RIGHT-DECISION..कोर्ट ने किस राज्य सरकार की मंशा पर उठाया सवाल….किस अधिकारी का निलंबन हुआ वापस…..?

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वरिष्ठ पत्रकार.राष्ट्रीय डेस्क। 

अरुणाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) की सदस्य मेपुंग तदर बागे के खिलाफ पेपर लीक मामले में अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने पेपर लीक मामले में तदर के खिलाफ कोई दुराचार का प्रमाण नहीं पाया, जिसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने उनके निलंबन को तुरंत हटाने का आदेश दिया है। मामले में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और अरविंद कुमार की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 317(1) के तहत राष्ट्रपति को भेजे गए संदर्भ का जवाब देते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप साबित नहीं हुए हैं।


कोर्ट ने कहा कि आरोपों से ये साबित नहीं होता कि उन्होंने कोई दुराचार किया है। ये तो किसी सामान्य लापरवाही की श्रेणी में भी नहीं आता। उनके कामकाज से आयोग की छवि को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेजी जाएगी कि मेपुंग ताडर बागे पर लगाए गए आरोप ‘दुराचार’ की श्रेणी में नहीं आते, इसलिए उन्हें हटाने का कोई आधार नहीं बनता।


इस दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रपति से बागे को हटाने की सिफारिश मनमानी, अनुचित और भेदभावपूर्ण थी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी नोट किया कि जब पेपर लीक का मामला सामने आया, तो आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों ने नैतिक आधार पर इस्तीफा दिया।

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