पुलिस अधिकारियों की गुंडाई……..पत्रकार की हुई वैरी, पीट-पीटकर कर दिया अधमरा….अब दोषियों को बचा रहा विभाग 

BALWINDER BHALLA-SNE

वरिष्ठ पत्रकार.बटाला (गुरदासपुर)। 

1 अगस्त को पंजाब के जिला गुरदासपुर की तहसील बटाला के लिए इतिहास में काला दिवस के तौर पर मनाया जाएंगा। क्योंकि, उस दिन वहां के वरिष्ठ पत्रकार बलविंदर भल्ला पर अन्य जिला की पुलिस अधिकारियों ( इंस्पेक्टर रैंक) ने उनके साथ तब तक मारपीट की जब तक वह अधमरा नहीं हो गया। इस वारदात से जुड़ी सभी तस्वीरे पास में लगे सीसीटीवी कैमरा में कैद हो चुकी है। हैरान करने वाली बड़ी बात यह है कि इस पूरे मामले को लेकर पुलिस ने सिर्फ अज्ञात पुलिस वालों के खिलाफ ही मामला दर्ज किया। इससे यह बात साफ हो जाती है कि पुलिस विभाग कहीं न कहीं अपने पुलिस अधिकारियों तथा कर्मचारियों को बचाने का पूरी तरह से प्रयास कर रही है। हालांकि, इस मामले में एक पुलिस अधिकारी ने आवश्यक कहा कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है। किसी को नहीं बख्शा जाएगा। चाहे वो विभाग के साथ क्यों न जुड़ा हुआ हों। 

पत्रकार के साथ बेरहमी से मारपीट करने वाला पुलिस इंस्पेक्टर-1

कौन है पत्रकार बलविंदर भल्ला..समझिए, इस रिपोर्ट में….?

वरिष्ठ पत्रकार बलविंदर भल्ला किसी पहचान के मोहताज नहीं है। उन्होंने देश के कई बड़े पत्रकार घरानों में काम किया है। वर्तमान में किसी राष्ट्रीय पत्रकारिता में एक वरिष्ठ पत्रकार के तौर पर काम कर रहे है। उन्होंने हमेशा ही पत्रकारिता में बेबाक होकर जुल्म के खिलाफ आवाज उठाई है। यह उन पर पहला हमला नहीं हुआ है। इससे पहले भी कई बार उन पर जानलेवा हमला तथा उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल चुकी है। लेकिन, उन्होंने कभी किसी की परवाह नहीं करते हुए अपने जीवन में बुराई के खिलाफ कलम के माध्यम से आवाज ही उठाई है। लेकिन, इस बार पुलिस अधिकारियों द्वारा उनके साथ बेरहमी से मारपीट करना, संकेत इस बात का है कि उनके खिलाफ सोची समझी साजिश के तहत अंजाम दिया गया। अब देखना यह होगा कि पुलिस इस मामले को कितनी गंभीरता से लेती है। अधिकतर मामलों में यह देखा गया है कि पुलिस पत्रकारों के मामलों को कभी गंभीरता से नहीं लेती है। जिस कारण पत्रकार हमेशा ही इंसाफ के लिए इधर-उधर भटकते रहते है। 

जानिए, कैसे दिया था वारदात को अंजाम..?

1 अगस्त को वरिष्ठ पत्रकार बलविंदर भल्ला एक निजी होटल में गए थे। उनके सामने 2 संदिग्ध दिखाई दिए जो कि नशे में एकदम टल्ली थे। उन्होंने भल्ला को वहां पर धमकाना आरंभ कर दिया। भल्ला ने अपने संयम में उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन, बिना वर्दी में गुंडा पुलिस अधिकारियों ने भल्ला को होटल से बाहर ले गए। उन्हें वहां पर इतनी बेरहमी से पीटा गया कि वह बेहोश होकर जमीन के नीचे गिर गए। प्रत्यदर्शियों के मुताबिक, जब तक वरिष्ठ पत्रकार अधमरे नहीं हुए, तब तक पुलिस उन्हें लात-घूसों से मारते गए। कोई परिचित भल्ला को उपचार के लिए अस्पताल लेकर गया। 

पुलिस की कार्यप्रणाली पर खड़े हुए सवाल

बताया जा रहा है कि वारदात के उपरांत भल्ला जब चलने के लिए ठीक हुए तो उन्होंने संबंधित थाना में शिकायत दी। बताया जा रहा है कि थाना की पुलिस ने 2 संदिग्ध (जिनकी पहचान बाद में पुलिस अधिकारी के तौर हुई) को हिरासत में ले लिया। वहां पर उनकी पहचान तथा इतना ही नहीं बेलट नंबर सब पुलिस थाना ने सही से नोट कर लिया, लेकिन, उन्हें बाद में छोड़ दिया गया। 

यह मामला, जब पत्रकारों ने उचित तरीके से उठाया तो एसएसपी बटाला ने तत्काल सिविल लाइन थाना के एसएचओ को मामला दर्ज करने के आदेश दिए। अब आनन-फानन में पुलिस ने मामला तो दर्ज कर लिया , लेकिन वो भी अज्ञात के खिलाफ। यहां पर पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवाल खड़ा होता है कि मारपीट करने वाले  पुलिस अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ बाय नेम पर्चा क्यों नहीं दर्ज किया गया. चर्चा इस बात की भी चल रही है कि बटाला पुलिस पर मामला दबाने के लिए ऊपर से दबाव पड़ गया। अफवाह, का बाजार गर्म है कि मामले में किसी तरह अन्य वैकल्पिक रास्ता अपनाकर दोनों के बीच समझौता करवा दिया जाए। 

सोशल मीडिया में जारी पोस्ट में क्या लिखा…जानिए, इस रिपोर्ट में….?

..बड़ा सवाल…..कहा गए पत्रकार संगठन..?

बटाला के एक वरिष्ठ पत्रकार पर अन्य जिला की पुलिस द्वारा बेरहमी से मारपीट की जाती है, लेकिन, इस मामले को लेकर अभी तक किसी पत्रकार संगठन ने पत्रकार के समर्थन में कोई भी बयान तक नहीं जारी किया। बताया जाता है कि बटाला में 2 बड़े पत्रकार संगठन है, जो कि हमेशा ही अपने आपको को पंजाब का सबसे बड़ा पत्रकार संगठन होने के साथ-साथ पत्रकारों के साथ हमेशा खड़ा होने की बात का दावा करते है। लेकिन, इस मामले को लेकर इन दोनों संगठनों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्यों नहीं पत्रकार भल्ला के समर्थन में किसी ने आवाज नहीं उठाई। या फिर यह पूरा प्रकरण हम सब तक यह संदेश पहुंचाने का प्रयास कर रहा है कि पत्रकार संगठन सिर्फ नाम के ही है, पत्रकारों के हितों के काम के लिए बिल्कुल नहीं है। 

कोई दबाव नहीं है पुलिस पर..एसएचओ

थाना सिविल लाइन एसएचओ निर्मलजीत सिंह  ने जानकारी दी कि फिलहाल अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। मामले के हर पहलू पर बारीकी से जांच जारी है। अगर वह पुलिस अधिकारी या कर्मचारी हुआ तो उसे भी नहीं बख्शा जाएगा। किसी प्रकार से पुलिस विभाग का कोई दबाव नहीं है। जल्द ही पकड़ कर सलाखों के पीछे डाला जाएगा। 

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