PUNJAB… कई SENIOR OFFICER’S का ‘SCAM’ में आया नाम……अब HIGH-COURT इस पर सुनाएगा अपना फैसला

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SNE NETWORK. CHANDIGARH.

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट सोमवार को एक पिटीशन पर अपना फैसला सुनाएगा, जिसमें आरोप लगाया गया है कि पंजाब राज्य के सीनियर अधिकारी कई तरह के स्कैम में शामिल थे, जिसमें “ट्रांसफर के लिए कैश; अच्छी पॉलिसी पाने के लिए कैश; टेंडर के लिए कैश, और ऐसी ही दूसरी गैर-कानूनी गतिविधियां” शामिल हैं।

इस मामले में पिटीशनर का कहना है कि इस बारे में एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने पंजाब राज्य को मैसेज भेजे हैं, फिर भी कोई एक्शन नहीं लिया गया है। चीफ जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की बेंच ने पहले कम से कम छह सुनवाई में सभी पक्षों की लंबी और डिटेल्ड दलीलें सुनने के बाद, दूसरी बातों के अलावा, मेंटेनेबिलिटी के मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

बेंच के सामने पेश होकर, ED ने सरकार पर आरोप लगाया कि उसने जालंधर ज़ोन द्वारा राज्य के DGP को भेजे गए लेटर पर एक्शन नहीं लिया। सीनियर वकील और एडिशनल सॉलिसिटर-जनरल सत्य पाल जैन ने कहा, “सरकार ने अपना राजधर्म नहीं निभाया; इसके बजाय, वह राजनीतिक धर्म में लिप्त रही।” जैन ने बेंच के सामने कहा, “हम इस मामले को पॉलिटिकल नहीं बनाना चाहते। इसीलिए ED ने पंजाब पुलिस को लिखा और उसे एक कॉन्फिडेंशियल FIR रजिस्टर करने के लिए कहा गया।”

दूसरी ओर, राज्य ने मामले में फाइनल स्टेटस रिपोर्ट बेंच के सामने रखने के लिए तीन हफ़्ते का समय मांगा। राज्य की ओर से सीनियर वकील विक्रम चौधरी ने कहा, “हम इस पर तीन हफ़्ते के अंदर फाइनल स्टेटस बता देंगे। हम ज़्यादा से ज़्यादा यही मांग रहे हैं। हम पहले से ही प्रोसेस में हैं… हम हर छोटी-बड़ी बात को देख रहे हैं। हम इस बुराई को जड़ से खत्म कर देंगे।”

चौधरी ने सुनवाई के दौरान सवाल किया कि ED को पंजाब DGP को कम्युनिकेशन भेजने में 90 दिन क्यों लगे। चौधरी ने कहा, “वे हमारी 14 दिन की देरी पर सवाल उठा रहे हैं। लेकिन उन्होंने हमें लिखने में 90 दिन लगा दिए और चाहते हैं कि हम कानूनी ज़िम्मेदारियों का पालन किए बिना क्रिमिनल केस दर्ज करें।” उन्होंने आगे कहा कि पंजाब पुलिस को ED द्वारा दिए गए मटीरियल, लगाए गए अपराधों की प्रकृति और हर मामले में कानून के लागू होने की जांच करनी थी।

पिटीशनर, प्रैक्टिसिंग वकील निखिल सराफ ने कहा था कि एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट ने प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 के सेक्शन 66(2) के तहत पंजाब राज्य को कम्युनिकेशन भेजे थे। उन्होंने आगे कहा, “ऐसे फैक्ट्स के साथ-साथ ऊंचे सरकारी पदों पर भ्रष्टाचार के दूसरे फैक्ट्स को भी पब्लिश करने के बावजूद, मामले में कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है।”

अपनी पिटीशन में, सराफ ने कहा कि शिकायत का एक हिस्सा सोशल मीडिया पर कई पत्रकारों और नेताओं के पास मौजूद है। पिटीशन के मुताबिक, मुख्य आरोप सरकारी लोगों, सरकारी कर्मचारियों और मुख्यमंत्री ऑफिस में काम करने वाले दूसरे प्राइवेट लोगों के खिलाफ थे। याचिका में कहा गया कि उनमें से कुछ मुख्यमंत्री के परिवार के बहुत करीब थे।###USA###UK###CANADA###HIGH-COURT###PUNJAB###CHANDIGARH###AAP###CMMANN###INDIA###AUSTRALIA###NEWZEALAND###SINGAPORE###AUSTRIA###ITLAY###GERMANY###NETHER-LAND###IRELAND###CHINA###VIETNAM###

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