PUNJAB……GOVT. फंड तो हुए जारी………किसी ने नहीं की उसकी परवाह, अब समय-सीमा हुई  समाप्त, दवा की नहीं मिल पाई रोगियों को सहूलियत, मान-साहब…..ये है सरकारी HOSPITAL का हाल…….। 

वरिष्ठ पत्रकार.चंडीगढ़। 

सरकारी अस्पतालों में दवा नहीं मिल रही है। बाजार से रोगियों को महंगे भाव खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यह पंजाब के लगभग 80 फीसद से ऊपर चलने वाले सरकारी अस्पतालों का हाल है। जनवरी, 2024 में सरकार द्वारा धनराशि जारी करने के बावजूद पंजाब के सरकारी अस्पतालों का बेहाल है। इंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन (स्वास्थ्य विभाग पंजाब) के एक लिखित पत्र में इन सभी बातों का हवाला दिया गया। पत्र पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य सचिव तथा स्वास्थ्य निदेशक, पंजाब स्वास्थ्य एवं भलाई विभाग को 15 मार्च को डाला गया। फिलहाल, किसी प्रकार से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे रोगियों तथा आम-जनता तथा संस्था में काफी रोष पाया जा रहा है। चेतावनी दी गई कि अगर जल्द ही कुछ नहीं किया गया तो उन्हें मजबूरन बड़ा संघर्ष करने का रास्ता अपनाना पड़ सकती है।

संस्था के चेयरमैन डॉक्टर राकेश शर्मा ने बताया कि वह आरंभ से ही आम जनता की आवाज के लिए सरकार तथा विभाग के खिलाफ कई बार कड़ा संघर्ष कर चुके है। इस बार उन्होंने पूरे पंजाब के सरकारी अस्पताल के दवा कटौती को देखा तो पाया कि 80 फीसद दवा उपलब्ध नहीं है। इस पर उनकी संस्था की टीम ने सभी अस्पताल में पड़ताल करने के उपरांत उन्हें एक रिपोर्ट सौंपी, जिसे देखकर वह हक्का-बक्का रह गए। पंजाब सरकार ने तो जनवरी, 2024 को सभी सरकारी अस्पताल में पत्र भेजा था कि अब रोगियों को दवा के मामले में चिंता करने की कोई किसी प्रकार आवश्यकता नहीं पड़ेगी, क्योंकि, दवा सभी अस्पताल में भीतर आसानी से मुहैया हो जाएंगी। इतना ही नहीं, सरकार दवा खर्च के लिए भरपूर धनराशि पास की। 

शर्म तथा हैरान करने वाली बात है कि कुछ सरकारी अस्पताल के अधिकारी सरकार के फैसले का सरेआम उल्लंघन कर रहे है। क्योंकि, बाहरी दवा की वजह से उन्हें मोटी कमीशन जेब में पड़ती है। इसलिए, वे लोग सरकारी दवा को खरीदने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे है। मार्च 31 को धनराशि खर्च करने का समय समाप्त हो रहा है। कुल मिलाकर एक प्रकार से चिकित्सा अधिकारी इस पूरे प्रकरण से जुड़े है। उनका पर्दाफाश होना भी काफी जरूरी है।  मांग की कि एक जांच कमेटी गठित की जानी चाहिए, ताकि, इस पूरे तथ्यों की जांच हों। डाक्टर राकेश ने पूरे दावे के साथ कहां कि बड़ा गोलमाल सामने आएगा। 

……यह है सिस्टम, भीतर से तो दाल है पूरी काली

अगर, इस सिस्टम की बात कीजिए तो दाल भीतर से पूरी तरह से काली है। क्योंकि, समय-समय की सरकारों ने सरकारी अस्पतालों में रोगियों को निशुल्क दवा उपलब्ध कराई। लेकिन, जो बड़े अधिकारी है वो नहीं चाहते कि सरकारी दवा भीतर से उपलब्ध हों। इसके लिए वे खुद ही सरकार द्वारा जारी धनराशि या फिर स्टाक सूची को भेजते तक नहीं है। जिस वजह से परेशान आम जनता तथा रोगी होते है। बाहर से चिकित्सक द्वारा लिखित दवा काफी महंगी होती है। हर किसी के बस में उसे खरीद पाना इतना आसान नहीं होता है। 

अब तक मंत्री से लेकर विभाग को लिखा पत्र, नहीं हुई ठोस कार्रवाई

इस पूरे प्रकरण को लेकर संस्था द्वारा मंत्री तथा स्वास्थ्य से जुड़े विभागीय अधिकारियों को पत्र जा चुका है। किसी की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। अस्पताल में रोगी काफी परेशान हो रहे है। हालात इतने भयंकर है कि डॉक्टर से लेकर अधिकारी रोगियों की कोई बात नहीं सुनता है। शिकायत को एकदम नजरअंदाज किया जा रहा है। 

इस अस्पताल की हो रही खूब चर्चा

सारी जांच-पड़ताल में सामने आया कि जिला तरनतारन का सिविल अस्पताल में तो बिल्कुल ही सरकारी दवा का स्टॉक समाप्त है। किसी अधिकारी ने सरकारी धनराशि से दवा खरीदने की जहमत तक नहीं की। सभी डाक्टर बाहर की दवा लिखते रहे। रोगी महंगी-महंगी दवा खरीदने को मजबूर होते रहे। पता चला है कि इस अस्पताल के खिलाफ सरकार से लेकर विभाग तक शिकायत पहुंची, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। एक मामला खूब चर्चा में रहा कि रोगी को भीतर के चिकित्सक ने इतनी महंगी बाजार की दवा लिख दी कि उसने बाद में कभी सिविल अस्पताल का चेहरा तक नहीं मुड कर देखा। 

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