‘GNDH’ ‘ORTHO’ के ‘DOCTOR’S’  का डंग खासा है तेज….?  

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इस समय गुरु नानक देव अस्पताल का हड्डियां विभाग खासा चर्चा में चल रहा हैं। पता चला है कि इलाज कराने वाले रोगियों पर ‘DOCTORS’  का डंग खासा तेजी से फैल रहा हैं। अंदर की खबर है रोगियों को बाहर से महंगे दाम पर कूल्हा तथा प्लेट खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। इतना ही नहीं, इन डॉक्टरों की बाहरी मेडिकल दुकानदारों की अच्छी सेटिंग भी हैं। बदले में मोटी कमीशन मिलती है। अटकलों का बाजार इस बात पर जोर दे रहा है कि ये सब कुछ प्रिंसिपल को पता भी हैं, फिर भी वे खामोश होकर बैठे हैं। पत्ते की बात तो यह है कि उनकी खामोशी की वजह पैसे का हिस्सा बराबर तौर पर मिल रहा हैं। 

खैर, ऐसे में  गुरु नानक देव अस्पताल का आर्थों विभाग आम-जनता तथा मरीजों को लूटने की दुकान बनता जा रहा है  । कहने में सरकारी अस्पताल, इलाज के मामले में नामात्र पैसे का खर्च, लेकिन, जब ये लूट का सिलसिला चरम पर चला जाए तो आम-जनता का विश्वास एकदम इनसे टूट जाता हैं। वैसे, आम आदमी पार्टी (आप) सरकार तो सरकारी अस्पताल में बेहतर इलाज, हर प्रकार की सुविधा का दावा तो करती है, लेकिन, जब गुरु नानक देव अस्पताल के आर्थों की कार्यशैली देख ले तो लगता है ,शायद सरकार भी इस बेबस सिस्टम के समक्ष फेल हो चुकी है। ऐसे में जनता का भरोसा जीतना भी आप का महत्व है, क्योंकि, सिर पर विधानसभा चुनाव 2027 खड़े है। अगर मुद्दा जनता से जुड़ा है तो इसमें गंदगी की सफाई करना भी आप सरकार के लिए लाजिमी बन जाता है। क्योंकि, ऐसा करने से ही वे लोग जनता का विश्वास जीत सकते हैं। 

अफवाह का बाजार गर्म है कि विभाग का मुखिया तो निजी प्रैक्टिस करने में खासा माहिर है। ऐसे में वे सरकार से लेकर विभाग को मोटा चूना भी लगा रहे हैं। डर, खौफ उनमें जरा सा भी नहीं होना, इस बात की ओर इशारा करता है कि उनके खेल में कई लोग शामिल है जो उनका बराबरी में सहयोग कर रहे हैं। पता चला है कि विभाग कुछ दवाओं का गोलमोल खेल भी चल रहा हैं। जिन्हें कुछ दवा विक्रेताओं के साथ मिलकर बेचा जा रहा है। ऐसे में साफ हो जाता है कि ये लोग सिस्टम के गाल पर जोर से तमाचा मार रहे है , जबकि, खामोश सिस्टम के कान में गूंज ही नहीं सुनाई दे रही हैं। 

खैर, एक किस्सा ये भी खासा मशहूर है कि चार दशक पहले डॉक्टर मरीजों की नजर  में किसी भगवान से कम नहीं थे। उनका प्यार तथा काम करने का तरीका बीमार मरीज को देखते ही ठीक कर देता था। एक समय जब बेईमानी की लहर तेज हुई तो उन्होंने इस सिस्टम से दूर रहना सही समझा तथा आज भी उनकी ईमानदारी के चर्चों की गूंज सुनाई देती है। वक्त की पुकार है कि सिस्टम में बदलाव होना अति आवश्यक, लेकिन ऐसा तभी संभव हो सकता है, जब सरकार तथा विभाग अपना-अपना काम पूरी ईमानदारी से करना आरंभ कर दें। 

EDITOR-IN-CHIEF.VINAY KOCHHAR (SNE-NEWS) ###USA### (ARTICLE-GNDH)### UK###CANADA###

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