DAMAGE-CONTROL..’आप’ कैसे, और क्यों है टूटने की कगार पर….आखिर, क्यों चला बैठकों का दौर….भीतर ही भीतर किसकी खाई जा रही चिंता..इस रिपोर्ट में समझिए, हर वो पहलू….?

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पंजाब की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी इस समय अपने सबसे कठिन राजनीतिक दौर से गुजर रही है। सात राज्यसभा सांसदों के बगावती तेवर अपनाकर पार्टी छोड़ने और भाजपा का दामन थामने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। जालंधर के शाहपुर स्थित सिटी कैंपस में प्रदेश प्रभारी मनीष सिसोदिया की अगुवाई में आज अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें 25 से अधिक विधायक और मंत्री शामिल हुए। 

बैठक में पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार संधवा, मंत्री बरिंदर गोयल और विधायक बलकार सिद्धू भी मौजूद रहे। बैठक के दौरान “गद्दार” शब्द को लेकर उठे विवाद पर स्पीकर कुलतार संधवा ने कहा कि यह कोई छोटा मुद्दा नहीं है, इसका जवाब दो मिनट में नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि जो नेता पार्टी छोड़कर गए हैं, उन्हें खुद सोचना चाहिए कि उनका फैसला सही था या गलत। साथ ही उन्होंने सीएम भगवंत मान के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि दो विधायकों वाली पार्टी में सात राज्यसभा सदस्य कैसे बन सकते हैं, यह सोचने वाली बात है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर वे इस्तीफा देकर चुनाव लड़ें, तो सच्चाई सामने आ जाएगी।

विधायक बलकार सिद्धू ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि यह पार्टी पहले भी कई दलों को खत्म कर चुकी है और जो नेता इसमें शामिल हो रहे हैं, वे सिर्फ दो साल के मेहमान हैं। उन्होंने कहा कि नगर निगम चुनाव को लेकर यह बैठक बेहद अहम है और पार्टी पूरी मजबूती के साथ मैदान में उतरने जा रही है। वहीं मंत्री बरिंदर गोयल ने इसे रूटीन मीटिंग बताते हुए कहा कि पार्टी में ब्लॉक स्तर से लेकर मुख्यमंत्री तक सभी एकजुट हैं और पंजाब की बेहतरी के लिए लगातार चर्चा की जा रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी छोड़ने वालों से कोई फर्क नहीं पड़ता, बल्कि नुकसान उन्हें ही होता है।

आप नेताओं ने कांग्रेस और विपक्ष पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष के 50 विधायकों के पार्टी छोड़ने के दावे बेबुनियाद हैं। साथ ही यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार ने अपने वादे पूरे किए हैं और जनता 2027 में फिर से पार्टी को सत्ता में लाने का मन बना चुकी है। बैठक में पार्टी संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेने और आगामी चुनावों की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।

आम आदमी पार्टी के हालात ऐसे बन चुके हैं कि पंजाब में सरकार चला रही आप को अब सत्ता से अधिक संगठन बचाने की चिंता सताने लगी है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री मान ने पार्टी को टूटने से बचाने के लिए व्यापक रणनीति तैयार की है। बैठक में मुख्यमंत्री के साथ पंजाब प्रभारी मनीष सिसाैदिया भी मौजूद रहेंगे।

सांसदों की बगावत के बाद पंजाब में स्थिति संभालने की जिम्मेदारी मनीष सिसोदिया और संजय सिंह को सौंपी गई है। दोनों नेताओं को संगठन को मजबूत बनाए रखने, असंतुष्ट नेताओं से संवाद करने और सरकार के कामकाज को जनता तक पहुंचाने का दायित्व दिया गया है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार मौजूदा सांसदों और विधायकों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि कोई राजनीतिक संपर्क करता है या पार्टी छोड़ने का दबाव बनाता है तो इसकी जानकारी तुरंत वरिष्ठ नेतृत्व तक पहुंचाई जाए। कुछ मामलों में बातचीत का रिकॉर्ड रखने तक की सलाह दी गई है। इससे साफ है कि पार्टी नेतृत्व को भीतरघात का डर सता रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत उस समय हुई जब सांसद राघव चड्ढा ने राज्यसभा में उप नेता पद से हटाए जाने के बाद कुछ बड़ा होने की आशंका जताई थी। उस समय इसे सामान्य बयान माना गया, लेकिन बाद में सात सांसदों के एक साथ अलग होने से पार्टी के भीतर हड़कंप मच गया। अब पंजाब में आप के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर सरकार को स्थिर रखना है, दूसरी ओर संगठन को टूटने से बचाना है। यदि इस समय असंतोष बढ़ता है तो इसका सीधा असर आगामी चुनावों पर पड़ सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब में आप की असली परीक्षा अब शुरू हुई है। सत्ता में होने के बावजूद यदि पार्टी अपने नेताओं और विधायकों को साथ नहीं रख पाती तो विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बना सकता है। वहीं यदि मुख्यमंत्री मान संगठन को संभालने में सफल रहते हैं तो इसे उनके नेतृत्व की बड़ी उपलब्धि माना जाएगा। फिलहाल पंजाब की राजनीति में यही चर्चा है कि पार्टी इस संकट से किस हद तक उबर पाती है।

बैठक में सभी पर्यवेक्षकों और पदाधिकारियों की शिकायतों के समाधान पर विशेष जोर रहेगा। पार्टी नहीं चाहती कि संगठन के भीतर किसी प्रकार की नाराजगी रहे क्योंकि आगे विधानसभा चुनाव हैं। यही कारण है कि पार्टी चुनाव से पहले किसी भी तरह के विवाद और अस्थिरता से बचना चाहती है।

इससे पहले बठिंडा में मुख्यमंत्री मान ने कार्यकर्ताओं के साथ संवाद किया था। इस दौरान नशा बिकने की शिकायत पर कार्रवाई न होने के मामले में उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस चौकी कोटशमीर का पूरा स्टाफ बदलने के आदेश दिए थे। इसके बाद डीआईजी कार्यालय ने पंजाब पुलिस के आठ और पंजाब होमगार्ड के तीन कर्मियों समेत कुल 11 कर्मचारियों का बठिंडा से मानसा तबादला कर दिया। इनमें दो महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।आप पंजाब प्रभारी मनीष सिसाैदिया ने कहा कि यह नियमित संगठनात्मक बैठक है, जिसमें हर स्तर पर संगठन की स्थिति, जमीनी जानकारी और आगे की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। ###USA###UK##CANADA###AAP-POLITICS-NEWS###INDIA###

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