एडिटर-इन-चीफ विनय कोछड़.अमृतसर चंडीगढ़।
अमृतसर के एक हिस्से का शहरी अंतिम छोर समाप्त होने से पहले पड़ता है चब्बाल रोड, जो इन दिनों कचरे के डंप की समस्या को काफी बुरी तरह से झेल रहा हैं। इसके आसपास 25 कालोनी, 50 हजार के करीब जनसंख्या, मध्यम वर्ग से लेकर उच्च घरानों के लोग रहते है। इनमें 2 फीसद लोग इस कचरे के ढेर की वजह से गंभीर बीमारियों का शिकार हो चुके है। खासकर, बुजुर्गों तथा बच्चों की गिनती अधिक बताई जा रही है। कितने शर्म की बात है, इन सबके बावजूद नगर निगम (अमृतसर) एकदम खामोश होकर बैठा है। या फिर यू कह लें, कि इस समस्या को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा हैं। इतना ही नहीं, शिकायत विभाग के उच्च अधिकारियों से लेकर निम्न कर्मचारियों के पास पहुंच चुकी है। फिर भी कुछ न होना, इस बात की ओर संकेत जाता है कि विभाग की दाल में ही कुछ काला है।
कुछ दिन पहले नगर वासियों का धरना, इस बात का सबूत दे जाता है कि वाक्य रहने वाले लोग नरक में रहने के लिए मजबूर है। बार-बार जनता की मांग को सिरे से नजरअंदाज करना, कहीं न कहीं प्रदेश सरकार पर भी बड़ा सवाल खड़ा होता है कि क्यों, नहीं इन अधिकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई। ऐसा नहीं करने पर स्थानीय नगर वासियों के मन में सरकार के प्रति भी खासा रोष पाया जा रहा है। वे लोग कहते है कि हमने तो सोचा था कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार (आप) सत्ता में आने के बाद उनकी हर जायज मांग को पूरा कर देंगी। लेकिन, उनकी इतनी बड़ी जायज मांग अभी तक पूरा नहीं करने से इस बात का संकेत दे दिया वह भी पूर्व सरकारों जैसे ही निकले हैं।
बड़े-बड़े दावे ईमानदारी तथा विकास के नाम पर प्रदेश के मुख्यमंत्री हर स्टेज पर करते है, लेकिन, सच्चाई तो यह है कि यह सब एक प्रकार से झूठे है। क्योंकि, जनता की कोई भी बात उनका बाबू (अधिकारी, कर्मचारी) नहीं मानता है। इनमें अब जरा सा भी सरकार का खौफ नहीं रहा है। काम अपनी मनमर्जी से करते है। शिकायत को तो सिरे से नजरअंदाज कर दिया जाता है। इतना ही नहीं, सरकार ने जो शिकायत के नाम पर डिजिटल पोर्टल खोल रखे है, वे सब एकदम बेकार साबित हो रहे है। कोई शिकायत का निवारण नहीं किया जाता है।

जानिए..कब की है समस्या…?
इस समस्या से जुड़े विशेषज्ञों तथा नगर वासियों के मुताबिक, यह समस्या कोई नई नहीं है। यह बहुत पुरानी है। इसे कई सालों से नगर वासियों द्वारा विभाग तथा सरकार के समक्ष उठाया गया। आज तक कोई हल ही निकला। लेकिन, इस बार हम सब चुप नहीं बैठने वाले है। एकजुट होकर इस बात का प्रण कर लिया है कि अपनी आवाज को बिल्कुल ही नहीं दबने देंगे। बल्कि, मांग पूरी होने तक अपना संघर्ष इसी प्रकार से जारी रखेंगे। 25 कालोनी में रहने वाले 50 हजार के करीब लोग इस जंग में कूद चुके है। अब हर कोई विभाग द्वारा दिए झूठे आश्वासन के आगे झुकने वाला नहीं है।
…..समझे, रिपोर्ट में… किसने पहले आरंभ किया संघर्ष
इस मांग को सबसे पहले नगर निवासी मनु शर्मा ने आरंभ किया। क्योंकि, उन्होंने देखा कि कैसे नगरवासी नरक की जिंदगी जीने के लिए मजबूर है। चारों तरफ कचरा ही कचरा, लोगों की सांस की घुटन को दिल से अभ्यास किया तो उस समस्या के प्रति जंग का ऐलान कर दिया।इस जंग में उन्हें नगर वासियों का पूरी तरह से समर्थन मिल रहा है। प्रतिदिन समस्या के प्रति बैठक का दौर चल रहा है। पिछले दिनों जब मनु शर्मा ने इस मांग को लेकर विभाग के खिलाफ नगर वासियों सहित विशाल धरना दिया था। तब प्रशासन ने उनसे वादा किया था जल्द ही कूड़े का डंप जहां से उठा लिया जाता है। लेकिन, विभाग अपने वादे से मुकर गया तथा डंप वहां पर ही लगे है।
टूटी सड़क , धुएं से लोग है बेहाल
यहां की सड़क भी एकदम टूटी पड़ी है। आवाजाई में इतनी दिक्कत होती है। कई बार वाहनों का लंबा जाम लग जाता है। कारण यह भी है कि पास में रेलवे फाटक भी उपस्थित है। उस पर ब्रिज निर्माण का प्रस्ताव भी पारित हुआ, लेकिन, अभी तक निर्माण नहीं आरंभ हुआ। विशेषज्ञ मानते है कि यहां पर विभागीय तकनीकी समस्या चल रही है। जो कि विकास के राह में बहुत बड़ा अड़ंगा डाल रही है। खैर, आसपास के लोग तो खासा परेशान है। जिसे दूर करने में अब तक विभाग से सरकार बिल्कुल फेल साबित हो रहा है।
…जानिए, इस रिपोर्ट में…किस आयु के लोग हुए बीमार
एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन कालोनियों में रहने वाले कुल संख्या में से 2 फीसद लोग बीमार हो चुके है। कारण है कचरे का डंप तथा टूटी सड़क से उड़ने वाला धुआं। इसमें बुजुर्गों तथा 3 साल से नीचे आयु वाले बच्चे प्रमुख तौर पर शामिल हैं। उन्हें सांस लेने में दिक्कत, दस्त, उल्टी, खांसी जैसी बीमारियों का शिकार होना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि इन सब का इलाज विभिन्न मेडिकल अस्पताल में चल रहा है। उन्हें गंदगी तथा धुएं से बचने के लिए बोला गया है।
नगर वासियों की रेल चक्का जाम की चेतावनी
नगर वासियों ने सरकार तथा विभाग को सख्त लिहाज़ से चेतावनी देते कहा कि अगर जल्द ही कचरे का ढेर वहां से नहीं उठाया गया तो वे लोग रेल चक्का जाम करने के लिए मजबूर हो जाएंगे। इसके लिए कल को कुछ भी होता है तो प्रशासन तक सरकार जिम्मेदार होगा। क्योंकि, वे अब सभी तंग आ चुके है, इसलिए उन्हें कभी भी यह रास्ता अपनाना पड़ सकते है। वैसे भी, नगर वासियों की एकजुटता से इस बात का पक्का अंदाजा लगाया जा सकता है कि वे लोग अब बिना मांग मनाए संघर्ष से हटने वाले नहीं हैं।
सीएम, साहब, आपके तो अधिकारी फोन तक नहीं उठाते हैं…नगर वासी
इस गंभीर बन चुके मसले को लेकर नगरवासियों ने कई बार निगम विभाग कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों को फोन के माध्यम से संपर्क किया। लेकिन, हैरान करने वाली बात है किसी ने उनका फोन तक नहीं उठाया। इतना ही नहीं, एसएनई न्यूज़ के प्रतिनिधि ने निगम आयुक्त से लेकर स्वास्थ्य अधिकारी को संपर्क करने का प्रयास किया तो किसी ने भी फोन नहीं उठाया। सिर्फ सेनेटरी विभाग के एक अधिकारी ने फोन पर कहा कि वह तो एक छोटा मोटा कर्मचारी है। इस मसले पर वह कुछ भी नहीं कर सकता है। शायद सोमवार को समस्या का हल निकल सकता है। शेष सब कुछ उनके विभाग के बड़े अधिकारियों को पता होगा। उनके संज्ञान में मामला हैं।

