धोखाधड़ी की जा रही है। इसका एकमात्र इलाज है कि इनके खिलाफ कानूनी तौर पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। यहीं लोग गरीबों के साथ भद्दा मजाक कर रहे हैं। ऐसे में इनके खिलाफ एक कानून पारित कर उन्हें भविष्य में फिर इस तरह की गलती न दोहराने का सबक सिखाना होगा। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता…..गिरीश शर्मा।

हमारे परिवार ने देश की स्वतंत्रता में अहम रोल निभाया। अपनी जान की कुर्बानियां देकर भारत को स्वतंत्र कराया। लेकिन, कितनी दुख देने वाली बात है कि वर्तमान में कुछ लोग अपने फायदे के लिए अन्य लोगों को नुकसान पहुंचा रहे है। अमूल मक्खन हर मां और उसके बच्चे का पसंदीदा पदार्थ है। ऐसे में इस पदार्थ की कालाबाजारी करना, एक तरह से बहुत बड़ा अपराध हैं। पुलिस तथा मान सरकार को इन लोगों के खिलाफ कड़ा एक्शन लेना होगा। इन सभी को पकड़ कर जेल में डालना होगा, तभी जाकर कालाबाजारी में कुछ सुधार होगा। शहीद भगत सिंह परिवार की महिला सदस्य , बीबी जसमीत कौर।

साहब, मैं पिछले 30 साल से कुलचा बेचने का काम कर रहा है। उससे पहले मेरे स्वर्गीय पिता जी काम करते थे। हम प्रति ग्राहक को कुलचे के साथ अमूल मक्खन परोस कर देते हैं। लेकिन, दुख की बात यह है कि अमूल मक्खन उन्हें एमआरपी से अधिक पैसे से मिल रहा है। यह एक प्रकार से उनके साथ अन्याय हो रहा है, लेकिन, इस वक्त खरीदना उनकी मजबूर हैं। मैं भगवंत मान सरकार से अपील करता हूं कि अमूल मक्खन की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। चन्नन कुलचे वाला..गुरनाम सिंह (चौगावा)।

बचपन से ही अमूल मक्खन खाने का शौकीन था। कुलचे बनाने का काम पिछले 2 साल से कर रहा हूं। हर ग्राहक कुलचे के साथ अमूल मक्खन की मांग करता है। लेकिन, मक्खन को इतना महंगा तथा छोटज कर दिया गया कि अब उनके लिए यह काम करना मुश्किल होता जा रहा है। लेकिन, मजबूरी इस बात की है इस काम को छोड़ने के उपरांत उनके पास विकल्प भी नहीं हैं। कुलचा विक्रेता—बंटी ।
एक-एक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी-डीसी
जिलाधीश दलजिंदर सिंह ने कहा कि कालाबाजारी करने वालों को बिल्कुल ही नहीं बख्शा जाएगा। एक टीम इन लोगों का पता लगाएंगी। अगर कोई कालाबाजारी करने के आरोप में पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

