NATIONAL-REPORT… तारिक रहमान का बांग्लादेश का पीएम बनना भारत के लिए कितना है फायदेमंद…?

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SNE NETWORK.NATIONAL DESK.

बांग्लादेश में तारिक रहमान की सरकार बनने वाली है। उनकी पार्टी BNP ने 299 में से 212 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी BNP की जीत पर बधाई दी है। तारिक रहमान की बड़ी चुनौतियों में से एक अपने पड़ोसी भारत के साथ संबंधों को बहाल करना होगा। दशकों से भारत का दोस्त रहा बांग्लादेश, शेख हसीना के तख्ता पलट के बाद से चीन और पाकिस्तान के साथ खड़ा नजर आ रहा है।

तारिक रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP के नेतृत्व वाले अलांयस को 212 सीटों पर जीत मिली। यानी बहुमत के आंकड़े 151 को पार कर लिया है। इस अलायंस में BNP समेत 10 पार्टियां हैं। डॉ. शफीकुर रहमान की जमात-ए-इस्लामी की कमान वाले 11 पार्टियों के गठबंधन को सिर्फ 77 सीटें मिली हैं। जमात चीफ रहमान ने ढाका-15 सीट से जीत दर्ज की है। जमात वाले अलायंस में शामिल नेशनल सिटीजन पार्टी यानी NCP को 6 सीटें मिलीं। ये वही NCP है, जो जुलाई-अगस्त 2024 के सत्ताविरोधी छात्र आंदोलन से निकली। यह पहला ऐसा चुनाव है, जिसमें शेख हसीना की आवामी लीग पार्टी बैन की वजह से नहीं लड़ी। 12 मई 2025 को चुनाव आयोग ने पार्टी का रजिस्ट्रेशन भी सस्पेंड कर दिया था।

BNP के तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। उनकी पार्टी को 212 सीटें मिलीं हैं। 20 नवंबर 1965 को जन्में तारिक रहमान पूर्व पीएम खालिदा जिया के बेटे हैं। 17 साल के निर्वासन के बाद वे 25 दिसंबर 2025 को लंदन से लौटे। वापसी के सिर्फ 5 दिन बाद उनकी मां खालिदा जिया का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। इसके बाद BNP की कमान पूरी तरह तारिक के हाथों में आ गई। उन्हीं के चेहरे पर BNP चुनाव में उतरी। तारिक ने खुद दो सीटों- ढाका-17 और बोगरा-6 से चुनाव लड़ा और दोनों पर जीत दर्ज की।

25 दिसंबर 2025 को तारिक रहमान लंदन से वापस बांग्लादेश आए।

25 दिसंबर 2025 को तारिक रहमान लंदन से वापस बांग्लादेश आए।

दरअसल, तारिक ने खुद को युवाओं और मध्यम वर्ग के मतदाताओं से कनेक्ट किया। उन्होंने खुद को शांत, सुनने वाला और पॉलिसी पर फोकस करने वाले नेता की तरह पेश किया। इसके अलावा तारिक को उनकी मां के निधन के बाद मिली सिम्पैथी और उनकी पॉलिटिकल रीलॉन्चिंग से भी फायदा हुआ।शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में गिरावट आई। अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस ने भारत के परंपरागत विरोधी पाकिस्तान और चीन से दोस्ती बढ़ाई।

ऐसे में भारत को उम्मीद थी कि बांग्लादेश की नई सरकार से रिश्ते ठीक किए जाएंगे। माना जाता है कि BNP भारत का पसंदीदा ऑप्शन है और वे संपर्क में भी है। जब खालिदा जिया का निधन हुआ तो पीएम नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट की। खालिदा के निधन पर विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ढाका पहुंचे और तारिक से मिले। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी नई दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग गए और शोक व्यक्त किया।

31 दिसंबर 2025 को ढाका पहुंचे भारत के विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने तारिक रहमान को पीएम नरेंद्र मोदी का खत सौंपा।

31 दिसंबर 2025 को ढाका पहुंचे भारत के विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने तारिक रहमान को पीएम नरेंद्र मोदी का खत सौंपा।

BNP ने अपने मेनिफेस्टो में विदेश नीति ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ और ‘फ्रेंड यस, मास्टर नो’ नारों के इर्द-गिर्द तैयार की है। एक चुनावी रैली में तारिक रहमान ने कहा, ‘न दिल्ली, न पिंडी, बांग्लादेश सर्वोपरि’। यानी उन्होंने भारत और पाकिस्तान के प्रभाव से मुक्त रहने की बात कही। पूर्व हाई कमिश्नर रीवा गांगुली दास मानती हैं कि हम पड़ोसी हैं और पड़ोसी बदले नहीं जा सकते। हमें एक-दूसरे के साथ काम करना ही पड़ता है। भारत सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि कोई भी सत्ता में आए हम उनके साथ काम करने के लिए तैयार हैं।

BNP ने चुनावी वादा किया है कि बॉर्डर किलिंग्स, जबरन घुसपैठ और स्मगलिंग रोकने के लिए कड़ा रुख अपनाएंगे।तीस्ता और पद्मा जैसी साझा नदियों से बांग्लादेश को उचित हिस्सा दिलाने की कोशिश करेंगे।

साउथ एशियन एसोसिएशन ऑफ कॉर्पोरेशन यानी SAARC को फिर से एक्टिव करेंगे।

  • एसोसिएशन ऑफ साउथ-ईस्ट एशियन नेशंस यानी ASEAN की मेंबरशिप लेने की कोशिश करेंगे।

बांग्लादेश में भारत के हाई कमिश्नर रहे हर्षवर्धन श्रृंगला का कहना है कि तारिक रहमान समझ चुके हैं कि एक सफल पीएम बनने के लिए उन्हें भारत के समर्थन की जरूरत है, या कम से कम भारत की दुश्मनी वह मोल नहीं लेना चाहेंगे। अब देखना यह होगा कि उनकी कथनी और करनी मेल खाती हैं या नहीं।

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