एडिटर-इन-चीफ विनय कोछड़, वरिष्ठ पत्रकार अमित मरवाहा.तरनतारन. अमृतसर.चंडीगढ़।
तरनतारन विधानसभा उपचुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) के प्रत्याशी हरमीत सिंह संधू जीत चुके हैं। लेकिन, पार्टी जीतकर भी हार गई। क्योंकि, इस बार शिरोमणि अकाली दल (शिअद) प्रत्याशी की अपनी प्रतिद्वंद्वी को कड़ी टक्कर देकर मतदाताओं के बीच एक अलग छाप छोड़ने में सफल रही हैं। वारिस दे पंजाब शिअद के प्रत्याशी मंदीप सिंह कुछ खास कमाल नहीं कर पाए। सांसद अमृतपाल सिंह का यह खास क्षेत्र माना जाता हैं। अंतिम क्षण में पंथक वोट बिखर जाने का रोल भी सामने आ रहा है। जिसका फायदा सत्ताधारी पार्टी (आप) को हुआ। राजा वड़िंग की कथित टिप्पणियों ने मतदाताओं को उनकी पार्टी की तरफ नहीं मत करने के लिए मजबूर कर दिया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सीनेट का मुद्दा, इस चुनाव में ले डूबा। कुल मिलाकर 12 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई।

…..जानिए, कैसे और कब बदली तस्वीर
शुक्रवार का दिन, सुबह 8 बजे इंटरनेशनल कॉलेज ऑफ नर्सिंग में मतगणना का काम आरंभ हुआ। पहले 3 राउंड में शिअद की प्रत्याशी बढ़त लेती नजर आई। ऐसे में आप प्रत्याशी के चेहरा का रंग बदलने लगा। जबकि, शिअद खेमे में खुशी की लहर दौड़ने लग पड़ी। सुखबीर सिंह बादल प्रत्याशी के टच में थे। ऐसे में पल-पल की खबर उन तक पहुंचने लगी। जब, चौथा राउंड आरंभ हुआ तो आप प्रत्याशी ने लीड ले ली। फिर , उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। हालांकि, इस बीच खेल में अकाली दल की प्रत्याशी सुखविंदर कौर रंधावा में बनी रही। लीड कुछ मतों की चलती रही। जब, गिनती 10 राउंड पार हुई तो लीड बढ़ने लगी। ऐसे में शिअद की प्रत्याशी ने मैदान को छोड़ दिया।

हालांकि, वारिस पंजाब दे (शिअद) प्रत्याशी मंदीप सिंह हर राउंड में तीसरे पायदान पर ही रहें। हालांकि, उन्हें उम्मीद थी कि वह सत्ताधारी पार्टी को कड़ी टक्कर दे देंगे। लेकिन, इस बार उनकी पार्टी का कोई ट्रिक नहीं चला। कांग्रेस तथा भाजपा को तो इस बार शहर तथा ग्रामीण क्षेत्रों में भी कुछ खास नहीं कर पाई। सभी जगह वे चौथे तथा पांचवें पायदान पर ही रहें। मतदाताओं में कांग्रेस के प्रति नाराजगी राजा वड़िंग द्वारा बार-बार की गई कथित टिप्पणियां थी, इस मुकाबले में निचले पायदान पर आना, कांग्रेस के लिए बहुत बड़ा सबक हैं। भविष्य में अब उसे अपनी गलती को सुधारने के लिए बड़ा कदम उठाना पड़ेगा।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशी की तो इस बार जमानत ही जब्त हो गई। सिर्फ वोटों की संख्या 6 हजार ही पार हुई। शहरी वोट भी नामात्र ही पड़ा। हालांकि, प्रचार पार्टी की केंद्रीय टीम से लेकर पंजाब स्तरीय टीम ने मतदाताओं को लुभाने के लिए हर संभव प्रयास किया। लेकिन, नतीजों ने उनकी उम्मीदों पर फिर से एक बार पानी फेर दिया।

वर्ष 2027 का रास्ता आप के लिए मुश्किल
जीत चाहे सत्ताधारी पार्टी आप के प्रत्याशी ने हासिल की, लेकिन, जितना जनता से पार्टी को प्यार मिलना चाहिए था, उतना मिला नहीं है। राजनीतिक विशेषज्ञों का इस बारे में कहना है कि एक बात को मान लीजिए, ये नतीजे कहीं न कहीं सत्ताधारी पार्टी के लिए वर्ष 2027 चुनाव के रास्ते के लिए काफी मुश्किलें खड़ी कर रहा हैं। अधिक बार यह ही देखने को मिलता है कि सत्ता में जो पार्टी होती है, उपचुनाव में उनके प्रत्याशी की जीत को लगभग तय ही माना जाता है। लेकिन, इस चुनाव में शिअद के प्रत्याशी ने काफी कड़ी टक्कर दी। उससे एक बात साफ साबित हो जाती है कि भविष्य में आप के लिए राह इतना आसान नहीं होने वाला है। इस बार कहीं न कहीं जनता का भी सरकार के प्रति रोष देखने को मिला हैं। पंथक सीट जरूर थी ,लेकिन, मैदान में पंथक पार्टी के 2 अलग-अलग पार्टी से लड़ने की वजह से वोट काफी संख्या में बट गया। जिसका फायदा सत्ताधारी पार्टी को मिल गया। अगर भविष्य में शिअद को सीट जीतना है तो एकजुट होना होगा।

