चेतावनी….अगर स्वास्थ्य विभाग ने जल्द ही फास्ट फूड माफिया के खिलाफ बड़ा एक्शन नहीं लिया तो सिविल सर्जन ऑफिस का घेराव करेगी शहीद भगत सिंह वेलफेयर सोसाइटी
वरिष्ठ पत्रकार रंजीत मसून.अमृतसर।
पंजाब में पिछले कुछ समय से फास्ट फूड से जुड़ी जो घटनाएं हो रही हैं, इससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़ा होना ही भी अनिवार्य बनता हैं। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले तरनतारन शहर से मोमोज और चापा खाने से जिन 2 भाई-बहनों की मौत की खबर सामने आई थी। उसके बावजूद भी स्वास्थ्य विभाग गहरी नींद में सोया हुआ है। कोई बड़ा एक्शन नहीं लेकर, इस बात को साबित कर दिया कि विभाग में अवश्य कोई भी गोलमाल चल रहा हैं। खैर, इसका जवाब तो विभाग को जनता को देना ही पड़ेगा। इधर, सामाजिक मुद्दों से जुड़ी संस्था शहीद भगत सिंह वेलफेयर सोसायटी ने विभाग को कड़ी चेतावनी देती कहा कि अगर जल्द ही कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया तो सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर एक विशाल धरना दिया जाएगा। जल्द ही इसके लिए तारीख की घोषणा कर दी जाएगी।
जानिए, रिपोर्ट में कैसे चल रहा है गोलमाल
अमृतसर शहर में हेल्थ डिपार्टमेंट की छत्र-छाया में कई ऐसी दुकानें और छोटी-छोटी फैक्ट्रियां चल रही हैं, जहां दुकानों और रेहड़ी-पटरी पर खुलेआम फास्ट फूड बेच रहे है। उसमें किसी प्रकार से कोई सफाई तथा गुणवत्ता का कोई ध्यान नहीं हैं। इससे लोगों की हेल्थ खतरे में पड़ रही है। खराब क्वालिटी के मटेरियल से बने प्रोडक्ट हेल्थ के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकते हैं।
अधिकतर के पास FSSAI नंबर नहीं
एक अनुमान के मुताबिक, अधिकतर दुकानदार के पास कोई FSSAI नंबर नहीं हैं। इतना ही नहीं, उनमें इस्तेमाल होने वाले मटेरियल के बारे में कोई जानकारी तक नहीं दी जाती है। इसके अलावा, कई पैकिंग पर तो मैन्युफैक्चरिंग डेट भी नहीं लिखी होती और कुछ पर तो सिर्फ दुकान का नाम और इस्तेमाल की आखिरी तारीख लिखी होती है।
..ऐसे सामने आई सच्चाई
इस मामले की सच्चाई जानने के लिए हमारे संवाददाता ने सुल्तानविंड रोड के पास एक दुकान से कुछ फास्ट फूड आइटम खरीदे, जिसमें स्प्रिंग रोल और चपाती शामिल थे, जो बिना पैकिंग के खुलेआम बेचे जा रहे थे। खरीदे गए डिब्बे पर सिर्फ दुकान का नाम और इस्तेमाल की आखिरी तारीख लिखी थी। जबकि हेल्थ डिपार्टमेंट के नियमों के मुताबिक, कोई भी पैक्ड फूड आइटम सील होना चाहिए और उस पर FSSAI नंबर, इस्तेमाल किए गए मटेरियल की जानकारी, बनने की तारीख और इस्तेमाल की आखिरी तारीख डालना जरूरी है।
खतरनाक केमिकल का इस्तेमाल
जानकारी के मुताबिक, कई फास्ट फूड आइटम में ऐसे केमिकल इस्तेमाल किए जाते हैं, जो सेहत के लिए जानलेवा हो सकते हैं। जैसे, चाऊमीन, मोमोज और सूप में इस्तेमाल होने वाला मोनोसोडियम ग्लूटामेट (MSG) दिमाग और शरीर के लिए नुकसानदायक माना जाता है। इसके अलावा, कई खाने की चीजों में टार्ट्राज़ीन, सनसेट येलो, कैंडी फ्लॉस और रोड माइन B जैसे सिंथेटिक फ़ूड कलर भी इस्तेमाल किए जाते हैं, जो लंबे समय में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
जानलेवा बीमारियों का अधिक खतरा
फास्ट फूड और पैकेज्ड फ़ूड को लंबे समय तक खराब होने से बचाने के लिए सोडियम बेंजोएट और पोटैशियम सोर्बेट जैसे प्रिज़र्वेटिव भी इस्तेमाल किए जाते हैं। इनके ज़्यादा इस्तेमाल से मोटापा, डायबिटीज, कैंसर, दिल की बीमारियां, एलर्जी हो सकती हैं और बच्चों के मानसिक विकास पर भी बुरा असर पड़ सकता है।
विभाग बोला, होगी कड़ी कार्रवाई
जब इस बारे में ज़िला स्वास्थ्य विभाग और फ़ूड सुरक्षा विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि अगर कोई भी खाने की चीज़ पैकेज्ड फ़ॉर्म में बेची जाती है, तो उस पर FSSAI नंबर, इस्तेमाल की गई चीजों की जानकारी, बनाने की तारीख और एक्सपायरी डेट डालना ज़रूरी है।
उन्होंने कहा कि अगर कोई दुकानदार या फैक्ट्री मालिक इन नियमों का उल्लंघन करता हुआ पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ने पर उसकी दुकान या फैक्ट्री को सील भी किया जा सकता है।

