अहम फैसला…..कोर्ट ने माना, आतिशी की वीडियो से हुई छेड़छाड़…सोशल मीडिया से वीडियो हटाने के निर्देश

AAP-MLA-ATHISHI

वरिष्ठ पत्रकार.जालंधर। 

पूर्व CM आतिशी मार्लेना के वीडियो से जुड़े मामले में गुरुवार को जालंधर कोर्ट ने माना कि उनकी वायरल वीडियो के साथ छेड़छाड़ हुई थी। क्योंकि, फोरेंसिक जांच रिपोर्ट में वीडियो को एडिटेड बताया गया। कोर्ट ने सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को आतिशी का ये वीडियो हटाने के निर्देश भी दिए। साथ ही वीडियो पोस्ट करने वाले अकाउंट्स से जुड़े सभी लिंक भी डिलीट करने का आदेश दिया।


इस फैसले के बाद AAP के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जालंधर कोर्ट के ऑर्डर के बाद मंत्री कपिल मिश्रा को तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए। कोर्ट ने माना की फोरेंसिक रिपोर्ट में साबित हुआ कि वीडियो फर्जी है और उनके द्वारा “गुरु” शब्द बोला ही नहीं गया।


बता दें कि सबसे पहले कपिल मिश्रा ने ही सब टाइटल लगाकर ये वीडियो सोशल मीडिया पर डाला था। जिसमें कपिल मिश्रा ने आरोप लगाया था कि आतिशी ने दिल्ली विधानसभा की कार्यवाही के दौरान एक चर्चा में सिख गुरुओं के खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया। इसी वीडियो की पंजाब पुलिस ने मोहाली स्थित फोरेंसिक लैब से जांच कराई थी, जिसमें उसे एडिटेड बताया गया था।


बता दें कि जालंधर में जिस इकबाल सिंह बग्गा की शिकायत के आधार पर आतिशी पर FIR हुई है, वह भी खुलकर सामने नहीं आए हैं। मुझ पर आप वर्कर होने के नाते जानबूझकर FIR दर्ज करवाने के जो आरोप लगाए जा रहें वो झूठे हैं। उन्होंने कहा कि इससे पहले जालंधर में नहर से स्वरूप मिलने के मामले में भी सबसे पहले शिकायत मैंने की थी। तब भी शिकायत पर केस दर्ज हुआ था। इस बार भी शिकायत ही थी कि इस वीडियो की जांच की जाए। बाद में ये मामला ज्यादा उछल गया। जल्दी कार्रवाई हो गई और मेरा नाम भी इसमें आ गया। अन्यथा, राजनीति से प्रेरित होकर, सोच समझकर या जानबूझकर किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करवाई।
जानिए, पुलिस ने किस धारा के अधीन दर्ज किया था मामला

पुलिस ने मोहाली की फॉरेंसिक लैब से वीडियो जांच के बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 196(1) धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना। धारा 353(1)(b) और 353(2) सार्वजनिक शांति भंग करने के इरादे से झूठी जानकारी या अफवाह फैलाना , धारा 66(C) आईटी एक्ट के तहत कंप्यूटर संसाधनों का उपयोग करके पहचान की चोरी या धोखाधड़ी करने के मामले में केस दर्ज किया। 

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