पवन कुमार.अमृतसर.चंडीगढ़।

श्री हरिमंदिर साहिब में मंगलवार को बंदी छोड़ दिवस मनाया गया। इस मौके पर पवित्र सरोवर के चारों तरफ 2 लाख घी के दीये जलाए गए और साथ ही मोमबत्तियां भी जलाई गईं।भव्य आतिशबाजी का नज़ारा ही कुछ अलग दिखाई दे रहा हैं। इस बार प्रदूषण को देखते हुए ग्रीन आतिशबाजी पर खास जोर दिया गया। एक अनुमान के मुताबिक, बंदी छोड़ दिवस पर इस बार संगत का आंकड़ा 3 लाख पार कर गया।

आजादी और न्याय का प्रतीक दिवाली त्यौहार—प्रमुख ग्रंथी ज्ञानी ऱगुबीर सिंह
इस अवसर पर श्री हरिमंदिर साहिब के प्रमुख ग्रंथी ज्ञानी रघबीर सिंह ने बताया कि बंदी छोड़ दिवस केवल रोशनी का नहीं, बल्कि आजादी और न्याय का प्रतीक है। गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने ग्वालियर किले में कैद 52 राजाओं को मुक्त कराया और अमृतसर लौटे थे। उनकी वापसी पर संगतों ने घी के दीपक जलाकर और आतिशबाजी के साथ खुशी मनाई थी। तब से यह दिन हर साल बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाया जाता है।


