वरिष्ठ पत्रकार अमित मरवाहा.तरनतारन।
तरनतारन विधानसभा उपचुनाव छिटपुट घटना को छोड़कर काफी शांतिपूर्ण तथा सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। मंगलवार की सुबह 7 बजे चुनाव आरंभ हुआ तथा देर सायं शाम 6 बजे तक चला। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मतदान 60.95% हुआ। इन आंकड़ों से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि मुकाबला काफी कड़ा रहा तथा हार-जीत का फैसला कम अंतर से होगा। पंथक सीट होने की वजह से इस चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) तथा शिरोमणि अकाली दल (शिअद, बादल गुट) तथा वारिस दे पंजाब शिअद (अमृतपाल पार्टी) में काफी कड़ा मुकाबला देखने को मिला हैं। कांग्रेस तथा भाजपा का इस चुनाव में कुछ खास जोर नहीं दिखाई दिया। मतगणना 14 नवंबर को हैं। ऐसे में सभी मतदान बक्से पुलिस तथा सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की निगरानी में सुरक्षित स्थान पर रख दिए गए। बाहर कड़ा पैहरा तथा सीसीटीवी कैमरा की मदद से निगरानी की जा रही हैं। आसपास के क्षेत्र को बिल्कुल सील कर दिया गया।

सारा दिन क्या रहा माहौल….जानिए, खास रिपोर्ट में….?
अलग-अलग मतदान केंद्र में सुबह 6 बजे के बाद मतदाताओं की बूथ केंद्र के बाहर भीड़ जमा होने लगी। 7 बजे मतदाताओं को मत करने के लिए भीतर आने दिया गया। इस बीच शिअद ने पुलिस पर आरोप लगाते कहा कि उनके साथ धक्का किया जा रहा है। एसडीएम तथा पंजाब चुनाव आयोग को लिखित शिकायत की गई। उधर, भाजपा के एक बूथ के पास संदिग्ध कार पाई गई। भाजपा ने आरोप लगाया किसी ने बूथ छीनने की नीयत से कार को जहां खड़ा कर दिया। पुलिस हरकत में आ गई। तुरंत कार वहां से हटा दिया गया। किसी प्रकार की कानूनी कोई कार्रवाई हुई, इस बारे अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।

10 बजे से लेकर 12 बजे तक सिर्फ 30 फीसद के करीब ही मतदान हुए। दोपहर 3 बजे के बाद मतदाताओं की मत डालने की संख्या में इजाफा होने लगा। देर सायं 6 बजे कुल मतदान 60 फीसद पार कर गया।
शहर में ये 2 पार्टियों का कड़ा मुकाबला देखने को मिला
आम आदमी पार्टी (आप) प्रत्याशी हरमीत सिंह संधू तथा शिरोमणि अकाली दल (शिअद) प्रत्याशी बीबी सुखविंदर कौर रंधावा में काफी कड़ा मुकाबला देखने को मिला। बताया जा रहा है कि दोनों ही बूथ पर मतदाताओं की काफी लंबी-लंबी कतारें देखने को मिली। ऐसे में इस बात की संभावना पैदा हो जाती है कि शहर से दोनों के बीच जीत-हार काफी कम मतों से होगा।

जबकि, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) हरजीत सिंह संधू, कांग्रेस प्रत्याशी करणबीर सिंह बुर्ज, वारिस दे पंजाब (शिअद, अमृतपाल पार्टी) प्रत्याशी मंदीप सिंह के बूथ में मतदाताओं की खास चहल-पहल नहीं दिखाई दी। ऐसे में शहर से दूसरे, तीसरे तथा चौथे नंबर की कौन बाजी मारता है। इसका फैसला 14 नवंबर को हो जाएगा। बताया जा रहा है कि शहर से कुल 50 फीसद ही मतदान हुआ। इस बार बुजुर्ग, आम-जनता तथा युवाओं में मत करने की इतनी जोरशोर से दिलचस्पी नहीं दिखाई दी।
गांवों में मतदाताओं की काफी लंबी लाईने देखने को मिली
तरनतारन विधानसभा क्षेत्र के अधीन जितने गांव हैं, वहां पर मतदाताओं की काफी लंबी-लंबी लाईने दिखाई दी। सुबह से ही मतदान करने वालों ने बूथ केंद्र जाना आरंभ कर दिया। यहां पर बुजुर्ग, यूथ को भी काफी संख्या में मत करते हुए देखा गया। इतना ही नहीं, जहां पर प्रत्येक पार्टी ने अपने वर्करों की बकायदा मतदाताओं को घऱ से मतदान केंद्र तथा फिर छोड़ने तक की ड्युटी लगाई थी। गांवों में 60 फीसद के ऊपर मतदान हुए।
गांव में इन 2 पार्टियों का रहा कड़ा मुकाबला
गांव में मतदाता का अधिक रुझान 2 पार्टियों के बीच रहा। इनमें शिअद तथा वारिस दे पंजाब के बीच कड़ा मुकाबला हुआ। दोनों पार्टियों के बूथ पर काफी रश देखा गया। यहां पर तीसरे पायदान पर आम आदमी पार्टी के खिसकने के पूरे-पूरे आसार नज़र आ रहे है। क्योंकि, ग्रामीणों में सत्ताधारी सरकार के प्रति इतना खास रुझान नहीं दिखाई दिया। हालांकि, इस बार मतदाता काफी खामोश दिखाई दिया। खुलेआम इस बात की बिल्कुल घोषणा नहीं कि वे मत किस पार्टी को देकर आए। ऐसे में अभी हर बात के कयास ही लगाए जा रहे है। जीत तो 14 नवंबर को होगी।
जानिए, सिख पंथक मत किस तरफ गया
विधानसभा हलका तरनतारन का अधिक हिस्सा पंथक मत की वजह से जाना जाता है। यहां पर अधिक समय पंथक वोटर ने हमेशा ही पंथक प्रत्याशी को मत किया तथा जीत भी उसकी ही हुई। संसदीय क्षेत्र खडूर साहिब में सांसद अमृतपाल सिंह है जो कि पंधक विचारधारा से संबंध रखते है। उन्होंने संसदीय चुनाव में बड़ी लीड़ के साथ जीत हासिल की थी। ऐसे में चर्चा, इस बात की भी चल रही है कि उनकी पार्टी के प्रत्याशी मंदीप सिंह को भी काफी संख्या में मत पड़े है। सुनने में यह भी आया कि लगभग 1 दर्जन से ऊपर सिख जत्थेबंदियों ने मंदीप सिंह को समर्थन देने के साथ-साथ अधिक से अधिक मतदान कराने का भी वचन दिया था।
शिअद की प्रत्याशी बीबी सुखविंदर कौर का भी गांवों में अच्छी पकड़ रही। क्योंकि, उनका परिवार भी शहीद सिखों की श्रेणी से जाना जाता है। इनके परिवार के कई सदस्य सेना में रह चुके है। इसके अलावा वह सिख पंथ विचाराधार से जुड़ी है। ऐसे में गांव में दोनों की बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। लेकिन, इस बात की अभी संभावना नही लगाई जा सकती है, इनमें जीत किस को हासिल होती है।
कांग्रेस को इस कारण हुआ नुकसान
इस बार कांग्रेस को उनकी पार्टी के बड़े नेता से काफी नुकसान पहुंचा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तथा लुधियाना के सांसद राजा वड़िंग की चुनाव दौरान 2 बार कथित टिप्णीयों ने पार्टी के खिलाफ हवा को खराब कर दिया। मतदाता इस बार उनसे इतना खुश नहीं दिखाई दिया। ऐसे में कयास इस बात के लगाए जा रहे है कि कांग्रेस इस बार चौथे पायदान पर रह सकती है। एक समय कांग्रेस की यह सीट काफी मजबूत हुआ करती थी। लेकिन, चुनाव प्रचार गलत तरीके की वजह से मतदाता का कांग्रेस के प्रति कुछ खास रुझान नहीं देखने को नहीं मिला।
गांव में सत्ताधारी पार्टी का विरोध भी हुआ
गांव में सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ हवा का रुख इतना अच्छा नहीं था। प्रचार के दौरान तो कई जगह आप के बड़े नेताओं तथा मंत्रियों को आम जनता का गुस्सा भी सहना पड़ा। कईयों ने इनके खिलाफ सोशल मीडिया में खुलकर प्रचार किया। सरकार की नीतियों के खिलाफ खोल कर बोला गया। प्रचार के दौरान कई जगह रास्ते भी बंद कर दिए गए।
उधर, सीएम ने मतदाताओं को अपनी तरफ खींचने के लिए यहां से कई बड़े प्रोजेक्ट की घोषणा भी की। जनता के बीच अच्छा संदेश देने की बात, लगता है कुछ खास काम नहीं कर पाई, क्योंकि, गांव में उनकी पार्टी बूथ केंद्र में कोई खास रश देखने को नहीं मिला। अगर गांव से आप के समर्थन में मत नहीं गए तो समझ लीजिए सीट उनके हाथ से जाना लगभग तय है।

