बटाला रेलवे स्टेशन—जानिए, यात्रियों का क्यों रोज़ाना मौत से हो रहा है मुकाबला, इस पर मानवाधिकार ने क्या लिया एक्शन, किस मामले में डीसी,अस्सिटेंट डिविजनल इंजीनियर से मांगा जवाब…….?

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MOHIT बटालवी.बटाला गुरदासपुर। 

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बटाला रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां पर पैदल यात्री क्रॉसिंग न होने की वजह से  यात्रियों को अवैध और खतरनाक तरीके से रेल की पटरियाँ पर कूदकर ट्रेन पकड़ने मजबूर होना पड़ता हैं। इस जानलेवा अव्यवस्था पर पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग (PSHRC) ने कड़ा संज्ञान लिया है। आयोग ने ‘वन स्टेप सोसाइटी’ के अध्यक्ष कमल कुमार की शिकायत पर उत्तरी रेलवे के सहायक डिवीजनल इंजीनियर-I और गुरदासपुर के उपायुक्त (DC) को रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर, 2025 को होनी है। 

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FOB न होने से ‘जीने का अधिकार’ प्रभावित

समाजसेवक कमल कुमार ने अपनी याचिका में साफ तौर पर कहा है कि जब ट्रेन सेंट्रल ट्रैक पर रुकती है, तो यात्रियों को प्लेटफॉर्म से पटरियों पर छलांग लगाकर ट्रेन तक पहुँचना पड़ता है। उन्होंने इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन करार देते हुए कहा कि यह हजारों लोगों के ‘जीने के अधिकार’ (Right to Life) को प्रभावित करता है, खासकर ठंड के मौसम में यह ओर भी बड़ी दिक्कत बन जाती है। क्योंकि कई बार विजिबिलिटी ज़ीरो भी होती है।

कमल कुमार ने भावुक होते हुए कहा, *”युवा तो शायद ‘जान की बाजी’ लगाकर पटरी पर छलांग लगा दें, पर महिलाओं, बुजुर्गों , छोटे बच्चों और दिव्यांग यात्रियों का क्या?* उनके लिए पटरी पार कर ट्रेन लेना न सिर्फ असुरक्षित बल्कि अशोभनीय भी है।”

रेलवे का टालमटोल और एक साल की देरी

कमल कुमार ने आयोग को बताया कि इस समस्या को लेकर उन्होंने पहले भी शिकायत (Grievance Number: MORLY/E/2024/0015289) दर्ज कराई थी। 2 जुलाई, 2024 को रेलवे अधिकारियों ने जवाब दिया था कि FOB का प्रस्ताव डिवीजन को भेज दिया गया है। लेकिन, लगभग एक साल बीत जाने के बाद भी ज़मीन पर कोई प्रगति नहीं हुई। इसके विपरीत, एक अन्य शिकायत पर 22 जुलाई, 2025 के रेलवे के एक पत्र के अनुसार, FOB की आवश्यकता को व्यवहार्य नहीं पाया गया। इस विरोधाभासी स्थिति से यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ा गई हैं।

BIG QUESTION…कानून का उल्लंघन: मजबूरी या अपराध?

रेलवे ट्रैक पर चलना या खड़ा रहना, रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 147 के तहत एक दंडनीय अपराध (अवैध प्रवेश/Trespass) है। इसके लिए ₹1,000 तक का जुर्माना या 6 माह तक की कैद हो सकती है। स्थानीय जनता का सवाल है कि जब रेलवे आवश्यक सुविधाएँ नहीं दे रहा है, तो यात्री क्या करें? क्या उनकी मजबूरी एक आपराधिक कृत्य बन जाती है?

मंत्री से इस मसले पर गंभीरता से विचार करने की मांग की

‘वन स्टेप सोसाइटी’ ने रेलवे बोर्ड से अपील की है कि इसे मात्र एक स्टेशन समस्या न मानते हुए, जीवन बचाने वाली आवश्यक बुनियादी ढांचा माना जाए। उन्होंने न केवल (FOB) के तत्काल निर्माण की माँग की है, संस्था ने रेलवे राज मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू से भी इस मामले पर विचार करने की मांग की है। वही बटाला के हजारों दैनिक यात्रियों ने (PSHRC) के हस्तक्षेप का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि यह कदम रेल प्रशासन को सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए मजबूर करेगा।

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