एडिटर-इन-चीफ.विनय कोछड़.पठानकोट.चंडीगढ़।
दिल्ली बम धमाका के अब पंजाब से तार जुड़ने लगे हैं। एक डॉक्टर को पंजाब के पठानकोट से गिरफ्तार किया। वह मेडिकल कॉलेज (अस्पताल) में बतौर लेप्रोस्कोपिक (सर्जन) था। पीछे से सईद अहमद भट्ट श्रीनगर के अनंतनाग का रहने वाला है। पिछले 3 साल से यहां पर काम कर रहा हैं। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि वह दिल्ली बम धमाका के प्रमुख आतंकी डॉक्टर उमर के संपर्क में था। गिरफ्तारी के बारे , कालेज प्रबंधन ने पुष्टि कर दी। बताया जा रहा है कि प्रबंधन कमेटी का प्रमुख एक बहुत बड़ी पार्टी का राजनेता हैं। एजेंसी, सूत्रों के हवाले से पता चला है कि उक्त कथित अपराधी देश में अलग-अलग जगह धमाके करने की साजिश में शामिल था। गिरफ्तारी खुफिया विभाग (आईबी) के इनपुट के आधार पर हुई।

…अब तक कितने हो चुके है गिरफ्तार…समझिए खास रिपोर्ट में…?
इस केस से जुड़े लगभग 2 दर्जन के करीब गिरफ्तारियां हो चुकी है। अधिकतर गिरफ्तार लोग डॉक्टर (सफेद, कोर्ट) पेशे से जुड़े हैं। ऐसा पहली बार देश में हुआ हैं। वे दिल्ली, फरीदाबाद, श्रीनगर तथा पंजाब के अलग-अलग मेडिकल संस्था से जुड़े हुए पाए गए हैं। पूछताछ में कई राज उगल रहे हैं, जिसका शायद एजेंसी ने कभी अंदाजा भी नहीं लगाया था। जैसा कि देश के कई हिस्सों में बम धमाका, 26 जनवरी गणतंत्रता दिवस को टारगेट करने की योजना भी प्रमुख तौर पर सामने आई। जांच एजेंसी से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि जांच का दायरा काफी बढ़ाया गया हैं। आने वाले दिनों में कई और भी गिरफ्तार हो सकते हैं।

….तुर्किये कनेक्शन भी आया था सामने
जांच से जुड़े विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से पता चला है कि इस धमाके का मास्टरमाइंड तुर्किये का रहने वाला हैं। इस बारे जांच एजेंसी तुर्किये जांच एजेंसी तथा इंटरपोल की भी मदद ले रही है। पता चला है कि बम धमाका के आदेश विदेश से जारी हुए थे। ये सफेद कोर्ट को इस साजिश में शामिल करना , एक यह भी बड़ा कारण था कि इससे किसी को शक भी जल्दी नहीं होगा। वे अपने मंसूबों में कामयाब हो पाते लेकिन, उससे पहले ही जांच एजेंसी ने उन्हें अलग-अलग जगह से गिरफ्तार कर लिया। दिल्ली बम धमाका एक जल्दबाजी का नतीजा था।

..दिल्ली की….वो यूनिवर्सिटी अब भी शक के घेरे में हैं
जांच एजेंसी से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि दिल्ली की एक यूनिवर्सिटी अब भी उनके शक के घेरे में हैं। क्योंकि, विस्फोट से जुड़ा कुछ समान यहां की प्रयोगशाला से इस्तेमाल होने का उनके हाथ पुख्ता सबूत लगा हैं। जो इस बात का संकेत देता है कि कहीं न कहीं इस विश्वविद्यालय के पकड़े गए डॉक्टरों को भीतर काम करने वाले कुछ लोग मदद कर रहे थे। हालांकि, पिछले दिनों विश्वविद्यालय ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए प्रेस रिलीज भी जारी किया था। जबकि, जांच एजेंसी उनके जवाब से अभी तक संतुष्ट नहीं हैं।हवाला के जरिए हुई थी फंडिंग

जांच पड़ताल में सामने आया है कि इन सफेद कोर्ट वाले आतंकियों की फंडिंग विदेश से हवाला के जरिए हुई। किसी प्रकार से बैंक खाता की संदिग्ध ट्रांजेक्शन सामने नहीं आई, जिससे साबित हो सके कि पैसा बैंक खाता के माध्यम से उन तक पहुंचा था। हवाला का नेटवर्क में कुछ कारोबारियों के नाम भी सामने आ रहे हैं। वह ज्यादातर दिल्ली तथा श्रीनगर के रहने वाले हैं। पता चला है कि उनके संबंध व्यापार को लेकर विदेश में हैं, जिसका फायदा आतंकी फंडिंग को हुआ। इतना तो तय है कि आने वाले दिनों में हवाला कारोबारियों को एजेंसी दबोच सकती है। सुनने में आ रहा है कि कुछ हवाला कारोबारी भूमिगत हो चुके है।

50 से ऊपर सैंपल लिए
जांच एजेंसी के भरोसेमंद सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की कि उनकी अलग-अलग टीम ने विस्फोट स्थल से 50 के ऊपर सैंपल लिए हैं। जो-जो आतंकी पकड़े या फिर एक मृत पाया गया, उनके परिवार के साथ डीएनए सैंपल प्रयोगशाला में चेक किया तो साफ जाहिर हो गया कि इनका विस्फोट में हाथ होने की बात सामने आई। कुछ सैंपल ऐसे भी हैं, जिसकी जांच में थोड़ा समय लग सकता है। लेकिन, उसका उतना ही फायदा जांच टीम को होगा। क्योंकि, इन कथित अपराधियों को सजा दिलाने में खास भूमिका निभा सकते हैं।

पूरे देश में है हाई-अलर्ट
इस दुखदायक घटना के बाद केंद्र सरकार ने पूरे देश में हाई-अलर्ट घोषित कर रखा है। खासकर , पड़ोसी देश मसलन पाकिस्तान के सीमांत क्षेत्रों पर तो काफी संख्या में पुलिस बल तथा अन्य पुलिस एजेंसी को एकदम सतर्क कर रखा है। सार्वजनिक स्थल से लेकर भीड़भाड़ वाले स्थल पर पुलिस नाका को मजबूत कर दिया गया। 24 घंटा चौकसी को बढ़ाया गया। उधर, पाकिस्तान को इस बात अंदेशा है कि इस विस्फोट का बदला लेने के लिए भारत पर हमला कर सकता है। इसके लिए भारत के साथ लगने वाली सीमाएं को सील कर दिया गया। हर मूवमेंट को तेज कर दिया गया है। इस बात की पुष्टि, एजेंसी से जुड़े एक अधिकारी ने की।

