‘1 सप्ताह चलने वाले सियासी पिच में इस बार हाथ (कांग्रेस) के खिलाड़ियों ने कुछ अलग ही कर दिखाया। हाथ (कांग्रेस) ने काफी हद तक झाड़ू (आप) के तीलों को बिखरने में बड़ी सफलता हासिल की। कांग्रेस टिकट आवंटन करने की नीति एकदम मैच को जीताने के लिए कारगर साबित हुई। उन-उन खिलाड़ियों को मैच में खेलने का अवसर दिया गया जो वाक्य ही जीत हासिल कर सकते हों। ऐसा करके हाथ को इन्होंने काफी मजबूत किया। अब चर्चा का बाजार गर्म है कि अमृतसर निगम मेयर की गेंद हाथ के पाले में है। मैदान में भारी हार की वजह से आम आदमी पार्टी (आप) का झाड़ू मेयर की कुर्सी में नहीं बैठ सकता है। इस बार शहर की कई सीटों पर फूल (भाजपा) भी खिला-खिला दिखाई दिया। इसका एक मतलब यह है कि शहरी मतदाता अब भाजपा को पसंद करने लग पड़े है, इसलिए कुछ सीटों पर कमल पूरी तरह से खिला है। शिअद (तकड़ी) लंबे समय बाद अपने दम पर निगम चुनाव पर उतरी। कई सीटों पर तकड़ी का जादू पूरी तरह से बोला, इतना ही नहीं कड़ी टक्कर होने के बावजूद अपनी जीत को अंतिम समय में बदल दिया। पार्टी खेमे में खुशी तो जरुर है, लेकिन, गम इस बात का चल रहा है कि अगर भाजपा-शिअद गठबंधन कर लेते तो शायद पूरे मैच को ही बदल दिया जा सकता था। लेकिन, पार्टी हाईकमान की विचारधारा ने इस गठबंधन को फिर से नई पारी खेलने नहीं दिया गया। खैर , खिलाड़ी अपनी जीत से काफी जोश में तो दिखाई दे रहे है, बस इंतजार है कि कब वे निगम की गैलरी में बैठते है।
मैच के फाइनल राउड में काफी कुछ अनोखा देखने को मिला। चर्चा का बाजार गर्म है कि आम आदमी पार्टी (आप) प्रत्याशी चुनाव के दौरान बैलट पेपर ही उठाकर ले गया। खूब हंगामा खड़ा हो गया। अन्य प्रत्याशियों ने रोड जाम कर दिया। पुलिस कार्रवाई के बाद ही मामला शांत हुआ। चर्चा है कि आप प्रत्याशी अपराधी छवि से ताल्लुक रखता है। मैडम जी विधायका को अंतिम समय पैसे देकर टिकट ले आया था। इससे साबित हो जाता है कि आप प्रत्याशियों को हार का भयं पूर्व से ही सता रहा था। चुनावी नतीजों से पता चला है कि 85 खिलाड़ियों में से 40 खिलाडी कांग्रेस के जीत पाए है। 20 के लगभग झाड़ू सिमट चुका है। फूल-तकड़ी के खिलाड़ी 1-1 दर्जन पार छक्के मार कर अपनी जीत को हासिल कर चुके है। जीत हासिल करने वाले खिलाड़ी शांत होकर, इसलिए बैठे है कि उन्हें इस बात का भयं सता रहा है कि आप कोई गोलमाल न कर जाए। जीत की खुशियां तो बाद में भी मनाई जा सकती है। झाड़ू के खिलाड़ियों को अपनी हार पच नहीं रही है, इसलिए कभी वे लोग सरकारी बाबूओं पर धक्काशाही का आरोप लगा रहे है या फिर से मतों की गिनती करने के लिए जोर लगा रहे है। हाइमान तथा सीएम साहब ने माझा वाले नेता जी को फोन कर खूब खरी-खरी सुना दी। भाई साहब तो सीएम साहब के छोटे भाई कहलाएं जाते है। अब उन्हें इतना तक कह दिया गया है कि या तो इस्तीफा दें दे , अन्यथा पार्टी लाइन आपके खिलाफ बड़ी कार्रवाई करेंगी। उक्त नेता ने तो अब फोन उटाना ही बंद कर दिया है।
इस बार आम आदमी पार्टी (आप) विधायक की भविष्यवाणी को अमृतसर के मतदाताओ ने काफी गंभीरता से लिया। इसलिए, अंतिम समय में आप को मत देने वालों ने अन्य पार्टियों को मत देना ही सही समझा। इसलिए, अटकलें लगाई जा रही है कि हार की वजह ही उक्त नेता है, जिसने अंतिम समय में पार्टी की छवि को खराब करने में अहम भूमिका निभाई। पता चला है कि इस चुनाव में निर्दलीय चुनाव जीतने वाले अधिकतर नेता पर उक्त नेता का हाथ था। इन सभी को नेता जी ने अपनी पार्टी के खिलाफ खड़ा किया था। क्योंकि, वहां प्रदेश के मंत्री के चेहतों को टिकट आवंटन किया गया। पता चला है कि उक्त मंत्री ने इस चुनाव में टिकट आवंटन दौरान मोटा पैसा खाया था। अब तो सवाल यह भी खड़ा होता है कि पार्टी के घूसखोरों नेताओं की भी जांच होनी चाहिए, क्योंकि, ईमानदार, बेदाग छवि का दावा करने वाली पार्टी से यह लोग संबंध रखते है। अब लाला जी या फिर सीएम साहब, इस पर क्या करते है, उसका तो बाद में ही पता चलेगा।
चुनाव के दौरान आप के नेताओं द्वारा धक्काशाही करने के कई गंभीर आरोप भी लगे। उन्होंने कानून को हाथ में लेकर मतदाताओं से लेकर अन्य पार्टियों के प्रत्याशियों के साथ पूर्ण तौर पर धक्काशाही की गई। शायद ये लोग थे, जिनकी वजह आप को हार का मुंह देखना पड़ा। अंतिम समय में लोगों ने अपना वोट अन्य पार्टी के प्रत्याशियों को देने का फैसला कर लिया। इस बार तो इनकी महंगी शराब, ड्रग्स, पैसा का भी जादू नहीं चला। इन्होंने सोच रखा था कि वह इनके दम पर जीत को आसानी में बदल लेंगे। इतना ही नहीं, उन्हें तो जीत के स्वप्न भी आने लग पड़े थे। स्वप्न तब टूट गए, जब शाम के पांच के बाद परिणाम आया। एक समय तो इन्हें लग ही नहीं रहा था कि वे लोग हार चुके है। बौखलाहट चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी, सरकारी बाबूओं से उल्झना, दोबारा मत करवाने का जोर डालना, ये बात साबित हो रही है कि उन्हें हार का गम सहा नहीं जा रहा है। लेकिन, उन्हें समझना होगा कि यह पंजाब की जनता है, अगर उन्हें खुश रखेंगे तो वे आप के ही बन जाएंगे , वरना किनारा करने या फिर ऊपर से नीचे उतरने में बिल्कुल समय नहीं लगाते है।
प्रधान संपादक..विनय कोछड़ (एसएनई न्यूज़)।

