AMRITSAR…भारतीय कैदियों को रिहा करने का पाकिस्तान का मास्टर स्ट्रोक…आखिर, इसके पीछे क्या है इसका मकसद….देखें, खास रिपोर्ट में..?

INDIA-PAKISTAN-DIPLOMACY-PRISONERS (FILE-IMAGE)

SNE NETWORK.AMRITSAR.

पाकिस्तान की जेल से रिहा किए सात भारतीय नागरिक शनिवार देर रात अटारी-वाघा सीमा के रास्ते सुरक्षित भारत लौट आए। सीमा पर पहुंचते ही परिजनों से मुलाकात के दौरान सभी भावुक हो गए। कई की आंखें भर आईं। पाकिस्तान की ओर से रिहा किए गए 7 नागरिकों में तीन फिरोजपुर जिले से, एक जालंधर, दो लुधियाना और एक उत्तर प्रदेश का निवासी शामिल है। इनमें से लुधियाना जिले के गांव परजियां बिहारीपुर निवासी रतनपाल सिंह और हरिंदर सिंह करीब ढाई वर्ष बाद अपने घर लौटे हैं। दोनों विवाहित हैं। वे मजदूरी व खेती कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे।

वर्ष 2023 में आई भीषण बाढ़ के दौरान ये सभी लोग अपने रिश्तेदारों, जमीन और पशुधन को बचाने के लिए सीमावर्ती इलाकों में गए थे। इसी दौरान पानी के तेज बहाव में बहकर वे अनजाने में सीमा पार कर पाकिस्तान पहुंच गए थे। पाकिस्तान रेंजर्स की सूचना पर उन्हें पाकिस्तानी कानून के तहत हिरासत में लिया गया था।रिहा होकर लौटे नागरिकों ने बताया कि पाकिस्तान की अदालत ने उन्हें एक वर्ष की सजा सुनाई थी लेकिन विभिन्न प्रक्रियाओं के कारण उन्हें करीब ढाई वर्ष तक जेल में रहना पड़ा। उन्होंने हिरासत के दौरान कठिन परिस्थितियों का सामना किया।

शनिवार को पाकिस्तान रेंजर्स ने सातों भारतीय नागरिकों को अटारी-वाघा सीमा पर बीएसएफ के हवाले किया। इसके बाद कस्टम, इमिग्रेशन और मेडिकल जांच की औपचारिकताएं पूरी की गईं। सभी नागरिकों को चिकित्सकीय परीक्षण के लिए अमृतसर के गुरु नानक देव अस्पताल ले जाया गया। रिहा हुए भारतीयों में चंद्र सिंह, रतनपाल सिंह, हरिंदर सिंह, गुरमीत सिंह, विशाल, सुनील अड़े और जोगिंदर शामिल हैं।

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