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राज्यसभा सदस्य संदीप पाठक के मामले ने तब एक रोचक मोड़ ले लिया, जब उच्च न्यायालय (पंजाब एंड हरियाणा) हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या, उनके खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज हुई है या नहीं, अगर हुई तो स्पष्ट किया जाए। ऐसे में राज्य सरकार कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दे पाई। जिसके बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाते कहा कि पाठक के खिलाफ एक सप्ताह तक कोई कार्रवाई नहीं की जाएंगी। ऐसे में पाठक को अदालत से राहत मिल गई है तथा उन्हें अपना पक्ष मजबूती से पेश करने का समय हासिल हो गया है।
..कौन सा लगा राज्य सरकार पर आरोप, इस रिपोर्ट में समझें
पाठक के वरिष्ठ अधिवक्ता रणदीप राय ने पंजाब सरकार पर अदालत से लुका-छिपी खेलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य आज तक यह बताने से बच रहा है कि पाठक के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई या नहीं। पिछली सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट जवाब मांगा था, लेकिन आज भी वही स्थिति है। 8 मई को सरकार ने कहा था- जानकारी नहीं, आज फिर वही जवाब।
राय ने कहा कि यह सिर्फ एक सांसद का नहीं, हर नागरिक के मौलिक अधिकारों का सवाल है। अगर किसी के खिलाफ मामला दर्ज होता है तो उसे जानकारी मिलनी चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के यूथ बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया फैसले का हवाला देते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज होने के 24 घंटे में उसे सार्वजनिक किया जाना अनिवार्य है।
जानेंगे, किसकी वैधता पर उठे सवाल
ऐसे में पंजाब सरकार के वकील ने याचिका की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह मीडिया रिपोर्टों पर आधारित आशंका है। याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत का वैधानिक उपाय अपनाना चाहिए। चीफ जस्टिस ने कहा कि अदालत यह समझने में असमर्थ है कि राज्य यह बताने में क्यों हिचक रहा है कि संज्ञेय अपराध दर्ज हुआ या नहीं। कोर्ट ने साफ किया- जब तक फैसला नहीं होता, बिना अदालत की इजाजत पाठक पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। अगली सुनवाई अगले सप्ताह। ###USA##UK###HIGH-COURT-DECISION-NEWS###CANADA###@

