NATIONAL-UPDATE…ओटीटी प्लेटफॉर्म का नया मसौदा…..लोगों तक भारतीय भाषा का होगा इस्तेमाल

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वरिष्ठ पत्रकार.राष्ट्रीय डेस्क। 

ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए सरकार ने एक नया मसौदा तैयार किया है। इसका मकसद सुनने और देखने में अक्षम लोगों की डिजिटल कंटेंट तक आसान पहुंच प्रदान करना है। इसके मुताबिक, नई प्रोग्रामिंग में भारतीय सांकेतिक भाषा (आईएसएल) में व्याख्या, कैप्शनिंग या ऑडियो विवरण जैसा कम से कम एक एक्सेसिबिलिटी फीचर देना अनिवार्य होगा।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी) ने इन दिशानिर्देशों पर आम जनता और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं, जिन्हें 22 अक्टूबर तक जमा किया जा सकता है। एक बार जब ये दिशा निर्देश अधिसूचित हो जाएंगे, तो ओवर-द-टॉप (ओटीटी) प्लेटफॉर्म इन्हें दो चरणों में दो साल की अवधि में लागू करेंगे। 

पहले चरण में, दिशानिर्देशों के अधिसूचना के छह महीने बाद ओटीटी प्लेटफॉर्म सभी नई सामग्री (कंटेंट) को क्लोज या ओपन कैप्शनिंग, ऑडियो डिस्क्रिप्शन या भारतीय सांकेतिक भाषा (आईएसएल) व्याख्या कम से कम एक एक्सेसिबिलिटी फीचर के साथ रिलीज करेंगे। दिशानिर्देशों में यह भी अनिवार्य किया गया है कि प्लेटफॉर्म एक्सेसिबिलिटी संकेतक दिखाएंगे और सुनिश्चित करें कि एक्सेसिबिलिटी फीचर्स उनके यूजर इंटरफेस में पूरी तरह से शामिल हों।


दूसरे चरण में प्रकाशकों को प्रोत्साहित किया गया है कि वे अपनी पूरी कंटेंट लाइब्रेरी को धीरे-धीरे एक्सेसिबल बनाएं, जिसमें दिशानिर्देशों के प्रकाशन के 12 महीनों के भीतर कम से कम 30 फीसदी, 18 महीनों के भीतर 60 फीसदी और 24 महीनों के भीतर पूरी तरह से एक्सेसिबिलिटी हासिल करनी होगी। मसौदे में कुछ श्रेणियों को इन अनिवार्यताओं से मुक्त रखा गया है। इनमें लाइव और डिफर्ड-लाइव कंटेंट, केवल ऑडियो कंटेंट जैसे कि म्यूजिक और पॉडकास्ट और 10 मिनट या उससे कम के शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट शामिल हैं।


मंत्रालय अनुपालन की निगरानी के लिए एक निगरानी समिति बनाएगा, जिसका नेतृत्व एक संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी करेंगे। यह समिति त्रैमासिक बैठक करेगी, प्रगति की समीक्षा करेगी, शिकायतों को संबोधित करेगी और ओटीटी पारिस्थितिकी तंत्र में लगातार अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी करेगी।

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