वरिष्ठ पत्रकार.बठिंडा
पुलिस की थर्ड डिग्री में हुई एक युवक के मौत के मामले में स्थानीय अदालत ने शीर्ष अधिकारियों सहित कुल 5 के खिलाफ हत्या का मामला चलाने का आदेश जारी कर दिया। मामला, वर्ष 2024 का बताया जा रहा है। मरने वाले की पहचान जिला बठिंडा के गांव लक्खी जंगल निवासी भिंदर के तौर पर हुई थी। बताया जा रहा है कि सीआईए-1 पुलिस ने उसे अवैध हिरासत में लेकर अमानवीय तरीके से प्रताड़ित किया था। मौत हिरासत के दौरान हो गई थी, जबकि, नहर में डूबने से हुई मौत का झूठा ड्रामा रचा गया। मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल तय हुई हैं।
कौन-कौन शामिल थे इस साजिश में…?
इस साजिश में तत्कालीन सीआईए-1 इंचार्ज इंस्पेक्टर नवप्रीत सिंह, हेड कांस्टेबल राजविंदर सिंह और कांस्टेबल गगनप्रीत सिंह, हरजीत सिंह व जसविंदर सिंह शामिल हैं। सभी घटना के समय सीआईए-1 यूनिट में तैनात थे। कथित अपराधियों के खिलाफ हत्या समेत अन्य गंभीर धाराओं में ट्रायल चलाने का आदेश दिया गया हैं। बताया जाता है कि कथित अपराधी घटना के समय सीआईए-1 यूनिट में तैनात थे।
..ऐसे हुई थी मौत
घटना के समय युवक को अवैध हिरासत में लिया गया। उसे कथित तौर पर अमानवीय तौर पर यातनाएं दी गई। रिपोर्ट के अनुसार उसे वॉटरबोर्डिंग तकनीक से प्रताड़ित किया गया, जिसमें व्यक्ति को डूबने जैसी स्थिति में लाया जाता है। जांच में यह भी पाया गया कि मौत के बाद इसे हादसा दर्शाने के लिए झील में डूबने की कहानी गढ़ी गई।
ऐसे पर्दाफाश हुआ पुलिस की झूठी कहानी का
न्यायिक जांच ने डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस के दावे को खारिज कर दिया। मृतक के भाई सतनाम सिंह ने 19 अक्टूबर 2024 को सेशन जज को पत्र लिखकर अवैध हिरासत और यातना के आरोप लगाए थे। मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड से भी संकेत मिला कि मृतक और इंस्पेक्टर एक ही समय में एक ही इलाके में मौजूद थे।
पोस्टमार्टम में दो दिन की देरी को भी जांच में संदिग्ध माना गया। पुलिस का दावा था कि भिंदर सिंह ने थर्मल प्लांट के पास झील में छलांग लगाई थी, लेकिन अदालत ने इस थ्योरी को स्वीकार नहीं किया। परिवार पहले ही इसे हिरासत में मौत बताते हुए विरोध जता चुका है।

