वरिष्ठ पत्रकार.राष्ट्रीय डेस्क।
संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लेने के बाद तृणमूल कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं। इन बांग्लादेशी संदिग्धों की कुल संख्या 450 के करीब बताई जा रही है। यह कदम ओडिशा सरकार की ओर से लिया गया। वहां, टीएमसी का दावा है कि उनमें से ज्यादातर बंगाली भाषी प्रवासी मजदूर हैं। वहीं दूसरी ओर, भाजपा ने ममता बनर्जी सरकार पर अवैध प्रवासियों को शरण देने का आरोप लगाया है। यह राजनीतिक विवाद तब और तेज हो गया जब टीएमसी सांसद और प्रवासी मजदूर कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष समीरूल इस्लाम ने भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय झूठों का सरदार करार दिया।
गौरतलब है अमित मालवीय ने दावा किया था कि ओडिशा में हिरासत में लिए गए 450 प्रवासियों में से 335 के पास प. बंगाल सरकार की ओर से जारी फर्जी दस्तावेज थे। टीएमसी सांसद इस्लाम ने मालवीय के उस दावे पर सबूत मांगे। इस्लाम ने मालवीय पर झूठे दावे करने आरोप लगाया और कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट में भाजपा को करारा झटका लगा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि हिरासत में लिए गए लोग वाकई बांग्लादेशी थे, तो भाजपा शासित ओडिशा सरकार ने अधिकांश लोगों को रिहा क्यों कर दिया?
इस्लाम ने ने मजदूरों को हिरासत में लेने की कार्रवाई को असांविधानिक और अपराध पूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा, अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई में हमें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन आपको अमित शाह से पूछना चाहिए कि बीएसएफ ने उन्हें सीमा पार करने की अनुमति कैसे दी। प. बंगाल के बंगाली भाषी गरीबों को निशाना बनाना, हिरासत में लेना और डिटेंशन सेंटर में रखना अपराध है।

